Pappu Yadav News: बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने महिला नेताओं को लेकर ऐसा बयान दे दिया है, जिससे विवाद शुरू हो गया है. महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए पप्पू यादव ने कहा कि ज्यादातर महिलाएं किसी पुरुष नेता के कमरे में कुछ समय बिताए बिना राजनीति में नहीं आ सकती हैं. पप्पू यादव ने कहा कि घरेलू हिंसा कौन कर रहा है? औरतों पर बुरी नजर कौन डालता है? अमेरिका से लेकर भारत तक, ये नेता ही हैं.
उन्होंने आगे कहा कि किसी नेता के कमरे में जाए बिना 90 प्रतिशत महिलाएं राजनीति में आ ही नहीं सकतीं. यह रोज हो रहा है. नेताओं की सीसीटीवी फुटेज रोज सामने आती है. औरतों का शोषण अब एक कल्चर बन गया है.
व्यवस्था से जुड़े लोग महिलाओं के शोषण के लिए जिम्मेदार- पप्पू यादव
निर्दलीय सांसद ने कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात सिर्फ सदनों तक सीमित रह गई है और यह अब मजाक का विषय बन चुकी है. देश में महिलाओं को देवी का दर्जा तो दिया जाता है, लेकिन वास्तविक सम्मान नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि सत्ता और व्यवस्था से जुड़े लोग ही महिलाओं के शोषण के लिए जिम्मेदार हैं.
उनके इस बयान पर बिहार राज्य महिला आयोग ने नोटिस जारी किया है. जवाब देने के लिए उन्हें तीन दिनों का समय दिया गया है. महिला आयोग की ओर से जारी पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सांसद द्वारा महिलाओं के संदर्भ में की गई टिप्पणी आपत्तिजनक प्रतीत होती है.
संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर की जा सकती है कानूनी कार्रवाई
आयोग ने इसे महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के खिलाफ मानते हुए पप्पू यादव से निर्धारित समय के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है. आयोग ने अपने नोटिस में यह भी संकेत दिया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
पप्पू यादव ने अपने बयान पर दी ये सफाई
वहीं नोटिस जारी होने के बाद पप्पू यादव की सफाई भी आई है. उन्होंने सोशल मीडियो पर एक वीडियो पोस्ट कर लिखा- “महिलाओं के शोषण और उत्पीड़न के खिलाफ हम लगातार लड़ाई लड़ रहे हैं और महिला आयोग हम को नोटिस दे रही है, जबकि हमने तो यही बात सदन में भी कही. हमने तो डाटा बताया और हम ही को नोटिस.”
उन्होंने आगे कहा कि बिहार में अपराधियों से की जगह पीड़ित के साथ ही अन्याय शुरू हो गया है. यही आयोग नीट की बेटी के मामले में सफेद पोश लोगों को नोटिस क्यों नहीं दिया? रोज बिहार में बेटियों के साथ गलत हो रहा है, कहां होती है तब यह आयोग? शर्मनाक.