Chhattisgarh News: सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड में गन्ना किसानों और मजदूरों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है. विगत चार माह से भुगतान लंबित होने के कारण आक्रोशित किसानों और श्रमिकों ने 27 अप्रैल 2026 को मां महामाया शक्कर कारखाना का घेराव और तालाबंदी करने का ऐलान कर दिया है. इस संबंध में जिला पंचायत सदस्य क्षेत्र क्रमांक 11 सुरेश कुमार आयाम के नेतृत्व में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया है.
ज्ञापन के माध्यम से बताया गया है कि गन्ना आपूर्ति करने वाले किसानों और कारखाने में कार्यरत मजदूरों को पिछले चार महीनों से उनका मेहनताना नहीं मिला है. इससे उनकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. परिवार के भरण-पोषण से लेकर बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों तक का संकट गहराता जा रहा है.
8 अप्रैल सौंपा गया था ज्ञापन
इस मुद्दे को लेकर 8 अप्रैल 2026 को पहले ही शासन-प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था, जिसमें 15 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की गई थी. साथ ही किसानों ने यह भी मांग रखी थी कि कारखाने में गन्ना किसानों द्वारा मनोनीत अध्यक्ष का निर्वाचन किया जाए, ताकि उनकी समस्याओं का समाधान प्रभावी तरीके से हो सके. लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से किसानों और मजदूरों में भारी असंतोष व्याप्त है.
ज्ञापन सौंपने के दौरान नवीन जायसवाल, त्रिभुवन सिंह, मासूम इराकी सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे. सभी ने एक स्वर में कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है.
कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं किसान
किसानों का कहना है कि समय पर भुगतान नहीं होने से वे कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं. कई किसानों ने अपनी फसल उधार लेकर तैयार की थी, लेकिन भुगतान नहीं मिलने से वे आर्थिक संकट में फंस गए हैं. वहीं मजदूरों की स्थिति भी बेहद खराब हो चुकी है, जिनके सामने रोजमर्रा के खर्च चलाना मुश्किल हो गया है.
जिला पंचायत सदस्य सुरेश आयाम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 27 अप्रैल तक बकाया भुगतान नहीं किया गया, तो किसान और मजदूर शांतिपूर्ण तरीके से कारखाने का घेराव कर तालाबंदी करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.
उग्र रूप ले सकता है आंदोलन
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो यह आंदोलन उग्र रूप ले सकता है. अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन किसानों और मजदूरों की समस्याओं को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या 27 अप्रैल से पहले कोई ठोस पहल सामने आती है या नहीं.
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