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Home > राज्य > उत्तर प्रदेश > ट्यूशन टीचर की हैवानियत ने दहलाया दिल, 4 साल की मासूम को वॉशिंग मशीन में दी ऐसी दर्दनाक सजा… थाने से लेकर मंत्री दरबार तक गूंजी चीखें!

ट्यूशन टीचर की हैवानियत ने दहलाया दिल, 4 साल की मासूम को वॉशिंग मशीन में दी ऐसी दर्दनाक सजा… थाने से लेकर मंत्री दरबार तक गूंजी चीखें!

मथुरा में एक ट्यूशन टीचर द्वारा 4 साल की मासूम बच्ची को वॉशिंग मशीन में खड़ा कर पीटने का मामला सामने आया है, जिससे उसके कान और गाल पर गंभीर चोटें आईं. इस मामले में पुलिस की शुरुआती ढिलाई के बाद राज्य महिला आयोग ने कड़ा संज्ञान लिया है.

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Last Updated: July 26, 2026 09:38:15 IST

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उत्तर प्रदेश के मथुरा से एक बेहद दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. यहां हाईवे थाना क्षेत्र में पढ़ने जाने वाली एक चार साल की मासूम बच्ची के साथ उसकी ही ट्यूशन टीचरों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं. आरोप है कि टीचरों ने बच्ची को वॉशिंग मशीन में खड़ा करके इतनी बेरहमी से पीटा कि उसके कान और गाल पर गंभीर चोटें आ गईं.

क्या है पूरा मामला?

हाईवे थाना क्षेत्र के वल्लभकुंज फेज-दो में रहने वाले दीपक ठाकुर वृंदावन के चंद्रोदय मंदिर की देखरेख करते हैं. उनकी चार साल की बेटी भव्या कॉलोनी में ही रहने वाली अंजली सारस्वत और वीना शर्मा के यहां ट्यूशन पढ़ने जाती थी. पीड़िता की मां सीमा ने बताया कि 15 जुलाई को दोपहर तीन बजे बच्ची ट्यूशन पढ़ने गई थी. जब वह शाम को वापस लौटी, तो उसके गाल लाल थे और वह सहमी हुई थी. जब मां ने प्यार से पूछा, तो मासूम ने रोते हुए बताया कि दोनों टीचर- अंजली और वीना ने उसे वॉशिंग मशीन के अंदर खड़ा करके उसके गाल और कान पर बहुत मारा, जिससे उसके कान और होंठ में तेज दर्द हो रहा है.

परिवार का यह भी आरोप है कि दोनों टीचर अंधविश्वास और टोना-टोटका में विश्वास रखती हैं और इसी के चलते उन्होंने बच्ची को निशाना बनाया. जब अगले दिन 16 जुलाई को माता-पिता ने टीचरों से इस बारे में बात की, तो उन्होंने अपनी गलती मानने के बजाय परिवार को ही कॉलोनी से भगाने की धमकी दे डाली.

पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

परिजनों का कहना है कि जब वे शिकायत लेकर हाईवे थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. यहां तक कि बच्ची का मेडिकल तक नहीं कराया गया. जब दो दिन तक थाने से कोई मदद नहीं मिली, तब परिवार ने गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण से गुहार लगाई. मंत्री के दखल देने के बाद पुलिस हरकत में आई और 18 जुलाई को मामला दर्ज किया, लेकिन सिर्फ एनसीआर दर्ज करके खानापूर्ति कर ली गई.

पीड़ित पिता दीपक का आरोप है कि पुलिस ने दबाव में आकर उनका पहला असली प्रार्थना-पत्र बदलवा दिया और दूसरा प्रार्थना-पत्र लिखवाया. नए पत्र में से एक टीचर का नाम हटा दिया गया और वॉशिंग मशीन में खड़ा करके पीटने जैसी गंभीर बात को भी हटा दिया गया ताकि आरोपियों को बचाया जा सके.

राज्य महिला आयोग ने लिया संज्ञान

स्थानीय पुलिस के ढीले रवैये से परेशान होकर परिजनों ने उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया. मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला आयोग ने तुरंत संज्ञान लिया है. आयोग ने एसएसपी को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस मामले में तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए और पूरी जांच रिपोर्ट 13 अगस्त तक आयोग को भेजी जाए. हाईवे थाना प्रभारी प्रशांत कपिल का कहना है कि मामले में एनसीआर दर्ज कर ली गई है और आगे की जांच की जा रही है.

ये भी पढ़ें:- माथे पर बिंदी सजाना पड़ा भारी… ‘वापस भारत जाओ’ कहकर सोशल मीडिया पर भड़कीनफरत, महिला डॉक्टर ने दिया करारा जवाब!

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उत्तर प्रदेश के मथुरा से एक बेहद दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. यहां हाईवे थाना क्षेत्र में पढ़ने जाने वाली एक चार साल की मासूम बच्ची के साथ उसकी ही ट्यूशन टीचरों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं. आरोप है कि टीचरों ने बच्ची को वॉशिंग मशीन में खड़ा करके इतनी बेरहमी से पीटा कि उसके कान और गाल पर गंभीर चोटें आ गईं.

क्या है पूरा मामला?

हाईवे थाना क्षेत्र के वल्लभकुंज फेज-दो में रहने वाले दीपक ठाकुर वृंदावन के चंद्रोदय मंदिर की देखरेख करते हैं. उनकी चार साल की बेटी भव्या कॉलोनी में ही रहने वाली अंजली सारस्वत और वीना शर्मा के यहां ट्यूशन पढ़ने जाती थी. पीड़िता की मां सीमा ने बताया कि 15 जुलाई को दोपहर तीन बजे बच्ची ट्यूशन पढ़ने गई थी. जब वह शाम को वापस लौटी, तो उसके गाल लाल थे और वह सहमी हुई थी. जब मां ने प्यार से पूछा, तो मासूम ने रोते हुए बताया कि दोनों टीचर- अंजली और वीना ने उसे वॉशिंग मशीन के अंदर खड़ा करके उसके गाल और कान पर बहुत मारा, जिससे उसके कान और होंठ में तेज दर्द हो रहा है.

परिवार का यह भी आरोप है कि दोनों टीचर अंधविश्वास और टोना-टोटका में विश्वास रखती हैं और इसी के चलते उन्होंने बच्ची को निशाना बनाया. जब अगले दिन 16 जुलाई को माता-पिता ने टीचरों से इस बारे में बात की, तो उन्होंने अपनी गलती मानने के बजाय परिवार को ही कॉलोनी से भगाने की धमकी दे डाली.

पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

परिजनों का कहना है कि जब वे शिकायत लेकर हाईवे थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. यहां तक कि बच्ची का मेडिकल तक नहीं कराया गया. जब दो दिन तक थाने से कोई मदद नहीं मिली, तब परिवार ने गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण से गुहार लगाई. मंत्री के दखल देने के बाद पुलिस हरकत में आई और 18 जुलाई को मामला दर्ज किया, लेकिन सिर्फ एनसीआर दर्ज करके खानापूर्ति कर ली गई.

पीड़ित पिता दीपक का आरोप है कि पुलिस ने दबाव में आकर उनका पहला असली प्रार्थना-पत्र बदलवा दिया और दूसरा प्रार्थना-पत्र लिखवाया. नए पत्र में से एक टीचर का नाम हटा दिया गया और वॉशिंग मशीन में खड़ा करके पीटने जैसी गंभीर बात को भी हटा दिया गया ताकि आरोपियों को बचाया जा सके.

राज्य महिला आयोग ने लिया संज्ञान

स्थानीय पुलिस के ढीले रवैये से परेशान होकर परिजनों ने उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग का दरवाजा खटखटाया. मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला आयोग ने तुरंत संज्ञान लिया है. आयोग ने एसएसपी को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस मामले में तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए और पूरी जांच रिपोर्ट 13 अगस्त तक आयोग को भेजी जाए. हाईवे थाना प्रभारी प्रशांत कपिल का कहना है कि मामले में एनसीआर दर्ज कर ली गई है और आगे की जांच की जा रही है.

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