UP News: यमुना नदी के बढ़ते प्रदूषण और नदी तट पर हो रहे अवैध निर्माणों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल कड़ा रुख अपनाया है. ट्रिब्यूनल ने जल संसाधन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, मथुरा-वृंदावन नगर निगम, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण, ब्रज तीर्थ विकास परिषद, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा सहित कई विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.
यह कार्रवाई एक याचिका पर की गई है, जिसमें मथुरा और वृंदावन जैसे पवित्र नगरों में यमुना नदी में लगातार बह रहे सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के साथ-साथ नदी के बाढ़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध निर्माणों का मुद्दा उठाया गया है.
किसने दायर की थी याचिका
याचिकाकर्ता ब्रज वृंदावन देवालय समिति के संयुक्त सचिव विजय किशोर गोस्वामी, जो श्री राधा मदन मोहन मंदिर के प्रधान सेवायत हैं ने पूर्व आदेश के अनुपालन के लिए निष्पादन याचिका दायर की थी.
इससे पहले 17 दिसंबर 2021 को दिए गए आदेश में मुख्य सचिव सहित संबंधित अधिकारियों को सीवेज ट्रीटमेंट व्यवस्था दुरुस्त करने, अतिक्रमण हटाने और नदी संरक्षण के लिए वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए गए थे.
उपयोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त नदी का पानी
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ, शुभम उपाध्याय और अनुकृति बाजपेयी ने पक्ष रखा. अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने ट्रिब्यूनल को अवगत कराया कि यमुना नदी की स्थिति अब भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के “डिज़ाइनेटेड बेस्ट यूज़ क्राइटेरिया” के अनुसार ‘D’ श्रेणी में बनी हुई है जो दर्शाता है कि नदी का जल स्नान, पेय या घरेलू उपयोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त है.
उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद यमुना तट पर अवैध निर्माण लगातार जारी हैं. प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यमुना किनारे पहुंचते हैं, जिनमें से कई लोग इस प्रदूषित जल से आचमन भी करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है.
ठोस कार्रवाई की उम्मीद
ट्रिब्यूनल के इस कदम से संबंधित विभागों पर जवाबदेही तय होने और यमुना की स्थिति सुधारने की दिशा में ठोस कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है.
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