UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के यानी SIR को लेकर सियासी और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है. इसी बीच मतदाताओं की धार्मिक हिस्सेदारी को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं. हालांकि, निर्वाचन आयोग आधिकारिक तौर पर मतदाताओं का धर्मवार आंकड़ा जारी नहीं करता, इसलिए हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं के प्रतिशत से जुड़े आंकड़ों को आधिकारिक संख्या के बजाय अनुमान या दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए. निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर यूपी की SIR-2026 मतदाता सूची और उससे जुड़ी जानकारी उपलब्ध है.
SIR के बाद मुस्लिम वोटरों का प्रतिशत बढ़ने का दावा
सामने आए दावों में कहा जा रहा है कि SIR प्रक्रिया के बाद उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी में करीब 0.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. दावा है कि SIR से पहले मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 18.6 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 19.5 प्रतिशत के आसपास पहुंच गई है. इसके साथ ही नए जुड़ने वाले मतदाताओं में करीब 35 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता होने का दावा भी किया जा रहा है. हालांकि, इन आंकड़ों की पुष्टि निर्वाचन आयोग की ओर से धर्म के आधार पर नहीं की गई है. ऐसे में इन दावों को आधिकारिक मतदाता आंकड़ा मानना सही नहीं होगा.
क्या यूपी में हिंदू वोटरों का प्रतिशत भी तय है?
यूपी में हिंदू मतदाताओं की सटीक संख्या या प्रतिशत भी निर्वाचन आयोग धर्म के आधार पर जारी नहीं करता. इसलिए SIR के बाद प्रदेश में कितने प्रतिशत हिंदू मतदाता हैं, इसका कोई आधिकारिक धर्मवार आंकड़ा उपलब्ध नहीं है. यही वजह है कि हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं के प्रतिशत की तुलना करते समय जनगणना के धार्मिक आंकड़ों और मतदाता सूची के अनुमानों को अलग-अलग समझना जरूरी है. मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम, उम्र और अन्य चुनावी विवरण दर्ज होते हैं, लेकिन धर्म के आधार पर आधिकारिक मतदाता वर्गीकरण नहीं किया जाता.
2011 की जनगणना में मुस्लिम आबादी करीब 19.3 प्रतिशत
उत्तर प्रदेश में धार्मिक आबादी के संदर्भ में 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाता है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में मुस्लिम आबादी करीब 19.3 प्रतिशत थी. कुल अल्पसंख्यक आबादी का हिस्सा इससे कुछ अधिक था, जिसमें सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और अन्य समुदाय भी शामिल हैं. हालांकि, आबादी का प्रतिशत और मतदाताओं का प्रतिशत एक जैसा होना जरूरी नहीं है. किसी समुदाय की कुल आबादी में बच्चों और नाबालिगों की संख्या भी शामिल होती है, जबकि मतदाता सूची में केवल पात्र मतदाता शामिल होते हैं. इसलिए जनगणना के आंकड़ों से सीधे मतदाता प्रतिशत निकालना उचित नहीं है.
मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका क्यों अम हम मानी जाती है?
उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में मुस्लिमतदाताओं की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है. राज्य की कई विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या चुनावी समीकरण को प्रभावित करने की स्थिति में है. यही कारण है कि मतदाता सूची में किसी भी बड़े बदलाव को राजनीतिक दल बेहद गंभीरता से देखते हैं. पिछले कुछ चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं के बड़े हिस्से के समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगी दलों के पक्ष में जाने की राजनीतिक चर्चा रही है. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन को मुस्लिम समर्थन मिलने का दावा किया गया था.
SIR के बाद आंकड़ों की तस्वीर समझना क्यों जरूरी है?
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना और पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने के साथ अपात्र, मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाना है. यूपी में SIR-2026 की अंतिम मतदाता सूची जिला स्तर पर उपलब्ध कराई गई है और संबंधित चुनावी पोर्टल पर इसे देखा जा सकता है. इसलिए SIR के बाद किसी समुदाय के मतदाताओं का प्रतिशत बढ़ने या घटने से जुड़े दावों को समझने के लिए आधिकारिक मतदाता सूची और प्रमाणित आंकड़ों को आधार बनाना जरूरी है.
2027 के चुनाव से पहले बढ़ेगी आंकड़ों पर नजर
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं. ऐसे में मतदाता सूची में हुए बदलाव आने वाले महीनों में राजनीतिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन सकते हैं. हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं के प्रतिशत को लेकर सामने आ रहे दावों के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि धर्मवार मतदाताओं की आधिकारिक संख्या फिलहाल निर्वाचन आयोग की ओर से जारी नहीं की गई है. इसलिए 18.6 प्रतिशत से 19.5 प्रतिशत या नए मतदाताओं में 35 प्रतिशत मुस्लिम होने जैसे आंकड़ों को फिलहाल दावे के रूप में ही देखना चाहिए. आधिकारिक धर्मवार आंकड़ा सामने आने तक इनसे यूपी के कुल हिंदू और मुस्लिम मतदाताओं का निश्चित प्रतिशत तय करना संभव नहीं है.