Gym Boys Shocked By Worker's Physique: यह मामला आज की पीढ़ी के फिटनेस के प्रति नजरिए को चुनौती देता है, मज़दूर के शरीर में जो मसल्स थे वे 'फंक्शनल स्ट्रेंथ' का परिणाम थे, यानी वह शरीर केवल दिखने के लिए नहीं, बल्कि भारी वजन उठाने और मेहनत करने के लिए बना था, जिम जाने वाले लड़कों ने स्वीकार किया कि सप्लीमेंट्स और नियंत्रित वातावरण में बनी बॉडी 'शोबाजी' (Showy) तो हो सकती है, लेकिन एक मज़दूर की तरह 'स्टील बॉडी' बनाना नामुमकिन है,जहां जिम में लोग हज़ारों रुपये खर्च करते हैं, वहीं एक मज़दूर सादा खाना खाकर और मेहनत करके वैसा ही, या उससे बेहतर परिणाम हासिल कर लेता है. इंटरनेट पर यूजर्स लिख रहे हैं कि यह कहानी याद दिलाती है कि हमारे पूर्वज और किसान बिना जिम जाए क्यों इतने ताकतवर होते थे.