Mohammad Sabir Puncture Shop Burned Gujarat: मोहम्मद साबिर की आपबीती उस दर्द को बयां करती है जो दंगों के बाद एक आम आदमी को झेलना पड़ता है, साबिर ने बताया कि हमलावर 15-20 की संख्या में थे वे इतने आक्रामक थे कि साबिर में उनके सामने आकर अपनी दुकान बचाने की हिम्मत नहीं हुई, उन्हें डर था कि अगर वे बाहर आए तो भीड़ उनकी जान ले लेगी, एक पंक्चर की दुकान चलाने वाले के लिए 5 लाख रुपये एक बहुत बड़ी रकम होती है पूरा निवेश और मशीनरी जलकर राख हो चुकी है, साबिर अब इस बात से डरे हुए हैं कि वे कर्ज कैसे लौटाएंगे और बच्चों का पेट कैसे पालेंगे साबिर का भावुक बयान— हम सोचते थे कमाएंगे और बच्चों को पढ़ाएंगे, अब क्या करें? मन करता है सुसाइड कर लें— समाज और प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है, स्थानीय लोग और नागरिक संगठन अब साबिर की मदद के लिए आगे आ रहे हैं प्रशासन से मांग की जा रही है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन 15-20 लोगों की पहचान की जाए जिन्होंने एक गरीब की आजीविका छीनी है.
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