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HomeVideosसब कुछ जल गया, अब मर जाएं क्या? धंधुका में बिहार के ‘मोहम्मद साबिर’ की दुकान फूंकी, आंखों के सामने खाक हुई 5 लाख की मेहनत!

सब कुछ जल गया, अब मर जाएं क्या? धंधुका में बिहार के ‘मोहम्मद साबिर’ की दुकान फूंकी, आंखों के सामने खाक हुई 5 लाख की मेहनत!

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-20 16:24:27

अहमदाबाद के धंधुका इलाके में हुई सांप्रदायिक हिंसा और तनाव के बीच एक गरीब प्रवासी मजदूर की ज़िंदगी तबाह हो गई, मूल रूप से बिहार के रहने वाले मोहम्मद साबिर, जो अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का सपना लेकर गुजरात आए थे, उनकी पंक्चर की दुकान को भीड़ ने आग के हवाले कर दिया साबिर ने यह दुकान 5 से 5.5 लाख रुपये का कर्ज (Loan) लेकर खड़ी की थी, घटना के वक्त वे अपनी जान बचाने के लिए दूर छिपकर अपनी दुकान को जलता देखते रहे, साबिर का कहना है कि उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी, फिर भी उन्हें निशाना बनाया गया अब उनके पास ना काम बचा है और ना ही कर्ज चुकाने के पैसे.


 Mohammad Sabir Puncture Shop Burned Gujarat: मोहम्मद साबिर की आपबीती उस दर्द को बयां करती है जो दंगों के बाद एक आम आदमी को झेलना पड़ता है, साबिर ने बताया कि हमलावर 15-20 की संख्या में थे वे इतने आक्रामक थे कि साबिर में उनके सामने आकर अपनी दुकान बचाने की हिम्मत नहीं हुई, उन्हें डर था कि अगर वे बाहर आए तो भीड़ उनकी जान ले लेगी, एक पंक्चर की दुकान चलाने वाले के लिए 5 लाख रुपये एक बहुत बड़ी रकम होती है पूरा निवेश और मशीनरी जलकर राख हो चुकी है, साबिर अब इस बात से डरे हुए हैं कि वे कर्ज कैसे लौटाएंगे और बच्चों का पेट कैसे पालेंगे साबिर का भावुक बयान— हम सोचते थे कमाएंगे और बच्चों को पढ़ाएंगे, अब क्या करें? मन करता है सुसाइड कर लें— समाज और प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है, स्थानीय लोग और नागरिक संगठन अब साबिर की मदद के लिए आगे आ रहे हैं प्रशासन से मांग की जा रही है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन 15-20 लोगों की पहचान की जाए जिन्होंने एक गरीब की आजीविका छीनी है.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-20 16:24:27


 Mohammad Sabir Puncture Shop Burned Gujarat: मोहम्मद साबिर की आपबीती उस दर्द को बयां करती है जो दंगों के बाद एक आम आदमी को झेलना पड़ता है, साबिर ने बताया कि हमलावर 15-20 की संख्या में थे वे इतने आक्रामक थे कि साबिर में उनके सामने आकर अपनी दुकान बचाने की हिम्मत नहीं हुई, उन्हें डर था कि अगर वे बाहर आए तो भीड़ उनकी जान ले लेगी, एक पंक्चर की दुकान चलाने वाले के लिए 5 लाख रुपये एक बहुत बड़ी रकम होती है पूरा निवेश और मशीनरी जलकर राख हो चुकी है, साबिर अब इस बात से डरे हुए हैं कि वे कर्ज कैसे लौटाएंगे और बच्चों का पेट कैसे पालेंगे साबिर का भावुक बयान— हम सोचते थे कमाएंगे और बच्चों को पढ़ाएंगे, अब क्या करें? मन करता है सुसाइड कर लें— समाज और प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है, स्थानीय लोग और नागरिक संगठन अब साबिर की मदद के लिए आगे आ रहे हैं प्रशासन से मांग की जा रही है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन 15-20 लोगों की पहचान की जाए जिन्होंने एक गरीब की आजीविका छीनी है.

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