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HomeVideosलातूर में ‘शिक्षा के मंदिर’ का काला चेहरा, 18 साल के दिव्यांग छात्र को बेहरमी से पीटा श्री संत ज्ञानेश्वर स्कूल के स्टाफ की हैवानियत कैमरे में कैद!

लातूर में ‘शिक्षा के मंदिर’ का काला चेहरा, 18 साल के दिव्यांग छात्र को बेहरमी से पीटा श्री संत ज्ञानेश्वर स्कूल के स्टाफ की हैवानियत कैमरे में कैद!

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-19 23:05:46

महाराष्ट्र के लातूर जिले के अहमदपुर स्थित श्री संत ज्ञानेश्वर स्कूल से एक बेहद विचलित करने वाला वीडियो सामने आया है, इस वीडियो में स्कूल का स्टाफ एक 18 वर्षीय दिव्यांग (Specially-abled) छात्र के साथ बर्बरता करता नज़र आ रहा है, स्टाफ ने ना केवल छात्र को बुरी तरह पीटा, बल्कि उसका गला घोंटने की भी कोशिश की, यह घटना दिखाती है कि कैसे विशेष बच्चों के लिए बनाए गए संस्थानों में संवेदनशीलता का अभाव है, छात्र के परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी रोष है और वे आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.


Shree Sant Dnyaneshwar School Ahmedpur Latur Viral Video: यह घटना समाज की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है जहाँ बेबस बच्चों को सुरक्षा के नाम पर हिंसा का शिकार बनाया जाता है, वीडियो में देखा जा सकता है कि छात्र खुद का बचाव करने में असमर्थ है फिर भी स्टाफ का सदस्य उस पर हमला करना जारी रखता है, यह ना केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि एक गंभीर अपराध भी है इस खबर के बाद उन माता-पिता में भारी डर है जो अपने विशेष बच्चों को ऐसे स्कूलों के भरोसे छोड़ते हैं, स्कूल प्रशासन की जवाबदेही पर बड़े सवाल उठ रहे हैं, नागरिक और कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि दोषियों पर ना केवल मारपीट, बल्कि ‘राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज एक्ट’ (RPWD Act) के तहत भी मामला दर्ज किया जाए, हिंसा कभी सुरक्षा नहीं हो सकती विशेष बच्चों को धैर्य, सहानुभूति और विशेषज्ञ देखभाल की आवश्यकता होती है, ना कि शारीरिक प्रताड़ना की.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-19 23:05:46


Shree Sant Dnyaneshwar School Ahmedpur Latur Viral Video: यह घटना समाज की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है जहाँ बेबस बच्चों को सुरक्षा के नाम पर हिंसा का शिकार बनाया जाता है, वीडियो में देखा जा सकता है कि छात्र खुद का बचाव करने में असमर्थ है फिर भी स्टाफ का सदस्य उस पर हमला करना जारी रखता है, यह ना केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि एक गंभीर अपराध भी है इस खबर के बाद उन माता-पिता में भारी डर है जो अपने विशेष बच्चों को ऐसे स्कूलों के भरोसे छोड़ते हैं, स्कूल प्रशासन की जवाबदेही पर बड़े सवाल उठ रहे हैं, नागरिक और कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि दोषियों पर ना केवल मारपीट, बल्कि ‘राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज एक्ट’ (RPWD Act) के तहत भी मामला दर्ज किया जाए, हिंसा कभी सुरक्षा नहीं हो सकती विशेष बच्चों को धैर्य, सहानुभूति और विशेषज्ञ देखभाल की आवश्यकता होती है, ना कि शारीरिक प्रताड़ना की.

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