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काम से ब्रेक लिया तो PF पर क्या होगा असर? बैलेंस, ब्याज और निकासी के नियम जानें

EPFO rules after leaving job 2026: आपका EPF अकाउंट चालू रहता है और जमा पैसा आपका ही रहता है. भले ही आप दो नौकरियों के बीच के समय में कोई नया योगदान न करें फिर भी मौजूदा बैलेंस पर 'एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइज़ेशन' (EPFO) के नियमों के अनुसार ब्याज मिलता रहता है.

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Last Updated: August 8, 2026 15:56:31 IST

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EPFO rules after leaving job 2026: नौकरी छोड़ने का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि आपकी हर महीने मिलने वाली सैलरी बंद हो जाएगी इससे आपकी रिटायरमेंट सेविंग्स को लेकर भी सवाल उठते हैं.

अगर आप करियर से ब्रेक लेने के बारे में सोच रहे हैं या हाल ही में नौकरी छोड़ी है, तो यहां‌ EPFO के वे नियम दिए गए हैं जो आपके EPF बैलेंस पर मिलने वाले ब्याज, पैसे निकालने के विकल्पों और टैक्स से जुड़े पहलुओं पर लागू होते हैं.

अच्छी बात यह है कि नौकरी छोड़ने का मतलब आपके EPF फायदों को खोना नहीं है. आपका EPF अकाउंट चालू रहता है और जमा पैसा आपका ही रहता है. भले ही आप दो नौकरियों के बीच के समय में कोई नया योगदान न करें फिर भी मौजूदा बैलेंस पर ‘एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइज़ेशन’ (EPFO) के नियमों के अनुसार ब्याज मिलता रहता है.

आपके EPF बैलेंस पर कितने समय तक ब्याज मिलता रहता है?

EPFO के नियमों के अनुसार आपके EPF अकाउंट में जमा पैसे पर 58 साल की उम्र तक ब्याज मिलता रहता है भले ही आपने नौकरी छोड़ दी हो.

हालांकि इसमें एक जरूरी अपवाद भी है. अगर कोई कर्मचारी 55 साल या उससे ज्यादा की उम्र में नौकरी छोड़ता है तो उसे ज्यादा से ज्यादा तीन साल तक ही ब्याज मिलता है. उसके बाद अकाउंट को इनएक्टिव (निष्क्रिय) मान लिया जाता है और आगे कोई ब्याज नहीं दिया जाता है.

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF की ब्याज दर सालाना 8.25% तय की गई है. इसका मतलब है कि जो लोग अपने करियर से ब्रेक ले रहे हैं, उन्हें इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है कि उनकी रिटायरमेंट सेविंग्स पर मिलने वाला रिटर्न तुरंत बंद हो जाएगा.

क्या करियर में ब्रेक के दौरान आपको अपना EPF निकालना चाहिए?

EPF से पैसे निकालने के बदले हुए नियमों के तहत जिन कर्मचारियों की नौकरी चली जाती है वे तुरंत अपने EPF बैलेंस का 75% तक निकाल सकते हैं. बाकी 25% तभी निकाला जा सकता है जब वे लगातार 12 महीनों तक बेरोजगार रहें.

निकाली जाने वाली रकम में कर्मचारी का योगदान, नियोक्ता (employer) का योगदान और दोनों पर मिला ब्याज शामिल होता है.

हालांकि फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि जब तक बहुत जरूरी न हो तब तक EPF की बचत न निकालें. करियर में ब्रेक के दौरान समय से पहले पैसे निकालने से आपके रिटायरमेंट फंड में भारी कमी आ सकती है और आपकी लंबे समय की फाइनेंशियल सिक्योरिटी पर असर पड़ सकता है.

टैक्स से जुड़े नियमों को समझें

अपनी EPF सेविंग्स निकालने से पहले आपको टैक्स के नियमों पर भी विचार करना चाहिए. अगर आप लगातार पांच साल की सर्विस पूरी करने से पहले अपना EPF बैलेंस निकालते हैं तो निकाली गई रकम पर टैक्स लग सकता है.

हालांकि अगर आपने लगातार पांच साल की सर्विस पूरी कर ली है और रिटायरमेंट, इस्तीफा, बीमारी, विकलांगता, कंपनी बंद होने या किसी अन्य वाजिब वजह से पैसे निकालते हैं तो पूरा EPF विड्रॉल टैक्स-फ्री रहता है. इसलिए पांच साल की सर्विस पूरी करने से पहले पैसे निकालने पर टैक्स की देनदारी बन सकती है जिससे बचा जा सकता था.

अगर आपके EPF क्लेम में देरी हो रही है तो आपको क्या करना चाहिए?

कभी-कभी EPFO द्वारा जमा किया गया ब्याज पासबुक में दिखने में समय लग सकता है. हालांकि जब तक अकाउंट नियमों के तहत एक्टिव रहता है, तब तक ब्याज जुड़ता रहता है.

ऑनलाइन EPF क्लेम आमतौर पर सात से दस दिनों में सेटल हो जाते हैं, बशर्ते अकाउंट होल्डर ने जरूरी KYC प्रक्रिया पूरी कर ली हो. अगर 20 दिनों के अंदर क्लेम प्रोसेस नहीं होता है, तो मेंबर EPFiGMS पोर्टल के ज़रिए शिकायत दर्ज कर सकता है.

नए नियमों के तहत अगर बिना किसी ठोस कारण के तय समय-सीमा से ज्यादा देरी होती है तो संबंधित अधिकारी को सालाना 12% की दर से पेनल्टी ब्याज देना पड़ सकता है.

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EPFO rules after leaving job 2026: नौकरी छोड़ने का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि आपकी हर महीने मिलने वाली सैलरी बंद हो जाएगी इससे आपकी रिटायरमेंट सेविंग्स को लेकर भी सवाल उठते हैं.

अगर आप करियर से ब्रेक लेने के बारे में सोच रहे हैं या हाल ही में नौकरी छोड़ी है, तो यहां‌ EPFO के वे नियम दिए गए हैं जो आपके EPF बैलेंस पर मिलने वाले ब्याज, पैसे निकालने के विकल्पों और टैक्स से जुड़े पहलुओं पर लागू होते हैं.

अच्छी बात यह है कि नौकरी छोड़ने का मतलब आपके EPF फायदों को खोना नहीं है. आपका EPF अकाउंट चालू रहता है और जमा पैसा आपका ही रहता है. भले ही आप दो नौकरियों के बीच के समय में कोई नया योगदान न करें फिर भी मौजूदा बैलेंस पर ‘एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइज़ेशन’ (EPFO) के नियमों के अनुसार ब्याज मिलता रहता है.

आपके EPF बैलेंस पर कितने समय तक ब्याज मिलता रहता है?

EPFO के नियमों के अनुसार आपके EPF अकाउंट में जमा पैसे पर 58 साल की उम्र तक ब्याज मिलता रहता है भले ही आपने नौकरी छोड़ दी हो.

हालांकि इसमें एक जरूरी अपवाद भी है. अगर कोई कर्मचारी 55 साल या उससे ज्यादा की उम्र में नौकरी छोड़ता है तो उसे ज्यादा से ज्यादा तीन साल तक ही ब्याज मिलता है. उसके बाद अकाउंट को इनएक्टिव (निष्क्रिय) मान लिया जाता है और आगे कोई ब्याज नहीं दिया जाता है.

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF की ब्याज दर सालाना 8.25% तय की गई है. इसका मतलब है कि जो लोग अपने करियर से ब्रेक ले रहे हैं, उन्हें इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है कि उनकी रिटायरमेंट सेविंग्स पर मिलने वाला रिटर्न तुरंत बंद हो जाएगा.

क्या करियर में ब्रेक के दौरान आपको अपना EPF निकालना चाहिए?

EPF से पैसे निकालने के बदले हुए नियमों के तहत जिन कर्मचारियों की नौकरी चली जाती है वे तुरंत अपने EPF बैलेंस का 75% तक निकाल सकते हैं. बाकी 25% तभी निकाला जा सकता है जब वे लगातार 12 महीनों तक बेरोजगार रहें.

निकाली जाने वाली रकम में कर्मचारी का योगदान, नियोक्ता (employer) का योगदान और दोनों पर मिला ब्याज शामिल होता है.

हालांकि फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि जब तक बहुत जरूरी न हो तब तक EPF की बचत न निकालें. करियर में ब्रेक के दौरान समय से पहले पैसे निकालने से आपके रिटायरमेंट फंड में भारी कमी आ सकती है और आपकी लंबे समय की फाइनेंशियल सिक्योरिटी पर असर पड़ सकता है.

टैक्स से जुड़े नियमों को समझें

अपनी EPF सेविंग्स निकालने से पहले आपको टैक्स के नियमों पर भी विचार करना चाहिए. अगर आप लगातार पांच साल की सर्विस पूरी करने से पहले अपना EPF बैलेंस निकालते हैं तो निकाली गई रकम पर टैक्स लग सकता है.

हालांकि अगर आपने लगातार पांच साल की सर्विस पूरी कर ली है और रिटायरमेंट, इस्तीफा, बीमारी, विकलांगता, कंपनी बंद होने या किसी अन्य वाजिब वजह से पैसे निकालते हैं तो पूरा EPF विड्रॉल टैक्स-फ्री रहता है. इसलिए पांच साल की सर्विस पूरी करने से पहले पैसे निकालने पर टैक्स की देनदारी बन सकती है जिससे बचा जा सकता था.

अगर आपके EPF क्लेम में देरी हो रही है तो आपको क्या करना चाहिए?

कभी-कभी EPFO द्वारा जमा किया गया ब्याज पासबुक में दिखने में समय लग सकता है. हालांकि जब तक अकाउंट नियमों के तहत एक्टिव रहता है, तब तक ब्याज जुड़ता रहता है.

ऑनलाइन EPF क्लेम आमतौर पर सात से दस दिनों में सेटल हो जाते हैं, बशर्ते अकाउंट होल्डर ने जरूरी KYC प्रक्रिया पूरी कर ली हो. अगर 20 दिनों के अंदर क्लेम प्रोसेस नहीं होता है, तो मेंबर EPFiGMS पोर्टल के ज़रिए शिकायत दर्ज कर सकता है.

नए नियमों के तहत अगर बिना किसी ठोस कारण के तय समय-सीमा से ज्यादा देरी होती है तो संबंधित अधिकारी को सालाना 12% की दर से पेनल्टी ब्याज देना पड़ सकता है.

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