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शरद पूर्णिमा 2026 कब है? जानें चंद्रोदय का समय, शुभ मुहूर्त और खीर रखने की परंपरा

When is Sharad Purnima: शरद पूर्णिमा 2026 में 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी. द्रिक पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी. कोजागरी पूजा का निशिता मुहूर्त रात 11:40 बजे से 12:31 बजे तक बताया गया है. इस दिन चांदनी में खीर रखने, चंद्रमा को अर्घ्य देने और मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति की कामना पूरी होती है.

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Last Updated: October 17, 2026 21:43:57 IST

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When is Sharad Purnima: हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है. मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान होती हैं, इसलिए खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा निभाई जाती है. शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है. इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि साल 2026 में शरद पूर्णिमा किस दिन मनाई जाएगी, पूर्णिमा तिथि कब से कब तक रहेगी और कोजागरी पूजा के लिए कौन सा मुहूर्त शुभ रहेगा.

25 अक्टूबर को मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा

द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी. पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर होगी. वहीं, इसका समापन 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर होगा. इस दिन चंद्रमा की पूजा और मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भक्त इस अवसर पर पूजा पाठ करके सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं.

कोजागरी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की पूजा के लिए निशिता काल को शुभ माना जाता है. दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, साल 2026 में कोजागरी पूजा का निशिता मुहूर्त 25 अक्टूबर की रात 11 बजकर 40 मिनट से 26 अक्टूबर की रात 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा. पूजा की कुल अवधि 51 मिनट बताई गई है. इस दौरान भक्त मां लक्ष्मी की पूजा और मंत्रों का जाप कर सकते हैं. धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से मां लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख समृद्धि और शांति बनी रहती है.

शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में क्यों रखी जाती है खीर?

शरद पूर्णिमा पर खीर बनाकर रातभर चांदनी में रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणें अमृत के समान गुणकारी मानी जाती हैं. इसी विश्वास के चलते लोग खीर को खुले स्थान पर रखते हैं, ताकि उस पर चंद्रमा की रोशनी पड़े. अगले दिन इस खीर को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों के बीच बांटा जाता है. यह परंपरा शरद पूर्णिमा को अन्य पूर्णिमा तिथियों से अलग पहचान देती है. इस अवसर पर लोग चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं और परिवार की सुख शांति के लिए प्रार्थना करते हैं. हालांकि, चांदनी में रखी खीर को अमृत के समान मानना धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ी मान्यता है.

मां लक्ष्मी की पूजा से जुड़ी है कोजागरी पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों को आशीर्वाद देती हैं. इसी वजह से कई लोग रात में जागकर पूजा पाठ करते हैं और मां लक्ष्मी से घर में धन धान्य, सुख शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं.

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When is Sharad Purnima: हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है. मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान होती हैं, इसलिए खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा निभाई जाती है. शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है. इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि साल 2026 में शरद पूर्णिमा किस दिन मनाई जाएगी, पूर्णिमा तिथि कब से कब तक रहेगी और कोजागरी पूजा के लिए कौन सा मुहूर्त शुभ रहेगा.

25 अक्टूबर को मनाई जाएगी शरद पूर्णिमा

द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी. पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर होगी. वहीं, इसका समापन 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर होगा. इस दिन चंद्रमा की पूजा और मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भक्त इस अवसर पर पूजा पाठ करके सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं.

कोजागरी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की पूजा के लिए निशिता काल को शुभ माना जाता है. दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, साल 2026 में कोजागरी पूजा का निशिता मुहूर्त 25 अक्टूबर की रात 11 बजकर 40 मिनट से 26 अक्टूबर की रात 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा. पूजा की कुल अवधि 51 मिनट बताई गई है. इस दौरान भक्त मां लक्ष्मी की पूजा और मंत्रों का जाप कर सकते हैं. धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से मां लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख समृद्धि और शांति बनी रहती है.

शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में क्यों रखी जाती है खीर?

शरद पूर्णिमा पर खीर बनाकर रातभर चांदनी में रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणें अमृत के समान गुणकारी मानी जाती हैं. इसी विश्वास के चलते लोग खीर को खुले स्थान पर रखते हैं, ताकि उस पर चंद्रमा की रोशनी पड़े. अगले दिन इस खीर को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों के बीच बांटा जाता है. यह परंपरा शरद पूर्णिमा को अन्य पूर्णिमा तिथियों से अलग पहचान देती है. इस अवसर पर लोग चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं और परिवार की सुख शांति के लिए प्रार्थना करते हैं. हालांकि, चांदनी में रखी खीर को अमृत के समान मानना धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ी मान्यता है.

मां लक्ष्मी की पूजा से जुड़ी है कोजागरी पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों को आशीर्वाद देती हैं. इसी वजह से कई लोग रात में जागकर पूजा पाठ करते हैं और मां लक्ष्मी से घर में धन धान्य, सुख शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं.

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