Vaitarani River | Garuda Purana : सनातन धर्म में गरुड़ पुराण का काफी अधिक महत्व माना जाता है. इस ग्रंथ में मृत्यु, आत्मा की यात्रा और कर्मों के फल से जुड़े कई प्रसंगों का वर्णन मिलता है. इसी पुराण में वैतरणी नदी का महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, मृत्यु के बाद यमलोक की यात्रा के दौरान आत्मा को इस नदी से गुजरना होता है. गरुड़ पुराण में भी इसका उल्लेख मिलता है.
कैसी होती है वैतरणी नदी?
गरुड़ पुराण में वैतरणी नदी को सामान्य नदी से बिल्कुल अलग और भयानक बताया गया है. वर्णन के अनुसार, इसमें खून, मांस और हड्डियां होने की बात कही गई है. नदी में डरावने पक्षियों और नुकीले दांतों वाली मछलियों का उल्लेख भी मिलता है. धार्मिक मान्यता के मुताबिक, जिन लोगों ने जीवन में पाप और अधर्म के काम किए होते हैं. उनके लिए इस नदी को पार करना बेहद कठिन होता है. वहीं, पुण्य कर्म करने वाली आत्मा के लिए इस यात्रा को अपेक्षाकृत आसान बताया गया है.
गाय के दान से कैसे जुड़ी है वैतरणी?
गरुड़ पुराण में गाय के दान को वैतरणी नदी से जोड़ा गया है. धार्मिक मान्यता के मुताबिक, जीवन में या मृत्यु के समय गाय का दान करने से आत्मा को इस नदी को पार करने में सहायता मिलती है. कहा गया है कि ऐसी आत्मा को गौ माता की मदद प्राप्त होती है. वह गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी को पार कर सकती है. यही वजह है कि सनातन परंपरा में गाय के दान को विशेष धार्मिक महत्व दिया गया है.
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आत्मा का क्या होता है?
मान्यता के मुताबिक, वैतरणी नदी पार करने के बाद आत्मा यमराज के पास पहुंचती है. वहां उसके जीवन में किए गए कर्मों का हिसाब देखा जाता है. उसी के आधार पर न्याय होने की बात कही गई है. वैतरणी नदी और मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का विस्तृत वर्णन गरुड़ पुराण के प्रेत खंड में मिलता है. हालांकि, इन बातों को धार्मिक मान्यताओं और ग्रंथों के वर्णन के रूप में ही समझना चाहिए.