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NEET 2026 Exam: 650+ मार्क्स ही क्यों माने जाते हैं सेफ? नीट सरकारी सीट का असली सच, समझें पूरा गेम

NEET UG 2026: हर साल लाखों छात्र नीट देते हैं, पर सरकारी MBBS सीट के लिए तय मार्क्स नहीं होते. असल खेल आपकी AIR का है, जो हर साल पेपर और कॉम्पिटिशन से बदलती रहती है.

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Last Updated: 2026-04-16 10:17:50

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NEET UG 2026 Exam: भारत में हर साल लाखों छात्र NEET परीक्षा देते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट पाने के लिए आखिर कितने मार्क्स जरूरी हैं? सच यह है कि इसका कोई एक फिक्स जवाब नहीं है. कई फैक्टर्स मिलकर तय करते हैं कि आपका सेलेक्शन होगा या नहीं. इस गाइड में हम आपको आसान भाषा में पूरी तस्वीर समझाते हैं.

बहुत से छात्र सोचते हैं कि सिर्फ अच्छे नंबर ही सब कुछ हैं, लेकिन असल में आपकी नीट ऑल इंडिया रैंक (AIR) ज्यादा मायने रखती है. हर साल पेपर का लेवल, स्टूडेंट्स की संख्या और ओवरऑल परफॉर्मेंस रैंक को प्रभावित करते हैं. इसलिए 600+ स्कोर हर साल एक जैसी रैंक नहीं देता.

सरकारी कॉलेज के लिए क्या है सेफ स्कोर?

अगर आपका लक्ष्य सरकारी MBBS सीट है, तो आपको एक “सेफ स्कोर” का टारगेट रखना चाहिए:

  • जनरल कैटेगरी: 620 से 680+
  • OBC कैटेगरी: 600 से 650+
  • SC/ST कैटेगरी: 500 से 580+

ये ऑफिशियल कट-ऑफ नहीं हैं, बल्कि पिछले सालों के ट्रेंड्स पर आधारित अनुमान हैं. टॉप मेडिकल कॉलेज के लिए 650+ स्कोर लगभग जरूरी माना जाता है.

AIQ और स्टेट कोटा का फर्क समझें

NEET काउंसलिंग में दो तरह की सीटें होती हैं:

ऑल इंडिया कोटा (15%): यहां पूरे देश के स्टूडेंट्स कॉम्पिट करते हैं, इसलिए कट-ऑफ ज्यादा हाई जाता है.
स्टेट कोटा (85%): इसमें आपके राज्य के छात्रों को प्राथमिकता मिलती है, जिससे कट-ऑफ थोड़ा कम हो सकता है.

आपके राज्य से भी बदलता है गेम

हर राज्य में कट-ऑफ अलग होता है. उदाहरण के लिए दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बहुत ज्यादा कॉम्पिटिशन होता है, इसलिए यहां मार्क्स ज्यादा चाहिए होते हैं. वहीं, कुछ छोटे या पूर्वोत्तर राज्यों में कम कॉम्पिटिशन के कारण कम स्कोर पर भी सरकारी सीट मिल सकती है.

कट-ऑफ किन चीजों से होता है प्रभावित?

हर साल NEET का कट-ऑफ बदलता रहता है क्योंकि:

  • कितने छात्रों ने परीक्षा दी
  • पेपर कितना कठिन था
  • कुल सीटों की संख्या
  • आरक्षण (Reservation) नीति

इसी वजह से पुराने डेटा को देखकर ही फैसला लेना सही नहीं होता.

कितना स्कोर करें टारगेट?

अगर आप सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो:

  • जनरल कैटेगरी: 650+ मार्क्स
  • OBC कैटेगरी: 620+ मार्क्स
  • SC/ST कैटेगरी: 550+ मार्क्स

इस रेंज में स्कोर करने से आपके सरकारी MBBS सीट पाने के चांस काफी बढ़ जाते हैं.

ज्यादा स्कोर ही सबसे बड़ा हथियार

NEET में कोई तय नंबर नहीं है जो सफलता की गारंटी दे सके. इसलिए कट-ऑफ के पीछे भागने के बजाय अपना स्कोर जितना हो सके उतना बढ़ाने पर ध्यान दें. लगातार मेहनत, सही रणनीति और स्मार्ट स्टडी के साथ आप अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं. याद रखें कि सरकारी MBBS सीट मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन बिल्कुल नहीं.

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NEET UG 2026 Exam: भारत में हर साल लाखों छात्र NEET परीक्षा देते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट पाने के लिए आखिर कितने मार्क्स जरूरी हैं? सच यह है कि इसका कोई एक फिक्स जवाब नहीं है. कई फैक्टर्स मिलकर तय करते हैं कि आपका सेलेक्शन होगा या नहीं. इस गाइड में हम आपको आसान भाषा में पूरी तस्वीर समझाते हैं.

बहुत से छात्र सोचते हैं कि सिर्फ अच्छे नंबर ही सब कुछ हैं, लेकिन असल में आपकी नीट ऑल इंडिया रैंक (AIR) ज्यादा मायने रखती है. हर साल पेपर का लेवल, स्टूडेंट्स की संख्या और ओवरऑल परफॉर्मेंस रैंक को प्रभावित करते हैं. इसलिए 600+ स्कोर हर साल एक जैसी रैंक नहीं देता.

सरकारी कॉलेज के लिए क्या है सेफ स्कोर?

अगर आपका लक्ष्य सरकारी MBBS सीट है, तो आपको एक “सेफ स्कोर” का टारगेट रखना चाहिए:

  • जनरल कैटेगरी: 620 से 680+
  • OBC कैटेगरी: 600 से 650+
  • SC/ST कैटेगरी: 500 से 580+

ये ऑफिशियल कट-ऑफ नहीं हैं, बल्कि पिछले सालों के ट्रेंड्स पर आधारित अनुमान हैं. टॉप मेडिकल कॉलेज के लिए 650+ स्कोर लगभग जरूरी माना जाता है.

AIQ और स्टेट कोटा का फर्क समझें

NEET काउंसलिंग में दो तरह की सीटें होती हैं:

ऑल इंडिया कोटा (15%): यहां पूरे देश के स्टूडेंट्स कॉम्पिट करते हैं, इसलिए कट-ऑफ ज्यादा हाई जाता है.
स्टेट कोटा (85%): इसमें आपके राज्य के छात्रों को प्राथमिकता मिलती है, जिससे कट-ऑफ थोड़ा कम हो सकता है.

आपके राज्य से भी बदलता है गेम

हर राज्य में कट-ऑफ अलग होता है. उदाहरण के लिए दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बहुत ज्यादा कॉम्पिटिशन होता है, इसलिए यहां मार्क्स ज्यादा चाहिए होते हैं. वहीं, कुछ छोटे या पूर्वोत्तर राज्यों में कम कॉम्पिटिशन के कारण कम स्कोर पर भी सरकारी सीट मिल सकती है.

कट-ऑफ किन चीजों से होता है प्रभावित?

हर साल NEET का कट-ऑफ बदलता रहता है क्योंकि:

  • कितने छात्रों ने परीक्षा दी
  • पेपर कितना कठिन था
  • कुल सीटों की संख्या
  • आरक्षण (Reservation) नीति

इसी वजह से पुराने डेटा को देखकर ही फैसला लेना सही नहीं होता.

कितना स्कोर करें टारगेट?

अगर आप सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो:

  • जनरल कैटेगरी: 650+ मार्क्स
  • OBC कैटेगरी: 620+ मार्क्स
  • SC/ST कैटेगरी: 550+ मार्क्स

इस रेंज में स्कोर करने से आपके सरकारी MBBS सीट पाने के चांस काफी बढ़ जाते हैं.

ज्यादा स्कोर ही सबसे बड़ा हथियार

NEET में कोई तय नंबर नहीं है जो सफलता की गारंटी दे सके. इसलिए कट-ऑफ के पीछे भागने के बजाय अपना स्कोर जितना हो सके उतना बढ़ाने पर ध्यान दें. लगातार मेहनत, सही रणनीति और स्मार्ट स्टडी के साथ आप अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं. याद रखें कि सरकारी MBBS सीट मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन बिल्कुल नहीं.

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