Live TV
Search
Home > Education > NEET Success Story: AIIMS, JIPMER का ठुकराया ऑफर, फिर चुना AFMC, अब भारतीय सेना में बनीं लेफ्टिनेंट

NEET Success Story: AIIMS, JIPMER का ठुकराया ऑफर, फिर चुना AFMC, अब भारतीय सेना में बनीं लेफ्टिनेंट

NEET Success Story: गोवा की NEET स्टेट टॉपर अभिदा ईशाना बरेटो ने AIIMS और JIPMER जैसे प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों को छोड़ AFMC चुना. उन्होंने ऐसे सेना की वर्दी पहनने का सपना पूरा किया.

Written By:
Last Updated: July 23, 2026 17:42:11 IST

Mobile Ads 1x1

NEET Success Story: हर साल लाखों छात्र NEET परीक्षा पास कर AIIMS, JIPMER और देश के शीर्ष मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने का सपना देखते हैं. लेकिन गोवा की रहने वाली अभिदा ईशाना बरेटो ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी पहचान सिर्फ एक डॉक्टर नहीं, बल्कि भारतीय सेना की अधिकारी के रूप में बनाई.

उन्होंने NEET में शानदार प्रदर्शन कर गोवा स्टेट टॉपर बनने के साथ ऑल इंडिया रैंक 905 हासिल की. इसके बाद उनके पास AIIMS, JIPMER और अन्य प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में पढ़ने का मौका था, लेकिन उन्होंने इन सभी विकल्पों को छोड़कर Armed Forces Medical College (AFMC), पुणे को चुना. उनका सपना सिर्फ डॉक्टर बनना नहीं था, बल्कि देश की वर्दी पहनकर सेवा करना था.

कोविड लॉकडाउन में शुरू हुई मेहनत

साल 2021, जब पूरा देश कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन से जूझ रहा था, उसी दौरान गोवा के कैनाकोना की अभिदा ने NEET की तैयारी शुरू की. स्कूल बंद थे, कोचिंग ऑनलाइन हो चुकी थी और पढ़ाई का पूरा माहौल बदल गया था. इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने रोजाना नियमित पढ़ाई की, लगातार प्रैक्टिस टेस्ट दिए और अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया. परिवार ने भी हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया. जब NEET का परिणाम आया तो उनकी मेहनत रंग लाई. उन्होंने गोवा में पहला स्थान हासिल किया और राष्ट्रीय स्तर पर भी शानदार रैंक प्राप्त की.

AIIMS नहीं, सेना की वर्दी थी सपना

बेहतरीन रैंक मिलने के बाद अभिदा के सामने देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने का अवसर था. लेकिन उनका सपना अलग था. उन्होंने AFMC पुणे को चुना क्योंकि यहां मेडिकल शिक्षा के साथ सेना का अनुशासन और नेतृत्व विकसित करने का अवसर मिलता है. उनके लिए डॉक्टर बनने से ज्यादा महत्वपूर्ण था भारतीय सेना का हिस्सा बनना. परिवार के लिए यह फैसला आसान नहीं था. कम उम्र में बेटी को घर से दूर भेजना हर माता-पिता के लिए चुनौतीपूर्ण होता है. लेकिन आखिरकार परिवार ने उनकी पसंद का सम्मान किया और उनका साथ दिया.

AFMC में भी किया शानदार प्रदर्शन

AFMC में दाखिले के बाद अभिदा ने सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि अनुशासन और नेतृत्व में भी अपनी अलग पहचान बनाई. शुरुआती चार वर्षों में पूरे बैच में दूसरा स्थान प्राप्त किया. अंतिम वर्ष में तीसरे स्थान पर रहीं. कुल मिलाकर पूरे बैच की दूसरी सर्वश्रेष्ठ छात्रा बनकर MBBS की पढ़ाई पूरी की. यह उपलब्धि बताती है कि उन्होंने हर स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया.

अब भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट

MBBS पूरी करने के बाद अभिदा को शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के तहत Army Medical Corps में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन मिला. अब वह जम्मू छावनी के सतवारी स्थित 166 मिलिट्री हॉस्पिटल में अपनी इंटर्नशिप शुरू करेंगी. उन्होंने स्वयं इस अस्पताल को चुना ताकि विभिन्न प्रकार के मरीजों का इलाज करने का अनुभव मिल सके. भविष्य में उनका लक्ष्य ऑन्कोलॉजी (कैंसर चिकित्सा) में विशेषज्ञता हासिल कर मरीजों की सेवा करना है.

बेटियों के लिए बनी प्रेरणा

अभिदा की कहानी यह साबित करती है कि बड़े सपने देखने के लिए सिर्फ प्रतिभा ही नहीं, बल्कि सही निर्णय और परिवार का विश्वास भी जरूरी होता है. उन्होंने यह भी दिखाया कि भारतीय सेना में सेवा करना केवल पुरुषों का क्षेत्र नहीं है. आज महिलाएं भी डॉक्टर, अधिकारी और लीडर के रूप में देश की सुरक्षा और सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

AFMC में प्रवेश कैसे मिलता है?

जो छात्र भविष्य में सेना में डॉक्टर बनना चाहते हैं, उनके लिए AFMC एक शानदार विकल्प है. प्रवेश NEET स्कोर के आधार पर होता है. इसके लिए अलग काउंसलिंग प्रक्रिया अपनाई जाती है. प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को निर्धारित वित्तीय सहायता (ग्रांट) मिलती है. MBBS पूरा करने के बाद योग्य उम्मीदवारों को Short Service Commission के माध्यम से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति का अवसर मिलता है.

सिर्फ सफलता नहीं, विश्वास की कहानी

अभिदा ईशाना बरेटो की यात्रा केवल एक मेडिकल छात्रा के डॉक्टर बनने की कहानी नहीं है. यह उस भरोसे की कहानी है, जो एक परिवार ने अपनी बेटी के सपनों पर किया. यह उस साहस की कहानी है, जिसमें आसान रास्ते छोड़कर अपने जुनून को चुना गया. आज उनकी वर्दी पर चमकते सितारे सिर्फ उनकी मेहनत का सम्मान नहीं हैं, बल्कि उन सभी बेटियों के सपनों की पहचान हैं, जिन्हें आगे बढ़ने के लिए परिवार की एक “हां” की जरूरत होती है.

ये भी पढ़ें…

Sarkari Naukri: 10वीं हैं पास, तो वन विभाग में नौकरी पाने का बेहतरीन अवसर, बिना परीक्षा होगा चयन

MORE NEWS

Home > Education > NEET Success Story: AIIMS, JIPMER का ठुकराया ऑफर, फिर चुना AFMC, अब भारतीय सेना में बनीं लेफ्टिनेंट

Written By:
Last Updated: July 23, 2026 17:42:11 IST

Mobile Ads 1x1

NEET Success Story: हर साल लाखों छात्र NEET परीक्षा पास कर AIIMS, JIPMER और देश के शीर्ष मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने का सपना देखते हैं. लेकिन गोवा की रहने वाली अभिदा ईशाना बरेटो ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी पहचान सिर्फ एक डॉक्टर नहीं, बल्कि भारतीय सेना की अधिकारी के रूप में बनाई.

उन्होंने NEET में शानदार प्रदर्शन कर गोवा स्टेट टॉपर बनने के साथ ऑल इंडिया रैंक 905 हासिल की. इसके बाद उनके पास AIIMS, JIPMER और अन्य प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में पढ़ने का मौका था, लेकिन उन्होंने इन सभी विकल्पों को छोड़कर Armed Forces Medical College (AFMC), पुणे को चुना. उनका सपना सिर्फ डॉक्टर बनना नहीं था, बल्कि देश की वर्दी पहनकर सेवा करना था.

कोविड लॉकडाउन में शुरू हुई मेहनत

साल 2021, जब पूरा देश कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन से जूझ रहा था, उसी दौरान गोवा के कैनाकोना की अभिदा ने NEET की तैयारी शुरू की. स्कूल बंद थे, कोचिंग ऑनलाइन हो चुकी थी और पढ़ाई का पूरा माहौल बदल गया था. इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने रोजाना नियमित पढ़ाई की, लगातार प्रैक्टिस टेस्ट दिए और अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया. परिवार ने भी हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया. जब NEET का परिणाम आया तो उनकी मेहनत रंग लाई. उन्होंने गोवा में पहला स्थान हासिल किया और राष्ट्रीय स्तर पर भी शानदार रैंक प्राप्त की.

AIIMS नहीं, सेना की वर्दी थी सपना

बेहतरीन रैंक मिलने के बाद अभिदा के सामने देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने का अवसर था. लेकिन उनका सपना अलग था. उन्होंने AFMC पुणे को चुना क्योंकि यहां मेडिकल शिक्षा के साथ सेना का अनुशासन और नेतृत्व विकसित करने का अवसर मिलता है. उनके लिए डॉक्टर बनने से ज्यादा महत्वपूर्ण था भारतीय सेना का हिस्सा बनना. परिवार के लिए यह फैसला आसान नहीं था. कम उम्र में बेटी को घर से दूर भेजना हर माता-पिता के लिए चुनौतीपूर्ण होता है. लेकिन आखिरकार परिवार ने उनकी पसंद का सम्मान किया और उनका साथ दिया.

AFMC में भी किया शानदार प्रदर्शन

AFMC में दाखिले के बाद अभिदा ने सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि अनुशासन और नेतृत्व में भी अपनी अलग पहचान बनाई. शुरुआती चार वर्षों में पूरे बैच में दूसरा स्थान प्राप्त किया. अंतिम वर्ष में तीसरे स्थान पर रहीं. कुल मिलाकर पूरे बैच की दूसरी सर्वश्रेष्ठ छात्रा बनकर MBBS की पढ़ाई पूरी की. यह उपलब्धि बताती है कि उन्होंने हर स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया.

अब भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट

MBBS पूरी करने के बाद अभिदा को शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के तहत Army Medical Corps में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन मिला. अब वह जम्मू छावनी के सतवारी स्थित 166 मिलिट्री हॉस्पिटल में अपनी इंटर्नशिप शुरू करेंगी. उन्होंने स्वयं इस अस्पताल को चुना ताकि विभिन्न प्रकार के मरीजों का इलाज करने का अनुभव मिल सके. भविष्य में उनका लक्ष्य ऑन्कोलॉजी (कैंसर चिकित्सा) में विशेषज्ञता हासिल कर मरीजों की सेवा करना है.

बेटियों के लिए बनी प्रेरणा

अभिदा की कहानी यह साबित करती है कि बड़े सपने देखने के लिए सिर्फ प्रतिभा ही नहीं, बल्कि सही निर्णय और परिवार का विश्वास भी जरूरी होता है. उन्होंने यह भी दिखाया कि भारतीय सेना में सेवा करना केवल पुरुषों का क्षेत्र नहीं है. आज महिलाएं भी डॉक्टर, अधिकारी और लीडर के रूप में देश की सुरक्षा और सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

AFMC में प्रवेश कैसे मिलता है?

जो छात्र भविष्य में सेना में डॉक्टर बनना चाहते हैं, उनके लिए AFMC एक शानदार विकल्प है. प्रवेश NEET स्कोर के आधार पर होता है. इसके लिए अलग काउंसलिंग प्रक्रिया अपनाई जाती है. प्रशिक्षण के दौरान छात्रों को निर्धारित वित्तीय सहायता (ग्रांट) मिलती है. MBBS पूरा करने के बाद योग्य उम्मीदवारों को Short Service Commission के माध्यम से भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति का अवसर मिलता है.

सिर्फ सफलता नहीं, विश्वास की कहानी

अभिदा ईशाना बरेटो की यात्रा केवल एक मेडिकल छात्रा के डॉक्टर बनने की कहानी नहीं है. यह उस भरोसे की कहानी है, जो एक परिवार ने अपनी बेटी के सपनों पर किया. यह उस साहस की कहानी है, जिसमें आसान रास्ते छोड़कर अपने जुनून को चुना गया. आज उनकी वर्दी पर चमकते सितारे सिर्फ उनकी मेहनत का सम्मान नहीं हैं, बल्कि उन सभी बेटियों के सपनों की पहचान हैं, जिन्हें आगे बढ़ने के लिए परिवार की एक “हां” की जरूरत होती है.

ये भी पढ़ें…

Sarkari Naukri: 10वीं हैं पास, तो वन विभाग में नौकरी पाने का बेहतरीन अवसर, बिना परीक्षा होगा चयन

MORE NEWS