Imran Khan FRRO notic: बॉलीवुड अभिनेता और आमिर खान के भांजे इमरान खान की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. मुंबई के फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) की ओर से उन्हें भारत छोड़ने का नोटिस दिए जाने के बाद अब उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है. इमरान खान को 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया है. यह मामला 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है. इमरान अमेरिकी नागरिक होने के साथ ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारक भी हैं. उन्होंने अदालत में नोटिस को चुनौती देते हुए इस पर रोक लगाने और इसे रद्द करने की मांग की है.
प्रदर्शन में शामिल होने के बाद जारी हुआ नोटिस
इमरान खान 10 अक्टूबर 2026 को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में आयोजित एक प्रदर्शन में शामिल हुए थे. इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही थी. इसी घटनाक्रम के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई का मामला सामने आया. भाजपा नेता किरीट सोमैया ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि अमेरिकी नागरिक और OCI कार्डधारक इमरान खान ने राजनीतिक प्रदर्शन में हिस्सा लेकर इमिग्रेशन नियमों का उल्लंघन किया है. इसके बाद संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की गई और FRRO ने 14 अक्टूबर को उन्हें भारत छोड़ने का नोटिस जारी किया. नोटिस में 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है.
बॉम्बे हाई कोर्ट में इमरान खान ने क्या मांग की?
FRRO के नोटिस के खिलाफ इमरान खान ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. यह याचिका अधिवक्ता जुल्फिकार मेमन, परवेज मेमन और चिराग नायक ने MZM Legal LLP की ओर से दाखिल की है. याचिका में नोटिस के अमल पर तत्काल रोक लगाने, उसे रद्द करने और अधिकारियों से कार्रवाई के आधार से जुड़े रिकॉर्ड पेश करने की मांग की गई है. इमरान की ओर से दलील दी गई है कि नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के किस प्रावधान का उल्लंघन हुआ, यह उल्लंघन कैसे हुआ और कब हुआ. याचिका में यह भी कहा गया है कि अधिकारियों ने इमरान के OCI कार्डधारक होने और भारत में लंबे समय से रहने की स्थिति पर पर्याप्त विचार नहीं किया. उनके पक्ष का कहना है कि नोटिस जारी करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया.
इमरान खान ने नोटिस को बताया अनुचित
याचिका में इमरान खान की ओर से कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं. उनके वकीलों का तर्क है कि केवल एक शिकायत या कथित उल्लंघन के आधार पर किसी व्यक्ति को देश छोड़ने का निर्देश देना उचित नहीं है, खासकर जब संबंधित मामले में आरोपों की न्यायिक जांच अभी पूरी नहीं हुई है. याचिका में प्रदर्शन के दौरान हुई घटना का भी जिक्र किया गया है. इमरान के पक्ष के अनुसार, उन्होंने बैरिकेड नहीं तोड़े थे और वह वहां से जा रहे थे. उनका दावा है कि पुलिस ने उन्हें और उनके परिवार को हिरासत में लेने से ठीक पहले मीडिया ने उन्हें घेर लिया था. याचिका में यह भी कहा गया है कि प्रदर्शन स्थल पर लोगों के एकत्र होने पर पुलिस की ओर से प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन वह क्षेत्र प्रतिबंधित स्थान नहीं था. इमरान के वकीलों का तर्क है कि OCI कार्डधारक होने के कारण उनके मामले पर विचार करते समय लागू नियमों और परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए. ये सभी दलीलें याचिका में इमरान खान की ओर से रखी गई हैं; इन पर अदालत का फैसला आना बाकी है.
OCI कार्ड रद्द होने का भी सवाल
इस मामले में इमरान खान के OCI दर्जे को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. OCI कार्डधारकों को भारत में रहने और कुछ अन्य सुविधाओं का अधिकार मिलता है, लेकिन उन्हें भारतीय नागरिकों के सभी राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं होते. ऐसे में राजनीतिक प्रदर्शन में उनकी भागीदारी को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हुआ है. हालांकि, इमरान खान की ओर से दायर याचिका में मुख्य रूप से भारत छोड़ने के नोटिस को चुनौती दी गई है. उनके वकीलों का कहना है कि नोटिस में उनके OCI दर्जे और कार्रवाई के आधार पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया. इस मामले में उनके कार्ड को रद्द करने के संबंध में कोई अंतिम निर्णय हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि के बिना यह कहना सही नहीं होगा कि उनका OCI कार्ड रद्द हो चुका है.
अब अदालत के फैसले पर टिकी नजरें
इमरान खान ने FRRO के नोटिस पर रोक लगाने और उसे रद्द करने की मांग की है. उनकी याचिका में अधिकारियों से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने की मांग भी की गई है, ताकि कार्रवाई के आधार की जांच हो सके. अब मामले में अदालत की सुनवाई और आदेश अहम होंगे. यदि अदालत नोटिस पर रोक लगाती है, तो इमरान को राहत मिल सकती है. वहीं, अंतिम स्थिति अदालत के आदेश और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी. फिलहाल, 28 अक्टूबर की समयसीमा और भारत छोड़ने के निर्देश के खिलाफ दायर याचिका इस मामले का प्रमुख घटनाक्रम है.