फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक और बहस छेड़ दी है, इस बार उन्होंने कहा है कि AI एक दिन नेताओं और ब्यूरोक्रेट्स को बहुत कम काम का बना सकता है. AI के बारे में अपनी कई पोस्ट के बाद, डायरेक्टर ने दावा किया कि टेक्नोलॉजी एक ऐसा गवर्नेंस सिस्टम बना सकती है जो ट्रांसपेरेंट, एफिशिएंट और लगभग मैनिपुलेट करना नामुमकिन हो.
एआई को लेकर दी चेतावनी
राम गोपाल वर्मा के अनुसार ने हाल ही में अपने एक्स पर एआई के भविष्य को लेकर विचार प्रकट किए. उन्होंने कहा कि एआई के किसी एल्गोरिदम को रिश्वत नहीं दी जा सकती, ट्रांसफर की धमकी नहीं दी जा सकती या किसी मंत्री के रिश्तेदार का पक्ष लेने के लिए मनाया नहीं जा सकता. उन्होंने लिखा, ‘इसका कोई परिवार नहीं है, कोई पेंशन नहीं है जिसे बचाना है.’ साथ ही तर्क दिया कि इससे भ्रष्टाचार के कई मौके खत्म हो जाएंगे.
AI WILL KILL GOVERNMENTS
In the present governance system the political class oversees the bureaucracy which administers the procedures for the functioning of the state .. Political leaders are elected to “represent” people. Bureaucrats are hired to follow procedures for…
— Ram Gopal Varma (@RGVzoomin) July 29, 2026
दुबई के सिस्टम का दिया उदाहरण
अपनी बात को सपोर्ट करने के लिए, राम गोपाल वर्मा ने दुबई का उदाहरण दिया, जहां स्मार्ट पुलिस स्टेशन पहले से ही लोगों को पुलिस वालों से बिना बात किए FIR दर्ज करने की सुविधा देते हैं. उन्होंने कहा कि ह्यूमन इंटरफ़ेस हटाने से करप्शन के मौके भी खत्म हो जाते हैं, और कहा कि ऐसी टेक्नोलॉजी पहले से ही इस्तेमाल में है और अब यह कोई साइंस फिक्शन नहीं है.
राजनीति में एआई कैसे देगा योगदान?
फिल्ममेकर ने बाताया कि कैसे एआई राजनीति की दुनिया में काम करेगा. उन्होंने अपनी बात को एक विधानसभा के उदाहरण से समझाया. उन्होंने कहा कि कोई MLA लोकल अधिकारियों के डेटा के आधार पर दावा कर सकता है कि किसी चुनाव क्षेत्र में कॉटन का प्रोडक्शन कम हो गया है और सरकार से कोई खास पेस्टीसाइड खरीदने की मांग कर सकता है. उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष तब यह आरोप लगा सकता है कि डेटा में हेरफेर किया गया था क्योंकि MLA के रिश्तेदार के पास पेस्टीसाइड कंपनी थी.
राम गोपाल वर्मा ने तर्क दिया कि ऐसी स्थिति में वोटरों के पास यह वेरिफाई करने का कोई आसान तरीका नहीं है कि किसके दावे सही हैं.
उन्होंने कहा कि हालांकि, एक AI सिस्टम किसी लोकल अधिकारी के चुनिंदा डेटा पर निर्भर नहीं होगा. इसके बजाय, यह सैटेलाइट इमेजरी, मिट्टी की हेल्थ के रिकॉर्ड, बारिश के पैटर्न, दुनिया भर में कमोडिटी की कीमतों, ब्राज़ील, मिस्र और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से पेस्ट रेजिस्टेंस डेटा, साथ ही पेस्टिसाइड्स पर सालों के साइंटिफिक डेटा का एनालिसिस कर सकता है, और फिर यह बता सकता है कि उसे सबसे अच्छा सॉल्यूशन क्या लगता है.
नीट को लेकर भी किया था पोस्ट
यह पोस्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वर्मा के कमेंट्स की सीरीज़ में सबसे नया है, इससे पहले उन्होंने हाल ही में दावा किया था कि AI, NEET जैसे एग्जाम से जुड़े विवादों की तुलना में स्टूडेंट्स के लिए कहीं ज़्यादा बड़ी चुनौती है.
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