Nail Paint Cancer Risk: ब्यूटी और कॉस्मेटिक बाजारों में जेल नेल्स का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है. ये नखूनों को ग्लॉसी और स्टाइलिश लुक देते ही हैं, इसकी चमक भी लंबे वक्त तक बरकरार रहती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई देशों में जेल नेल पेंट को बैन किया हुआ है? इसके पीछे का कारण है TPO नामक हार्मफुल केमिकल, जिसे कई देशों ने बैन किया हुआ है. जेल नेल पेंट को सुखाने में इस्तेमाल होने वाली UV लाइट भी नेल्स को अंदर तक नुकसान पहुंचा सकती है.
सोशल मीडिया पर भी कई महिलाओं ने जेल नेल पेंट को लेकर रिव्यूज शेयर किए हैं और बताया है कि लगातार जेल नेल्स कराने से उनके नाखून पतले, रूखे और बेजान हो गए हैं. ये सब तो ठीक है, लेकिन इससे कैंसर का रिस्क कैसे हो सकता है? यहां जानें
नेल पेंट से कैंसर?
नॉर्मल नेल पेंट नाखूनों की ऊपरी लेयर तक ही सीमित रहता है. इसे आसानी से हटा भी सकते हैं, लेकिन जेल नेल पेंट कराने का प्रोसेस ही अपने आप में रिस्की है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केट में मिलने वाली ज्यादातर जेल नेल पॉलिश में TPO यानी ट्राइमिथाइलबेंजोल डाइफिनाइलफॉस्फिन ऑक्साइड नाम का कैमिकल पाया जाता है, जो महिलाओं में हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ देता है. इससे महिलाओं में इनफर्टीलिटी की समस्या भी हो सकती है.
- जेल नेल कराने से पहले बफिंग और फाइलिंग की जाती है, जिससे नेचुरल शाइन खत्म हो जाती और नाखून पतले होने लगते हैं.
- जेल नेल मैनीक्योर में नाखूनों को घिस जाता है. इससे क्यूटिकल को भी नुकसान पहुंचता है.
- जेल नेल अप्लाई करने के बाद UV लैंप से सुखाते हैं, जिससे निकलने वाली रेडिएशन नाखूनों के पार जाके स्किन सेल्स को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
- जेल नेल पेंट को लगाने से ज्यादा रिस्क है इसे निकालने में. कई बार जेल नेल्स को उखाड़ने या खींचकर हटाने से भी नाखूनों को नुकसान होता है.
एलर्जी और स्किन प्रॉबलम
पिछले कुछ वर्षों में जेल नेल पेंट लगवाने का ट्रेंड बढ़ा है, लेकिन सोशल मीडिया रिव्यूज पर नजर डालें तो जेल और एक्रिलिक नेल्स कराने से महिलाओं को त्वचा से जुड़ी समस्याएं भी देखने को मिली है. खासतौर पर रेगुलर बेसिस पर जेल नेल कराने वाली महिलाओं को हाथों में रेडनेस, खुजली और सूजन जैसे सिंपटम्स देखे गए हैं. ऐसा इसलिए भी होता है क्योंकि ज्यादातर महिलाएं सस्ते DIY किट यूज करती हैं, जबकि जेल नेल मेनीक्योर किसी प्रोफेशनल सैलून से ही कराना चाहिए.
यहां बैन है जेल नेल पेंट
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेल नेल पेंट से लॉन्ग टर्म में कैंसर जैसी घातक बीमारी का रिस्क रहता है. खासतौर पर महिलाओं में ये स्किन कैंसर और हार्मोन्स में गड़बड़ी का रिस्क बढ़ाता है. इसमें मौजूद फॉर्मेल्डिहाइड, टोल्यून और फ्थैलेट्स जैसे तत्वों को कैंसरकारी माना जाता है, इसलिए यूरोपियन यूनियन ने भी इस पर सख्त प्रतिबंध लगाया हुआ है.
इन बातों का रखें खास ध्यान
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वैसे तो जेल और एक्रीलिक नेल पेंट में पाए जाने वाले केमिकल और इसकी प्रोसेस बेहद रिस्की है, लेकिन प्रोफेशन सैलून से ये ब्यूटी ट्रीटमेंट कराना उतना हार्मफुल नहीं है. बस ये ट्रीटमेंट कराने से पहले कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
- जेल नेल्स लगवाने से पहले हाथों पर सनस्क्रीन जरूर लगाएं, ताकि यूवी एक्सपोजर को कम किया जा सके.
- जेल नेल्स हटाने के बाद नाखूनों को 10 से 15 दिन का फ्री टाइम दें. इससे रीकवरी में मदद मिलती है.
- जेल नेल कराने के लिए सर्टिफाइड सैलून को चुनें, जहां नाखूनों की सेफ्टी का पूरा ख्याल रखा जाता है.
- आप चाहें तो रेगुलर जेल नेल्स कराने के बजाए प्रेस ऑन नेल्स भी ट्राई कर सकती हैं.