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स्वास्थ्य संरक्षण पर जोर: जोगी आयुर्वेद ने आयुर्वेदिक उपचार को दी आधुनिक दिशा

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Last Updated: July 29, 2026 18:07:36 IST

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सूरत : कोरोना महामारी के बाद निवारक चिकित्सा यानी बीमारी से बचाव और स्वास्थ्य संरक्षण का विषय लोगों के बीच तेजी से महत्वपूर्ण हुआ है। ऐसे दौर में सूरत स्थित जोगी आयुर्वेद अस्पताल प्राचीन आयुर्वेदिक सिद्धांतों को आधुनिक चिकित्सकीय पद्धतियों और मरीजों के लिए व्यक्तिगत उपचार के साथ जोड़कर आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा देने वाले प्रमुख संस्थानों में अपनी पहचान बना रहा है।

अनुभवी आयुप्रेन्योर श्री निलेश जोगल द्वारा स्थापित जोगी आयुर्वेद पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सक्रिय है। संस्था का मानना है कि बीमारी का उपचार करना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य को बनाए रखना भी है। वर्तमान में सूरत में जोगी आयुर्वेद के दो केंद्र संचालित हो रहे हैं। संस्था की ओर से गुजरात का सबसे बड़ा आयुर्वेद अस्पताल स्थापित करने की भी योजना है।

कोरोना महामारी ने लोगों की स्वास्थ्य के प्रति सोच में बड़ा बदलाव किया है। अब लोग केवल बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि बीमारी से बचाव और स्वास्थ्य संरक्षण को भी पहले की तुलना में अधिक महत्व देने लगे हैं। न्यूट्रास्यूटिकल्स और हर्बल उपचारों की मांग में भी वृद्धि हुई है। चिकित्सकों का मानना है कि बेहतर स्वास्थ्य केवल दवाओं के माध्यम से ही कायम नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसके लिए जीवनशैली और खान-पान की आदतों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यही वजह है कि आयुर्वेद के प्रति लोगों की रुचि एक बार फिर बढ़ी है।

आयुर्वेद

पारंपरिक एक जैसी उपचार पद्धतियों के विपरीत आयुर्वेद व्यक्ति की प्रकृति यानी उसकी शारीरिक संरचना और स्वभाव को ध्यान में रखते हुए उपचार की सलाह देता है। इसमें व्यक्ति की प्रकृति और जरूरत के अनुसार आहार व्यवस्था, दिनचर्या तथा मौसम के अनुरूप ऋतुचर्या निर्धारित की जाती है। जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच आयुर्वेद की यह निवारक चिकित्सा पद्धति विशेष महत्व रखती है।

जोगी आयुर्वेद के संस्थापक श्री निलेश जोगल ने कहा कि, “आयुर्वेद के दो प्रमुख उद्देश्य हैं ‘स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्’, अर्थात स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और ‘आतुरस्य विकार प्रशमनम्’, यानी रोगी की बीमारी का उपचार करना। आयुर्वेद में निवारक स्वास्थ्य सेवा हमेशा से ही केंद्र में रही है। हमारा मानना है कि अपने स्वास्थ्य के लिए किया गया सबसे बेहतर निवेश स्वयं को स्वस्थ रखने की दिशा में किया गया निवेश है। जोगी आयुर्वेद निवारक स्वास्थ्य सेवा को लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बनाने के साथ-साथ गुजरात और भारत को अधिक स्वस्थ बनाने की दिशा में भी योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।”

जोगी आयुर्वेद में उपचार की प्रक्रिया मरीज के परामर्श और उसकी प्रकृति के विश्लेषण से शुरू होती है। इसका उद्देश्य व्यक्ति के स्वास्थ्य और शरीर की स्थिति को पूरी तरह समझना होता है। इसके बाद मरीज की जरूरत के अनुसार उसके लिए व्यक्तिगत उपचार पद्धति तैयार की जाती है। उपचार के दौरान नियमित निगरानी और परामर्श भी दिया जाता है। इस तरह उपचार केवल बीमारी के लक्षणों को दूर करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बीमारी के मूल कारणों को समझकर स्थायी और प्रभावी समाधान की दिशा में काम किया जाता है।

आयुर्वेद

नीलेश जोगल ने आगे कहा कि उपचार के साथ-साथ जोगी आयुर्वेद स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। संस्था की ओर से समय-समय पर विभिन्न व्याख्यान, शैक्षणिक सामग्री, समाचार लेख, ऑनलाइन स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और जागरूकता वीडियो के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है। इन प्रयासों के माध्यम से लाखों लोगों तक स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाई गई है। संस्था का दृढ़ विश्वास है कि लोगों को स्वास्थ्य से जुड़े विषयों के बारे में जागरूक और शिक्षित करना बेहतर स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

गौरतलब है कि व्यक्तिगत उपचार, मरीजों को स्वास्थ्य शिक्षा देने और निवारक चिकित्सा पर विशेष जोर के साथ जोगी आयुर्वेद भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक के रूप में आयुर्वेद को स्वीकार्यता दिलाने की दिशा में लगातार अपनी भूमिका निभा रहा है। संस्था का उद्देश्य निवारक स्वास्थ्य सेवा को लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बनाना और आयुर्वेद के माध्यम से गुजरात तथा भारत को अधिक स्वस्थ बनाने की दिशा में योगदान देना है।

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

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सूरत : कोरोना महामारी के बाद निवारक चिकित्सा यानी बीमारी से बचाव और स्वास्थ्य संरक्षण का विषय लोगों के बीच तेजी से महत्वपूर्ण हुआ है। ऐसे दौर में सूरत स्थित जोगी आयुर्वेद अस्पताल प्राचीन आयुर्वेदिक सिद्धांतों को आधुनिक चिकित्सकीय पद्धतियों और मरीजों के लिए व्यक्तिगत उपचार के साथ जोड़कर आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा देने वाले प्रमुख संस्थानों में अपनी पहचान बना रहा है।

अनुभवी आयुप्रेन्योर श्री निलेश जोगल द्वारा स्थापित जोगी आयुर्वेद पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में सक्रिय है। संस्था का मानना है कि बीमारी का उपचार करना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य को बनाए रखना भी है। वर्तमान में सूरत में जोगी आयुर्वेद के दो केंद्र संचालित हो रहे हैं। संस्था की ओर से गुजरात का सबसे बड़ा आयुर्वेद अस्पताल स्थापित करने की भी योजना है।

कोरोना महामारी ने लोगों की स्वास्थ्य के प्रति सोच में बड़ा बदलाव किया है। अब लोग केवल बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि बीमारी से बचाव और स्वास्थ्य संरक्षण को भी पहले की तुलना में अधिक महत्व देने लगे हैं। न्यूट्रास्यूटिकल्स और हर्बल उपचारों की मांग में भी वृद्धि हुई है। चिकित्सकों का मानना है कि बेहतर स्वास्थ्य केवल दवाओं के माध्यम से ही कायम नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसके लिए जीवनशैली और खान-पान की आदतों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यही वजह है कि आयुर्वेद के प्रति लोगों की रुचि एक बार फिर बढ़ी है।

आयुर्वेद

पारंपरिक एक जैसी उपचार पद्धतियों के विपरीत आयुर्वेद व्यक्ति की प्रकृति यानी उसकी शारीरिक संरचना और स्वभाव को ध्यान में रखते हुए उपचार की सलाह देता है। इसमें व्यक्ति की प्रकृति और जरूरत के अनुसार आहार व्यवस्था, दिनचर्या तथा मौसम के अनुरूप ऋतुचर्या निर्धारित की जाती है। जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच आयुर्वेद की यह निवारक चिकित्सा पद्धति विशेष महत्व रखती है।

जोगी आयुर्वेद के संस्थापक श्री निलेश जोगल ने कहा कि, “आयुर्वेद के दो प्रमुख उद्देश्य हैं ‘स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्’, अर्थात स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और ‘आतुरस्य विकार प्रशमनम्’, यानी रोगी की बीमारी का उपचार करना। आयुर्वेद में निवारक स्वास्थ्य सेवा हमेशा से ही केंद्र में रही है। हमारा मानना है कि अपने स्वास्थ्य के लिए किया गया सबसे बेहतर निवेश स्वयं को स्वस्थ रखने की दिशा में किया गया निवेश है। जोगी आयुर्वेद निवारक स्वास्थ्य सेवा को लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बनाने के साथ-साथ गुजरात और भारत को अधिक स्वस्थ बनाने की दिशा में भी योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।”

जोगी आयुर्वेद में उपचार की प्रक्रिया मरीज के परामर्श और उसकी प्रकृति के विश्लेषण से शुरू होती है। इसका उद्देश्य व्यक्ति के स्वास्थ्य और शरीर की स्थिति को पूरी तरह समझना होता है। इसके बाद मरीज की जरूरत के अनुसार उसके लिए व्यक्तिगत उपचार पद्धति तैयार की जाती है। उपचार के दौरान नियमित निगरानी और परामर्श भी दिया जाता है। इस तरह उपचार केवल बीमारी के लक्षणों को दूर करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बीमारी के मूल कारणों को समझकर स्थायी और प्रभावी समाधान की दिशा में काम किया जाता है।

आयुर्वेद

नीलेश जोगल ने आगे कहा कि उपचार के साथ-साथ जोगी आयुर्वेद स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। संस्था की ओर से समय-समय पर विभिन्न व्याख्यान, शैक्षणिक सामग्री, समाचार लेख, ऑनलाइन स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और जागरूकता वीडियो के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है। इन प्रयासों के माध्यम से लाखों लोगों तक स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाई गई है। संस्था का दृढ़ विश्वास है कि लोगों को स्वास्थ्य से जुड़े विषयों के बारे में जागरूक और शिक्षित करना बेहतर स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

गौरतलब है कि व्यक्तिगत उपचार, मरीजों को स्वास्थ्य शिक्षा देने और निवारक चिकित्सा पर विशेष जोर के साथ जोगी आयुर्वेद भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक के रूप में आयुर्वेद को स्वीकार्यता दिलाने की दिशा में लगातार अपनी भूमिका निभा रहा है। संस्था का उद्देश्य निवारक स्वास्थ्य सेवा को लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बनाना और आयुर्वेद के माध्यम से गुजरात तथा भारत को अधिक स्वस्थ बनाने की दिशा में योगदान देना है।

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

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