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सूरत के डॉ. जगदीश सखिया समेत तीन डॉक्टरों को निलंबित करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक

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Last Updated: August 12, 2026 18:22:18 IST

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अहमदाबाद। गुजरात मेडिकल काउंसिल (जीएमसी) की ओर से सूरत के जाने-माने त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. जगदीश सखिया समेत तीन डॉक्टरों को 13 महीने के लिए निलंबित करने के फैसले पर गुजरात हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने जीएमसी को नोटिस जारी कर आगामी 8 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

  • डॉक्टरों का दावा- गुमनाम शिकायत के पीछे कॉरपोरेट प्रतिद्वंद्विता, गुजरात मेडिकल काउंसिल को नोटिस

जीएमसी ने 30 जून को सूरत के डॉ. जगदीश सखिया, डॉ. अमी शाह और अहमदाबाद की डॉ. गीता पटेल को निलंबित करने का फैसला किया था। आदेश के मुताबिक तीनों डॉक्टरों के नाम 30 अगस्त 2026 से 29 सितंबर 2027 तक स्टेट मेडिकल रजिस्टर से हटाए जाने थे।

डॉ. जगदीश सखिया वर्तमान में इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट्स, वेनेरियोलॉजिस्ट्स एंड लेप्रोलॉजिस्ट्स के अध्यक्ष हैं। उनके समेत देशभर के 30 त्वचा रोग विशेषज्ञों पर 2024 में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के खर्च पर मोनाको और पेरिस की यात्रा करने का आरोप लगा था। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के समक्ष की गई एक गुमनाम शिकायत के आधार पर गुजरात के तीन डॉक्टरों के खिलाफ जांच की जिम्मेदारी जीएमसी को सौंपी गई थी।

जगदीश सखिया

तीनों डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में दलील दी कि वे कंपनी की ओर से आयोजित एंटी-एजिंग ट्रीटमेंट के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए गए थे। इस यात्रा का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण हासिल करना था और इसके बाद भारत में अन्य डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी भी उन्हें दी जानी थी।

डॉक्टरों के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि प्रशिक्षण के लिए किए गए करार में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि कोई भी डॉक्टर कंपनी के उत्पादों से व्यावसायिक रूप से जुड़ा नहीं है और न ही उनका प्रचार करेगा। कोर्ट को यह भी बताया गया कि दुनिया भर से करीब 15 हजार डॉक्टरों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

वकीलों ने आगे दावा किया कि एनएमसी के समक्ष की गई गुमनाम शिकायत के पीछे कॉरपोरेट प्रतिद्वंद्विता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी दलील दी गई कि जीएमसी ने दंडात्मक कार्रवाई करने से पहले नियमों के तहत जरूरी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गुजरात हाईकोर्ट ने जीएमसी के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने काउंसिल को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई तक तीनों डॉक्टरों को राहत दी है।

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

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अहमदाबाद। गुजरात मेडिकल काउंसिल (जीएमसी) की ओर से सूरत के जाने-माने त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. जगदीश सखिया समेत तीन डॉक्टरों को 13 महीने के लिए निलंबित करने के फैसले पर गुजरात हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने जीएमसी को नोटिस जारी कर आगामी 8 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

  • डॉक्टरों का दावा- गुमनाम शिकायत के पीछे कॉरपोरेट प्रतिद्वंद्विता, गुजरात मेडिकल काउंसिल को नोटिस

जीएमसी ने 30 जून को सूरत के डॉ. जगदीश सखिया, डॉ. अमी शाह और अहमदाबाद की डॉ. गीता पटेल को निलंबित करने का फैसला किया था। आदेश के मुताबिक तीनों डॉक्टरों के नाम 30 अगस्त 2026 से 29 सितंबर 2027 तक स्टेट मेडिकल रजिस्टर से हटाए जाने थे।

डॉ. जगदीश सखिया वर्तमान में इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट्स, वेनेरियोलॉजिस्ट्स एंड लेप्रोलॉजिस्ट्स के अध्यक्ष हैं। उनके समेत देशभर के 30 त्वचा रोग विशेषज्ञों पर 2024 में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के खर्च पर मोनाको और पेरिस की यात्रा करने का आरोप लगा था। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के समक्ष की गई एक गुमनाम शिकायत के आधार पर गुजरात के तीन डॉक्टरों के खिलाफ जांच की जिम्मेदारी जीएमसी को सौंपी गई थी।

जगदीश सखिया

तीनों डॉक्टरों ने हाईकोर्ट में दलील दी कि वे कंपनी की ओर से आयोजित एंटी-एजिंग ट्रीटमेंट के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए गए थे। इस यात्रा का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण हासिल करना था और इसके बाद भारत में अन्य डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी भी उन्हें दी जानी थी।

डॉक्टरों के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि प्रशिक्षण के लिए किए गए करार में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि कोई भी डॉक्टर कंपनी के उत्पादों से व्यावसायिक रूप से जुड़ा नहीं है और न ही उनका प्रचार करेगा। कोर्ट को यह भी बताया गया कि दुनिया भर से करीब 15 हजार डॉक्टरों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

वकीलों ने आगे दावा किया कि एनएमसी के समक्ष की गई गुमनाम शिकायत के पीछे कॉरपोरेट प्रतिद्वंद्विता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही यह भी दलील दी गई कि जीएमसी ने दंडात्मक कार्रवाई करने से पहले नियमों के तहत जरूरी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गुजरात हाईकोर्ट ने जीएमसी के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने काउंसिल को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई तक तीनों डॉक्टरों को राहत दी है।

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

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