Live TV
Search
Home > देश > इस्लाम अपनाने वालों को बड़ा झटका! धर्म परिवर्तन के बाद नहीं मिलेगा आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

इस्लाम अपनाने वालों को बड़ा झटका! धर्म परिवर्तन के बाद नहीं मिलेगा आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Supreme Court Muslim Reservation Ruling: जस्टिस पीके मिश्रा और चंद्रशेखर की बेंच ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि जो व्यक्ति हिंदू से गैर-हिंदू बन जाता है, वह रिज़र्वेशन का फ़ायदा नहीं ले सकता.

Written By:
Last Updated: October 15, 2026 12:10:33 IST

Mobile Ads 1x1

Supreme Court Reservation Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने आज रिज़र्वेशन को लेकर एक बड़ा फ़ैसला सुनाया, जिसे तमिलनाडु सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फ़ैसले को सही ठहराया, जिसमें कहा गया था कि जो व्यक्ति इस्लाम धर्म अपनाता है, वह “बैकवर्ड क्लास” (BC) रिज़र्वेशन का हक़दार नहीं है. जस्टिस पीके मिश्रा और चंद्रशेखर की बेंच ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि जो व्यक्ति हिंदू से गैर-हिंदू बन जाता है, वह रिज़र्वेशन का फ़ायदा नहीं ले सकता. तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी, जिसमें सात पिछड़े मुस्लिम पंथों को मान्यता देने वाले उसके फ़ैसले को पलट दिया गया था. इन पंथों के सदस्यों को इस्लाम धर्म अपनाने के बाद पिछड़े मुस्लिम माना जाता था.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म से गैर-हिंदू धर्म में बदलता है, वह अपनी पिछली सामाजिक स्थिति के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं ले सकता. कोर्ट ने इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.9 मार्च, 2024 को, सरकार ने पिछड़े वर्ग, सबसे पिछड़े वर्ग, विमुक्त समुदाय और अनुसूचित जाति के लोगों को इस्लाम धर्म अपनाने के बाद मुस्लिम पिछड़े वर्ग में शामिल होने की अनुमति दी थी. हालांकि, मद्रास हाई कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. हालांकि, कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने कहा कि जो व्यक्ति हिंदू सामाजिक व्यवस्था से गैर-हिंदू सामाजिक व्यवस्था में बदलता है, वह सिर्फ अपने पिछले सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर संविधान के आर्टिकल 16(4) के तहत सकारात्मक कार्रवाई का दावा नहीं कर सकता.

अनुसूचित जाति का दर्जा सिर्फ हिंदुओं, बौद्धों या सिखों के लिए 

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के 1950 के अनुसूचित जाति आदेश का हवाला दिया. कोर्ट ने माना कि हिंदू, बौद्ध या सिख धर्म के अलावा किसी और धर्म के लोगों को शेड्यूल्ड कास्ट का स्टेटस नहीं दिया जा सकता.कोर्ट के मुताबिक, ऐसा व्यक्ति अपनी असली जाति से जुड़ा शेड्यूल्ड कास्ट का स्टेटस खो देता है.

समीर अहमद का केस

पूरा केस सेक्रेटरी टू गवर्नमेंट बनाम समीर अहमद एन. का था. समीर अहमद का असली नाम परमशिवम था. उनका जन्म तूतीकोरिन जिले में एक हिंदू जोड़े के घर हुआ था. समीर अहमद ने 2015 में इस्लाम धर्म अपना लिया था. उन्होंने अपना नाम बदला और इस्लामी रीति-रिवाजों से शादी की. फिर उन्होंने मुस्लिम लेब्बाई के तौर पर कम्युनिटी सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई किया. मुस्लिम लेब्बाई उन सात जातियों में से एक है जिन्हें राज्य सरकार के एक आदेश के तहत पिछड़े वर्ग के तौर पर मान्यता दी गई है.वतहसीलदार ने उनकी एप्लीकेशन खारिज कर दी. इसके बाद, समीर अहमद ने मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट से यह निर्देश मांगा कि उन्हें अभी भी पिछड़े वर्ग का माना जाए.मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी. हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के मार्च 2024 के आदेश को गैर-कानूनी घोषित कर दिया. हाई कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति इस्लाम अपना सकता है, लेकिन रिज़र्वेशन के लिए इस्लाम के अंदर किसी भी जाति या समुदाय में धर्म नहीं बदल सकता.

धर्म बदलने के बाद जाति सर्टिफ़िकेट का क्या होता है?

  • SC सर्टिफ़िकेट अमान्य: धर्म बदलने पर पुराना SC सर्टिफ़िकेट मान्य नहीं रहता.
  • OBC रिज़र्वेशन पर असर: नया धर्म अपनाने के बाद, पुरानी जाति के आधार पर OBC कोटे का फ़ायदा नहीं मिलता.
  • कोर्ट का रुख: सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के अनुसार, राज्य सरकारें धर्म बदलने वालों को पुरानी जाति का मानकर रिज़र्वेशन नहीं दे सकतीं.

MORE NEWS

Home > देश > इस्लाम अपनाने वालों को बड़ा झटका! धर्म परिवर्तन के बाद नहीं मिलेगा आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Written By:
Last Updated: October 15, 2026 12:10:33 IST

Mobile Ads 1x1

Supreme Court Reservation Verdict: सुप्रीम कोर्ट ने आज रिज़र्वेशन को लेकर एक बड़ा फ़ैसला सुनाया, जिसे तमिलनाडु सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फ़ैसले को सही ठहराया, जिसमें कहा गया था कि जो व्यक्ति इस्लाम धर्म अपनाता है, वह “बैकवर्ड क्लास” (BC) रिज़र्वेशन का हक़दार नहीं है. जस्टिस पीके मिश्रा और चंद्रशेखर की बेंच ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि जो व्यक्ति हिंदू से गैर-हिंदू बन जाता है, वह रिज़र्वेशन का फ़ायदा नहीं ले सकता. तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी, जिसमें सात पिछड़े मुस्लिम पंथों को मान्यता देने वाले उसके फ़ैसले को पलट दिया गया था. इन पंथों के सदस्यों को इस्लाम धर्म अपनाने के बाद पिछड़े मुस्लिम माना जाता था.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म से गैर-हिंदू धर्म में बदलता है, वह अपनी पिछली सामाजिक स्थिति के आधार पर आरक्षण का लाभ नहीं ले सकता. कोर्ट ने इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.9 मार्च, 2024 को, सरकार ने पिछड़े वर्ग, सबसे पिछड़े वर्ग, विमुक्त समुदाय और अनुसूचित जाति के लोगों को इस्लाम धर्म अपनाने के बाद मुस्लिम पिछड़े वर्ग में शामिल होने की अनुमति दी थी. हालांकि, मद्रास हाई कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. हालांकि, कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने कहा कि जो व्यक्ति हिंदू सामाजिक व्यवस्था से गैर-हिंदू सामाजिक व्यवस्था में बदलता है, वह सिर्फ अपने पिछले सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर संविधान के आर्टिकल 16(4) के तहत सकारात्मक कार्रवाई का दावा नहीं कर सकता.

अनुसूचित जाति का दर्जा सिर्फ हिंदुओं, बौद्धों या सिखों के लिए 

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के 1950 के अनुसूचित जाति आदेश का हवाला दिया. कोर्ट ने माना कि हिंदू, बौद्ध या सिख धर्म के अलावा किसी और धर्म के लोगों को शेड्यूल्ड कास्ट का स्टेटस नहीं दिया जा सकता.कोर्ट के मुताबिक, ऐसा व्यक्ति अपनी असली जाति से जुड़ा शेड्यूल्ड कास्ट का स्टेटस खो देता है.

समीर अहमद का केस

पूरा केस सेक्रेटरी टू गवर्नमेंट बनाम समीर अहमद एन. का था. समीर अहमद का असली नाम परमशिवम था. उनका जन्म तूतीकोरिन जिले में एक हिंदू जोड़े के घर हुआ था. समीर अहमद ने 2015 में इस्लाम धर्म अपना लिया था. उन्होंने अपना नाम बदला और इस्लामी रीति-रिवाजों से शादी की. फिर उन्होंने मुस्लिम लेब्बाई के तौर पर कम्युनिटी सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई किया. मुस्लिम लेब्बाई उन सात जातियों में से एक है जिन्हें राज्य सरकार के एक आदेश के तहत पिछड़े वर्ग के तौर पर मान्यता दी गई है.वतहसीलदार ने उनकी एप्लीकेशन खारिज कर दी. इसके बाद, समीर अहमद ने मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कोर्ट से यह निर्देश मांगा कि उन्हें अभी भी पिछड़े वर्ग का माना जाए.मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी. हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के मार्च 2024 के आदेश को गैर-कानूनी घोषित कर दिया. हाई कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति इस्लाम अपना सकता है, लेकिन रिज़र्वेशन के लिए इस्लाम के अंदर किसी भी जाति या समुदाय में धर्म नहीं बदल सकता.

धर्म बदलने के बाद जाति सर्टिफ़िकेट का क्या होता है?

  • SC सर्टिफ़िकेट अमान्य: धर्म बदलने पर पुराना SC सर्टिफ़िकेट मान्य नहीं रहता.
  • OBC रिज़र्वेशन पर असर: नया धर्म अपनाने के बाद, पुरानी जाति के आधार पर OBC कोटे का फ़ायदा नहीं मिलता.
  • कोर्ट का रुख: सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के अनुसार, राज्य सरकारें धर्म बदलने वालों को पुरानी जाति का मानकर रिज़र्वेशन नहीं दे सकतीं.

MORE NEWS