तमिलनाडु में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने 29 जनवरी 2026 को सुनवाई करते हुए 'लॉजिकल विसंगति' वाली लिस्ट के वेरिफिकेशन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया.
supreme court of india
तमिलनाडु में SIR को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला आ गया है. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मतदाता सूची की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने 29 जनवरी 2026 को सुनवाई करते हुए ‘लॉजिकल विसंगति’ वाली लिस्ट के वेरिफिकेशन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया.
तमिलनाडु में लगभग 1.16 करोड़ लोगों के दस्तावेज में लॉजिकल विसंगति पाई गयी थी, जिन्हें नोटिस दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन लोगों के नाम प्रकाशित करें, जिन्हें चुनाव आयोग (EC) की ‘तार्किक विसंगति’ सूची में वर्गीकृत किया गया है.
कोर्ट ने कहा कि लॉजिकल विसंगति कैटेगरी में शामिल लोगों के नाम ग्राम पंचायत भवन, तालुका कार्यालयों, सब-डिवीजन स्तर और शहरी वार्ड कार्यालयों के बाहर चस्पा किए जाएं. लिस्ट में विसंगति का संक्षिप्त कारण भी उल्लिखित होगा. सरकारी दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन से पारदर्शिता बढ़ेगी. जिनके नाम सूची में दिखाई देते हैं, वे तार्किक विसंगति सूची प्रदर्शित होने की तारीख से 10 दिनों के भीतर व्यक्तिगत रूप से या अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से दस्तावेज जमा कर सकते हैं.
लिस्ट में नाम आने वालों को 10 दिनों के अंदर व्यक्तिगत रूप से या अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए दस्तावेज या आपत्तियां जमा करने की छूट दी गई. आपत्तियां बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) या उप-विभागीय कार्यालयों में स्वीकार होंगी. प्रक्रिया के ठीक ढंग से सञ्चालन हेतु पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती के लिए जिला कलेक्टरों को चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करने को कहा गया.
सर्वोच्च न्यायालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) और पुलिस कमिश्नरों को निर्देश दिए कि इन स्थानों पर कानून-व्यवस्था बनी रहे. न्यायालय का कहना है कि SIR प्रक्रिया शांतिपूर्ण चले. कोर्ट ने उम्मीद जताई कि भारतीय चुनाव आयोग (ECI) अन्य राज्यों में भी यही प्रक्रिया अपनाएगा, जहां SIR चल रहा है.
इस मामले में DMK सचिव आरएस भारती की याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें SIR में कथित अनियमितताओं को चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ता की ओर से कपिल सिब्बल, ECI की ओर से दमा शेषाद्रि नायडू और तमिलनाडु की ओर से अमित आनंद तिवारी पेश हुए थे. कोर्ट ने (केस: RS Bharathi v. Election Commission of India W.P.(C) No. 1072/2025) मुकदमे के तहत ECI को मैनपावर उपलब्ध कराने को कहा.
यह फैसला मतदाता सूची के ड्राफ्ट में विसंगतियों के समाधान को मजबूत करेगा. साथ ही पारदर्शिता और समयबद्ध प्रक्रिया से विवाद कम होंगे.
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