Who is Harivansh Narayan Singh: जनता दल (यूनाइटेड) पार्टी के नॉमिनेटेड सदस्य हरिवंश नारायण सिंह शुक्रवार को बिना किसी विरोध के राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन चुने गए, जिससे वे लगातार तीसरी बार इस पद पर बने रहेंगे. हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म होने के बाद डिप्टी चेयरमैन का पद खाली हो गया था. केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता जे पी नड्डा ने उनके चुनाव के लिए पहला प्रस्ताव रखा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने हरिवंश को उनके चुनाव पर बधाई दी. यह पहली बार है कि किसी नॉमिनेटेड सदस्य को डिप्टी चेयरमैन चुना गया है.
राज्यसभा में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा “लगातार तीसरी बार डिप्टी चेयरमैन चुना जाना इस सदन के आप पर गहरे भरोसे, पिछले समय में आपके अनुभव से सदन को मिले फ़ायदों और सबको साथ लेकर चलने की आपकी कोशिशों का सबूत है.” मोदी ने आगे कहा, “हम सबने हरिवंश के नेतृत्व में सदन की ताकत को और भी असरदार होते देखा है. वह न सिर्फ़ सदन की कार्यवाही चलाते हैं, बल्कि अपने पिछले अनुभवों का इस्तेमाल करके सदन को बहुत बारीकी से बेहतर बनाते हैं.” प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि डिप्टी चेयरमैन का नया कार्यकाल “उसी जोश बैलेंस और लगन” के साथ आगे बढ़ेगा और मिलकर किए गए प्रयासों से सदन की गरिमा नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगी. पत्रकार से नेता बने हरिवंश 2018 से डिप्टी चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे हैं.
सिताबदिया गांव में हुआ था जन्म
ध्यान दें कि हरिवंश नारायण का जन्म 30 जून, 1956 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिताबदियारा में हुआ था. 27 बस्तियों वाला यह गांव, सिताबदियारा, दो राज्यों बिहार और उत्तर प्रदेश और तीन जिलों आरा, बलिया और छपरा में आता है. हरिवंश ने BHU से इकोनॉमिक्स में अपनी अंडरग्रेजुएट डिग्री पूरी की. इसके बाद उन्होंने उसी यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म में डिप्लोमा किया.
पॉलिटिकल करियर
हरिवंश अप्रैल 2014 में जनता दल (यूनाइटेड) की तरफ से बिहार से राज्यसभा के लिए चुने गए थे. वे पहली बार 9 अगस्त, 2018 को राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन चुने गए थे. वे दूसरी बार 14 सितंबर, 2020 को चुने गए. यह हरिवंश का तीसरा टर्म होगा.
डिप्टी चेयरमैन भी रह चुके हैं पत्रकार
हरिवंश ने पॉलिटिक्स में रहते हुए राज्यसभा में इतिहास रचा है. लेकिन उससे पहले हरिवंश ने जर्नलिज़्म में भी अपना नाम बनाया. उन्होंने टाइम्स ऑफ़ इंडिया ग्रुप के साथ ट्रेनी जर्नलिस्ट के तौर पर अपना जर्नलिज़्म करियर शुरू किया. वहां से वे हिंदी मैगज़ीन ‘धर्मयुग’ में सब-एडिटर बन गए.