Women Reservation Bill: देश की संसद और सांसदों ने इतिहास रच दिया. देश की संसद में गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) की देर रात तक लंबी बहस चली. सत्ता और विपक्ष के बीच कई बार जमकर हंगामा हुआ. खासतौर से महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर तो कई बार सांसदों में भिड़ंत देखने को मिली. इसके बाद सरकार द्वारा नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही आधी रात को महिला आरक्षण कानून 2023 देश भर में लागू हो गया. सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि अधिनियम की धारा 1(2) के तहत गुरुवार (16 अप्रैल 2026) से इसके सभी प्रावधान लागू होंगे. इसका मतलब यह कानून प्रभावी हो गया है.
इसके साथ ही केंद्रीय कानून मंत्रालय ने भी गुरुवार को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 को प्रभावी बनाने की घोषणा कर दी. मिली जानकारी के अनुसार, महिला आरक्षण बिला पर शुक्रवार (17 अप्रैल, 2026) शाम 4 बजे वोटिंग होनी है. वहीं, संसद के विशेष सत्र में जिन तीन विधेयकों पर चर्चा हो रही है, उन्हें सरकार द्वारा इसलिए लाया गया है ताकि 2029 में महिला आरक्षण लागू किया जा सके.
रचा गया आधी रात को इतिहास
नारी शक्ति अभिनंदन अधिनियम पर 16 अप्रैल को जमकर बहस हुई. गुरुवार को सुबह लोकसभा में 3 दिन के विशेष सत्र की शुरुआत हुई. इस कड़ी में पहले ही दिन लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए. महिला आरक्षण अधिनियम 2023 (The Women Reservation Act 2023) सर्वाधिक चर्चा में रहा. यही वजह रही कि सबसे ज्यादा चर्चा महिला आरक्षण बिल पर हुई. बताया जा रहा है कि देर रात यानी कहें आधी रात को करीब डेढ़ बजे तक इस पर चर्चा चली. संसद का विशेष सत्र शुक्रवार को भी जारी रहेगा और बिल पर लंबी चर्चा होनी है, जिसके बाद शाम 4 बजे इस पर वोटिंग होगी.
नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है?
सितंबर, 2023 में संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण अधिनियम) लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है. महिला आरक्षण परिसीमन (delimitation) के बाद लागू किया जाएगा. दरअसल, विशेषज्ञ भी मानते हैं कि वर्ष 2027 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के पूरा होने तक लागू नहीं हो सकता था. ऐसे में इसे 2029 में लागू किए जाने की योजना है.
कांग्रेस ने क्या जताई हैरत
उधर, संसद में जारी विशेष सत्र के बीच देश में महिला आरक्षण अधिनियम 2023 (The Women Reservation Act 2023), जिसमें विधायिकाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है को लागू कर दिया गया है. कानून मंत्रालय की ओर से इस संबंध में गुरुवार को सरकारी नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया तो कांग्रेस ने प्रतिक्रिया में इस नोटिफिकेशन को विचित्र करार दिया है. कांग्रेस का कहना है कि जिस अधिनियम पर बहस चल रही है उसे कैसे लागू कर दिया गया.