अमेरिका में एक महिला ने अपने दिवंगत पति के निवेश खाते में मौजूद 2.33 मिलियन डॉलर की रकम को लेकर कानूनी लड़ाई जीत ली है. उनके पति ने यह रकम अपने चार बच्चों के लिए छोड़ी थी. केंटकी कोर्ट ऑफ अपील्स में इस मामले की सुनवाई हुई, जिसने पिछले फैसले को बरकरार रखा. अदालत ने माना कि राज्य के कानून के तहत नैन्सी बोबो पेरिन इस रकम के आधे हिस्से की हकदार हैं, भले ही लाभार्थियों की सूची में उनका नाम न हो. इसके अलावा, अदालत ने उस फैसले को भी बरकरार रखा जिसके तहत उनके पति द्वारा अपनी मृत्यु से कुछ समय पहले अपने बच्चों और पोते-पोतियों को दिए गए 126,000 डॉलर के उपहारों को वैध माना गया था.
बता दें कि विलियम, जिन्हें आमतौर पर बिल के नाम से जाना जाता था, का 6 फरवरी 2024 को निधन हो गया. उन्होंने कोई वसीयत नहीं छोड़ी थी. उनकी मृत्यु के बाद, उनके चार वयस्क बच्चों ने अदालत के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें उनकी पत्नी नैन्सी को उनकी निजी संपत्ति का एक हिस्सा दिया गया था.
अलग होने के बाद फिर हुए साथ
बिल और नैन्सी की पहली मुलाकात 1952 में अटलांटा में हुई थी, लेकिन बाद में दोनों अलग हो गए. दोनों ने दूसरों से शादी कर ली और उनके बच्चे भी हुए. अपने जीवनसाथियों के निधन के बाद, 2007 में वे फिर से संपर्क में आए और अक्टूबर 2015 में शादी कर ली. ‘जस्टिया लॉ’ की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट के रिकॉर्ड बताते हैं कि उन्होंने कभी भी अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में कोई चर्चा नहीं की, और न ही शादी से पहले या बाद में कोई समझौता (prenuptial या postnuptial agreement) किया. दिसंबर 2022 में बिल बुरी तरह गिर गए, जिसके बाद उन्हें कई महीनों तक अस्पताल में इलाज कराना पड़ा. उनके निधन के बाद, नैन्सी को उनकी संपत्ति का प्रबंधन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई.
2.33 मिलियन डॉलर के निवेश को लेकर विवाद
बिल के पास श्वाब (Schwab) के ज़रिए मैनेज किए जाने वाले दो इन्वेस्टमेंट अकाउंट थे, जिनकी कुल कीमत उनकी मौत के समय 2.33 मिलियन डॉलर थी. इन दोनों अकाउंट में उनके बच्चों को लाभार्थी (बेनिफिशियरी) के तौर पर नामित किया गया था, जिससे यह पैसा सीधे उन्हें मिल सकता था. हालाँकि, नैन्सी ने दावा किया कि केंटकी के ‘डाउअर लॉ’ (dower law) के तहत, वह अतिरिक्त निजी संपत्ति के आधे हिस्से की हकदार हैं. यह कानून उन लोगों पर लागू होता है जिनकी मौत बिना वसीयत बनाए हो जाती है. इस विवाद में 126,000 डॉलर की वह रकम भी शामिल थी, जिसे बिल की मौत से ठीक एक हफ़्ते पहले, 30 जनवरी 2024 को उनके इन्वेस्टमेंट अकाउंट से उनके बच्चों और पोते-पोतियों को ट्रांसफर किया गया था.
अपील कोर्ट ने नैन्सी के पक्ष में फैसला सुनाया
अक्टूबर 2025 में, फेयेट सर्किट कोर्ट ने नैन्सी के पक्ष में फैसला दिया. बिल के बच्चों ने अपील करते हुए तर्क दिया कि निवेश खातों की रकम सीधे उन लोगों को मिलनी चाहिए जिनके नाम लाभार्थी के तौर पर दर्ज हैं. केंटकी कोर्ट ऑफ अपील्स ने उनके तर्कों को खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि बिल का अपने जीवनकाल में इन खातों पर पूरा नियंत्रण था; वह उनकी अनुमति के बिना पैसे निकाल सकते थे, लाभार्थियों को बदल सकते थे या खातों को बंद भी कर सकते थे.
कोर्ट ने इस निष्कर्ष को भी सही ठहराया कि बच्चे उस कानूनी धारणा को गलत साबित नहीं कर पाए, जिसके अनुसार ये व्यवस्थाएं नैन्सी को उसका हक दिलाने से रोकने के लिए की गई थीं. नतीजतन, निवेश खातों की कुल वैल्यू के आधे हिस्से पर नैन्सी का अधिकार, और साथ ही विवादित ट्रांसफर में से उसका हिस्सा, बरकरार रखा गया.