हरियाणा का वो बेटा जो बना सबसे युवा मुख्यमंत्री, जीप चलाकर खुद करता था चुनाव प्रचार, जमीनी राजनीति में बड़ा नाम
Haryana Youngest CM Bansilal: अक्सर चुनावों में कुछ ऐसे नेताओं के नाम सामने आते हैं, जो कड़ी मेहनत और जनता के बीच अपनी पहचान बनाकर बड़े मुकाम पर पहुंच जाते हैं. इसी तरह हरियाणा के धूल भरे रास्तों पर एक जीप अक्सर धड़धड़ाती हुई निकलती थी. वो जीप गांव-गांव रुकती और जगह-जगह चौपालें लगती थीं. जीप में बैठा इंसान अपने दम पर चुनावी शंखनाद कर रहा था. वो लोगों से मुलाकात कर उनकी आंखों में आंखे डालकर बात करता था और लोगों से उनकी परेशानियां पूछता था, यही उसकी असली ताकत थी. ये कहानी है हरियाणा के बेटे बंसीलाल की, जिन्होंने जमीन से उठकर सत्ता की कुर्सी यानी सीएम बनने तक का सफर तय किया.
बिना रैली, सीधे बातचीत
बता दें कि 1960 का वो दशक था, जब राजनीति मंचों और भाषणों से की जाती थी लेकिन बंसीलाल ने अलग रास्ता चुना. वे जमीनी स्तर पर उतरे और खुद जीप चलाकर चुनाव प्रचार करने लगे. बिना किसी रैली, भाषण के उन्होंने सीधे बातचीत करने का तरीका अपनाया.
जनता से करते थे बात
बंसीलाल अपनी जीप लेकर गांव-गांव जाया करते थे. वे गांव के युवाओं के साथ ही बुजुर्गों और किसानों से भी मुलाकात करते थे. वे 1968 में केवल 40 साल की उम्र में हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे. वे तीन बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने.
काफी सख्त नेता थे बंसीलाल
ये हरियाणा की राजनीति में एक नई शैली के उदय का संकेत था. कहा जाता है कि उनका प्रशासनिक अंदाज काफी सख्त था. वे तेजी से फैसले लेते और योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारते थे. विरोधों के बावजूद वे अपनी बात पर अडिग रहते थे.
विकास पुरुष बंसीलाल
उनकी छवि एक विकास पुरुष की था. उन्हें हरियाणा के विकास की दिशा तय करने वाले नेताओं में गिना जाता है. उन्होंने हरियाणा में सड़कों का जाल बिछाया. औद्योगिक ढांचे को मजबूत किया. साथ ही बिजली और सिंचाई परियोजनाओं पर भी जोर दिया.
राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय
वे राष्ट्रीय राजनीति में भी काफी सक्रिय रहे. वे इंदिरा गांधी के समय में केंद्रीय सत्ता के काफी करीब रहे. कहा जाता है कि वो कम बोलते थे लेकिन बड़े फैसले लेते थे. उनके अगले कदम के बारे में कोई जान भी नहीं पाता था.
बनाई अपनी राजनीतिक पार्टी
उनका राजनीतिक करियर भी काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. उन्होंने आलोचनाएं झेलीं और वे सत्ता से बाहर भी हुए लेकिन हर बार दमदार वापसी की. उन्होंने अपनी हरियाणा विकास पार्टी बनाई और फिर भी सत्ता में वापसी की. हालांकि बाद में उस पार्टी का विलय कांग्रेस में हो गया.
रक्षामंत्री और रेल मंत्री रहे बंसीलाल
इंदिरा गांधी के दौर में बंसीलाल 1975-1977 के बीच रक्षामंत्री रहे. इसके अलावा वे राजीव गांधी के दौर में 1984 से 1986 तक रेल मंत्री रहे. उन्होंने रक्षामंत्री रहते हुए अपने कार्यकाल में इमरजेंसी देखी और रेल मंत्री रहते हुए रेलवे आधुनिकीकरण और विस्तार पर काम किया.