2026 एशियन गेम्स की मेजबानी कर रहे जापान की तैयारियों को लेकर अब भारत और पाकिस्तान के सुर मिलते हुए नजर आ रहे हैं. दोनों ही देशों ने आयोजन के इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जापान में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक होने वाले एशियाई खेलों (Asian Games 2026) से ठीक पहले क्रिकेट मुकाबलों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. एशिया की दिग्गज क्रिकेट टीमों के ऐतराज के बाद ‘जापान क्रिकेट एसोसिएशन’ (JCA) को अपने इंतजामों के बचाव में सामने आना पड़ा है. टूर्नामेंट की तैयारियों और सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
क्या जापान में नहीं होगा क्रिकेट मुकाबला?
सबसे बड़ा संशय क्रिकेट मुकाबलों पर बना हुआ है, जिससे यह आशंका जताई जाने लगी है कि क्या जापान में क्रिकेट के मैच आयोजित हो भी पाएंगे या नहीं. दरअसल, आयोजकों और स्थानीय प्रशासन की ओर से मैदान और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है. ऐसे में अब क्रिकेट फैंस की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे होने वाले निरीक्षण के बाद जांच टीम क्या अंतिम फैसला लेती है, जिससे 2026 एशियन गेम्स में क्रिकेट का भविष्य तय होगा.
स्टेडियम और पिच पर क्यों मचा है बवाल?
दरअसल, विवाद की मुख्य वजह निशिन क्रिकेट ग्राउंड (निप्पोन क्रिकेट पार्क) है. यह पहले एक बेसबॉल मैदान था, जिसे इसी साल मार्च में 2,000 दर्शकों की क्षमता वाले क्रिकेट स्टेडियम में बदला गया है. भले ही यहां टी-20 वर्ल्ड कप के क्वालीफायर मैच खेले जा चुके हैं, लेकिन किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिहाज से यह मैदान पूरी तरह अनभिज्ञ है.
भारत और पाकिस्तान जैसे बड़े क्रिकेट बोर्ड्स ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है. उनका मानना है कि मैदान की पिच का कोई पुराना ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है. स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानक ड्रेसिंग रूम और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है.
इस मुद्दे पर भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के क्रिकेट बोर्ड्स ने आपस में चर्चा की है. अब एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) की एक स्पेशल इंस्पेक्शन टीम जल्द ही जापान का दौरा करेगी, ताकि यह तय किया जा सके कि यह मैदान अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरता है या नहीं.
17 महीने में तैयार हुआ मैदान
जापान में क्रिकेट बहुत ज्यादा लोकप्रिय नहीं है, ऐसे में महज 17 महीने के भीतर एक नया क्रिकेट स्टेडियम तैयार करना आयोजकों के लिए बड़ी चुनौती थी.
जापान क्रिकेट एसोसिएशन के सीईओ नाओकी एलेक्स मियाजी ने आयोजकों का बचाव करते हुए कहा, आयोजकों और एशियाई क्रिकेट परिषद ने मिलकर शून्य से शुरुआत की है, क्योंकि आइची (Aichi) प्रांत में पहले से कोई क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था. उन्होंने बताया कि श्रीलंका क्रिकेट के सहयोग से यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की टर्फ (घास) और हाइब्रिड पिचें तैयार की गई हैं.
मियाजी ने भरोसा जताया कि यह पिच और आउटफील्ड एशियाई खेलों के इतिहास में अब तक की सबसे बेहतरीन क्रिकेट पिचों में से एक साबित होगी.
खिलाड़ियों के कमरों और दूरी को लेकर बढ़ी परेशानी
मैदान के अलावा खिलाड़ियों के रुकने और सफर को लेकर भी शिकायतें सामने आ रही हैं. क्रिकेट, फुटबॉल और सॉफ्टबॉल के खिलाड़ियों को नागोया शहर के होटलों में ठहराया जा रहा है, जहां से स्टेडियम की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है.
टीमों का कहना है कि होटल के कमरे बेहद छोटे हैं. दो खिलाड़ियों के रहने और उनके भारी-भरकम क्रिकेट किट बैग रखने के लिए जगह काफी कम पड़ रही है.
इन शिकायतों पर मियाजी ने कहा कि कई अन्य खेलों के खिलाड़ियों को इससे भी साधारण माहौल में रहना पड़ रहा है. उन्होंने सलाह दी कि अगर किसी देश का क्रिकेट बोर्ड अपने खिलाड़ियों को ज्यादा बेहतर सुविधाएं देना चाहता है, तो वे अपनी पसंद से अलग होटल बुक करने के लिए स्वतंत्र हैं.