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Home > क्रिकेट > कपड़े धोकर बनाई ग्रिप, कंचों से सीखा निशाना; भारत को वो कप्तान जिसने पाकिस्तान के खिलाफ लिया ऐतिहासिक फैसला; निजी जीवन ने भी खूब बटोरीं सुर्खियां

कपड़े धोकर बनाई ग्रिप, कंचों से सीखा निशाना; भारत को वो कप्तान जिसने पाकिस्तान के खिलाफ लिया ऐतिहासिक फैसला; निजी जीवन ने भी खूब बटोरीं सुर्खियां

जब 1978 में पाक अंपायरों की बेईमानी के खिलाफ उन्होंने मैच छोड़ दिया था, उंगलियां मजबूत करने को कपड़े धोए और ऑस्ट्रेलिया की ग्लेनिथ से प्यार से लेकर दूसरी शादी तक, बिशन सिंह बेदी के जयंती पर जानिए उनकी जिंदगी के कुछ अनसुने किस्से!

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Last Updated: 2026-09-25 14:17:05

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सर पर बंधा पटका, चेहरे पर एक अलग ही तेज और हाथ में फिरकी का वह जादू, जिसने दुनिया के दिग्गज से दिग्गज बल्लेबाजों को अपनी उंगलियों पर नचाया, भारतीय क्रिकेट के सबसे धाकड़ और निडर कप्तानों में शुमार बिशन सिंह बेदी का आज (25 सितंबर) जन्मदिन है. बेदी सिर्फ एक महान स्पिनर ही नहीं थे, बल्कि वह मैदान पर और मैदान के बाहर, अपने उसूलों से कभी समझौता न करने वाले ऐसे ही ‘रीढ़ की हड्डी वाले कप्तान’ माने जाते थे.

उनके जन्मदिन के खास मौके पर आइए जानते हैं उनके जीवन के वे अनकहे और दिलचस्प किस्से, जब खून से लथपथ होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी, पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक फैसला लिया और कैसे उनकी पर्सनल लाइफ ने भी मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरीं.

जब चोटिल होने के बावजूद मैदान में डटे रहे बेदी

1970 के दशक में वेस्टइंडीज और पाकिस्तान जैसी घातक टीमों के सामने जहां बल्लेबाज खौफ खाते थे, वहीं बेदी बिना डरे उनका सामना करते थे. 1976 के किंग्स्टन टेस्ट में वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने जब भारतीय बल्लेबाजों पर खतरनाक बाउंसरों की बौछार कर दी और खिलाड़ी चोटिल होने लगे, तब बेदी ने खेल भावना के कत्ल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया. मैदान पर खून से लथपथ माहौल और खिलाड़ियों की सुरक्षा खतरे में देखकर बेदी ने अपनी पारी समय से पहले ही घोषित कर दी थी. वह जीत से ज्यादा अपने खिलाड़ियों का सम्मान और सुरक्षा पसंद करते थे.

पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक वॉकआउट

साल 1978 में भारत का पाकिस्तान दौरा 18 साल बाद क्रिकेट संबंधों की बहाली के लिहाज से बेहद ऐतिहासिक था. लेकिन 3 नवंबर 1978 को साहीवाल में खेले गए तीसरे और निर्णायक वनडे मैच में जो हुआ, उसने क्रिकेट इतिहास में तहलका मचा दिया. पाकिस्तान के 205 रनों के जवाब में भारत ने 2 विकेट पर 183 रन बना लिए थे. क्रीज पर अंशुमन गायकवाड़ (78 रन) और गुंडप्पा विश्वनाथ जमे हुए थे. भारत को जीत के लिए 14 गेंदों में सिर्फ 23 रनों की दरकार थी और 8 विकेट हाथ में थे.

अपनी हार सामने देख पाकिस्तानी कप्तान मुश्ताक मोहम्मद और तेज गेंदबाज सरफराज नवाज ने बेईमानी का रास्ता चुना. सरफराज ने गायकवाड़ को सिर से 6 फीट ऊंची लगातार 4 बाउंसर फेंकी. पाकिस्तानी अंपायरों (जावेद अख्तर और खिजर हयात) ने एक भी गेंद को ‘वाइड’ करार नहीं दिया.

ड्रेसिंग रूम में बैठे बेदी का खून खौल उठा. अंपायरों की सरेआम बेईमानी देखकर वह तुरंत मैदान में उतरे. उन्होंने विरोध दर्ज कराया और अपने दोनों बल्लेबाजों को वापस पवेलियन बुला लिया.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह किसी कप्तान द्वारा मैच छोड़ने की पहली घटना थी. इस फैसले के कारण भारत मैच हार गया और सीरीज गंवा बैठा, बेदी से कप्तानी भी छीन ली गई; लेकिन उनके इस कदम ने आईसीसी को हिलाकर रख दिया. इसके बाद साहीवाल मैदान पर हमेशा के लिए बैन लगा दिया गया और आगे चलकर ‘न्यूट्रल अंपायर्स’ की शुरुआत हुई.

उंगलियां मजबूत करने के लिए धोते थे कपड़े, कंचों से सीखा सटीक निशाना

बिशन सिंह बेदी की घातक स्पिन के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और देसी नुस्खे थे. शुरुआती दिनों में अपनी कलाई और उंगलियों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए बेदी खुद हाथ से कपड़े धोया करते थे. इसी रगड़ और मेहनत ने उनकी फिरकी को घातक बनाया. अमृतसर की गलियों में बचपन में कंचे (मार्बल्स) खेलने के शौक ने उन्हें एक जगह ध्यान केंद्रित करने में मदद की, जिसका फायदा उन्हें गेंद को सही टप्पे पर डालने में मिला.

बेदी के नाम फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 1560 विकेट लेने का ऑल-टाइम भारतीय रिकॉर्ड दर्ज है. इसके अलावा, भारत की पहली वनडे जीत में उन्होंने 12 ओवरों में बेहद कंजूसी से गेंदबाजी करते हुए 8 मेडन ओवर फेंके थे.

निजी जीवन ने भी बटोरीं सुर्खियां

बिशन सिंह बेदी जितने अपनी शानदार स्पिन गेंदबाजी के लिए जाने जाते थे, उतनी ही चर्चा उनकी पर्सनल लाइफ की भी होती थी. उनकी लव स्टोरी बेहद दिलचस्प थी और उन्होंने दो शादियां की थीं. उनकी पहली पत्नी ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली थीं, जिनका नाम ग्लेनिथ (Glenith) था.

दोनों की पहली मुलाकात 1967-68 में भारतीय टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मेलबर्न में एक पार्टी में हुई थी. बिशन सिंह बेदी को पहली ही नजर में उनसे प्यार हो गया था. धीरे-धीरे उनका रिश्ता आगे बढ़ा और फिर दोनों ने शादी कर ली.

शादी के एक साल बाद उनका एक बेटा हुआ, जिसका नाम गवास इंदर सिंह रखा गया. हालांकि, कुछ समय बाद दोनों के रिश्तों में खटास आने लगी और आपसी अनबन की वजह से उनका तलाक हो गया.

पहली पत्नी से तलाक के बाद की दूसरी शादी

ऑस्ट्रेलियाई पत्नी से अलग होने के बाद बिशन सिंह बेदी ने अंजू नाम की महिला से दूसरी शादी की. उनका भी एक बेटा हुआ, जिसका नाम अंगद बेदी है. अंगद बॉलीवुड के जाने-माने मॉडल और एक्टर हैं. अंगद अपने पिता के बेहद करीब थे और अक्सर सोशल मीडिया पर उनके साथ तस्वीरें शेयर करते रहते थे. बिशन सिंह बेदी के अपनी बहू और एक्ट्रेस नेहा धूपिया के साथ भी बहुत अच्छे संबंध थे.

बिशन सिंह बेदी अब इस दुनिया में नहीं रहे, अक्टूबर 2023 में उनका निधन हो गया. लेकिन भारतीय क्रिकेट में ईमानदारी, निडरता और स्वाभिमान का जो मानक उन्होंने स्थापित किया, वह आज भी हर क्रिकेट प्रेमी के दिल में जिंदा है. भारतीय क्रिकेट में उनके ऐतिहासिक योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा.

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Last Updated: 2026-09-25 14:17:05

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सर पर बंधा पटका, चेहरे पर एक अलग ही तेज और हाथ में फिरकी का वह जादू, जिसने दुनिया के दिग्गज से दिग्गज बल्लेबाजों को अपनी उंगलियों पर नचाया, भारतीय क्रिकेट के सबसे धाकड़ और निडर कप्तानों में शुमार बिशन सिंह बेदी का आज (25 सितंबर) जन्मदिन है. बेदी सिर्फ एक महान स्पिनर ही नहीं थे, बल्कि वह मैदान पर और मैदान के बाहर, अपने उसूलों से कभी समझौता न करने वाले ऐसे ही ‘रीढ़ की हड्डी वाले कप्तान’ माने जाते थे.

उनके जन्मदिन के खास मौके पर आइए जानते हैं उनके जीवन के वे अनकहे और दिलचस्प किस्से, जब खून से लथपथ होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी, पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक फैसला लिया और कैसे उनकी पर्सनल लाइफ ने भी मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरीं.

जब चोटिल होने के बावजूद मैदान में डटे रहे बेदी

1970 के दशक में वेस्टइंडीज और पाकिस्तान जैसी घातक टीमों के सामने जहां बल्लेबाज खौफ खाते थे, वहीं बेदी बिना डरे उनका सामना करते थे. 1976 के किंग्स्टन टेस्ट में वेस्टइंडीज के गेंदबाजों ने जब भारतीय बल्लेबाजों पर खतरनाक बाउंसरों की बौछार कर दी और खिलाड़ी चोटिल होने लगे, तब बेदी ने खेल भावना के कत्ल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया. मैदान पर खून से लथपथ माहौल और खिलाड़ियों की सुरक्षा खतरे में देखकर बेदी ने अपनी पारी समय से पहले ही घोषित कर दी थी. वह जीत से ज्यादा अपने खिलाड़ियों का सम्मान और सुरक्षा पसंद करते थे.

पाकिस्तान के खिलाफ ऐतिहासिक वॉकआउट

साल 1978 में भारत का पाकिस्तान दौरा 18 साल बाद क्रिकेट संबंधों की बहाली के लिहाज से बेहद ऐतिहासिक था. लेकिन 3 नवंबर 1978 को साहीवाल में खेले गए तीसरे और निर्णायक वनडे मैच में जो हुआ, उसने क्रिकेट इतिहास में तहलका मचा दिया. पाकिस्तान के 205 रनों के जवाब में भारत ने 2 विकेट पर 183 रन बना लिए थे. क्रीज पर अंशुमन गायकवाड़ (78 रन) और गुंडप्पा विश्वनाथ जमे हुए थे. भारत को जीत के लिए 14 गेंदों में सिर्फ 23 रनों की दरकार थी और 8 विकेट हाथ में थे.

अपनी हार सामने देख पाकिस्तानी कप्तान मुश्ताक मोहम्मद और तेज गेंदबाज सरफराज नवाज ने बेईमानी का रास्ता चुना. सरफराज ने गायकवाड़ को सिर से 6 फीट ऊंची लगातार 4 बाउंसर फेंकी. पाकिस्तानी अंपायरों (जावेद अख्तर और खिजर हयात) ने एक भी गेंद को ‘वाइड’ करार नहीं दिया.

ड्रेसिंग रूम में बैठे बेदी का खून खौल उठा. अंपायरों की सरेआम बेईमानी देखकर वह तुरंत मैदान में उतरे. उन्होंने विरोध दर्ज कराया और अपने दोनों बल्लेबाजों को वापस पवेलियन बुला लिया.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यह किसी कप्तान द्वारा मैच छोड़ने की पहली घटना थी. इस फैसले के कारण भारत मैच हार गया और सीरीज गंवा बैठा, बेदी से कप्तानी भी छीन ली गई; लेकिन उनके इस कदम ने आईसीसी को हिलाकर रख दिया. इसके बाद साहीवाल मैदान पर हमेशा के लिए बैन लगा दिया गया और आगे चलकर ‘न्यूट्रल अंपायर्स’ की शुरुआत हुई.

उंगलियां मजबूत करने के लिए धोते थे कपड़े, कंचों से सीखा सटीक निशाना

बिशन सिंह बेदी की घातक स्पिन के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और देसी नुस्खे थे. शुरुआती दिनों में अपनी कलाई और उंगलियों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए बेदी खुद हाथ से कपड़े धोया करते थे. इसी रगड़ और मेहनत ने उनकी फिरकी को घातक बनाया. अमृतसर की गलियों में बचपन में कंचे (मार्बल्स) खेलने के शौक ने उन्हें एक जगह ध्यान केंद्रित करने में मदद की, जिसका फायदा उन्हें गेंद को सही टप्पे पर डालने में मिला.

बेदी के नाम फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 1560 विकेट लेने का ऑल-टाइम भारतीय रिकॉर्ड दर्ज है. इसके अलावा, भारत की पहली वनडे जीत में उन्होंने 12 ओवरों में बेहद कंजूसी से गेंदबाजी करते हुए 8 मेडन ओवर फेंके थे.

निजी जीवन ने भी बटोरीं सुर्खियां

बिशन सिंह बेदी जितने अपनी शानदार स्पिन गेंदबाजी के लिए जाने जाते थे, उतनी ही चर्चा उनकी पर्सनल लाइफ की भी होती थी. उनकी लव स्टोरी बेहद दिलचस्प थी और उन्होंने दो शादियां की थीं. उनकी पहली पत्नी ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली थीं, जिनका नाम ग्लेनिथ (Glenith) था.

दोनों की पहली मुलाकात 1967-68 में भारतीय टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मेलबर्न में एक पार्टी में हुई थी. बिशन सिंह बेदी को पहली ही नजर में उनसे प्यार हो गया था. धीरे-धीरे उनका रिश्ता आगे बढ़ा और फिर दोनों ने शादी कर ली.

शादी के एक साल बाद उनका एक बेटा हुआ, जिसका नाम गवास इंदर सिंह रखा गया. हालांकि, कुछ समय बाद दोनों के रिश्तों में खटास आने लगी और आपसी अनबन की वजह से उनका तलाक हो गया.

पहली पत्नी से तलाक के बाद की दूसरी शादी

ऑस्ट्रेलियाई पत्नी से अलग होने के बाद बिशन सिंह बेदी ने अंजू नाम की महिला से दूसरी शादी की. उनका भी एक बेटा हुआ, जिसका नाम अंगद बेदी है. अंगद बॉलीवुड के जाने-माने मॉडल और एक्टर हैं. अंगद अपने पिता के बेहद करीब थे और अक्सर सोशल मीडिया पर उनके साथ तस्वीरें शेयर करते रहते थे. बिशन सिंह बेदी के अपनी बहू और एक्ट्रेस नेहा धूपिया के साथ भी बहुत अच्छे संबंध थे.

बिशन सिंह बेदी अब इस दुनिया में नहीं रहे, अक्टूबर 2023 में उनका निधन हो गया. लेकिन भारतीय क्रिकेट में ईमानदारी, निडरता और स्वाभिमान का जो मानक उन्होंने स्थापित किया, वह आज भी हर क्रिकेट प्रेमी के दिल में जिंदा है. भारतीय क्रिकेट में उनके ऐतिहासिक योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा.

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