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Jamui Molestation Case: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यालय ने ही कर दी पीड़िता की तस्वीर शेयर; FIR दर्ज, तेजस्वी यादव ने उठाये सवाल

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक कर्मचारी द्वारा जमुई यौन उत्पीड़न मामले में नाबालिग पीड़िता के परिवार की तस्वीर पोस्ट करने के बाद राजनीतिक विवाद ने जन्म ले लिया है.

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Last Updated: September 26, 2026 12:55:06 IST

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Bihar News: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जमुई यौन उत्पीड़न मामले में नाबालिग पीड़िता के परिवार की तस्वीर पोस्ट होने के बाद हंगामा खड़ा हो गया. 

इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. बाद में हटाई गई इस तस्वीर ने बिहार में राजनीतिक बहस छेड़ दी है. 

FIR में CMO के एक कर्मचारी का नाम दर्ज 

खबरों के मुताबिक, मुख्यमंत्री कार्यालय के स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद के खिलाफ सचिवालय पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है. उन पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सोशल मीडिया अकाउंट से पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर पोस्ट करने का आरोप है. खबरों में कहा गया है कि बाद में तस्वीर को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया था. इस मामले ने यौन अपराधों के शिकार बच्चों की पहचान उजागर करने से संबंधित कानूनी प्रतिबंधों पर फिर से ध्यान दिलाया है. खबरों के अनुसार, इस तस्वीर से जुड़े मामले में POCSO अधिनियम के प्रावधानों के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं को भी लागू किया गया है.

RJD ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बनाया निशाना

RJD नेता और बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव द्वारा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर नाबालिग की पहचान उजागर करके POCSO अधिनियम का उल्लंघन करने का आरोप लगाने के बाद यह तस्वीर राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन गई. आरजेडी सांसद मीसा भारती ने भी तस्वीर खींचे जाने की परिस्थितियों पर सवाल उठाए और कार्रवाई की मांग की. मुख्यमंत्री ने पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की और उन्हें शीघ्र न्याय और मामले में आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने का आश्वासन दिया. बाद में मुलाकात की तस्वीर उनके सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दी गई.

जमुई में यौन उत्पीड़न की घटना से मचा बवाल 

विवाद की शुरुआत 19 सितंबर को हुई, जब जमुई में कोचिंग क्लास से लौट रही कक्षा 10 की एक लड़की और एक लड़के को कथित तौर पर कुछ युवकों ने रोक लिया. लड़की के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न किया गया, जबकि लड़के को उससे अलग कर दिया गया. घटना के वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की और पॉक्सो अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज की गई. खबरों के अनुसार, इस मामले में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

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Bihar News: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर जमुई यौन उत्पीड़न मामले में नाबालिग पीड़िता के परिवार की तस्वीर पोस्ट होने के बाद हंगामा खड़ा हो गया. 

इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. बाद में हटाई गई इस तस्वीर ने बिहार में राजनीतिक बहस छेड़ दी है. 

FIR में CMO के एक कर्मचारी का नाम दर्ज 

खबरों के मुताबिक, मुख्यमंत्री कार्यालय के स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद के खिलाफ सचिवालय पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है. उन पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सोशल मीडिया अकाउंट से पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर पोस्ट करने का आरोप है. खबरों में कहा गया है कि बाद में तस्वीर को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया था. इस मामले ने यौन अपराधों के शिकार बच्चों की पहचान उजागर करने से संबंधित कानूनी प्रतिबंधों पर फिर से ध्यान दिलाया है. खबरों के अनुसार, इस तस्वीर से जुड़े मामले में POCSO अधिनियम के प्रावधानों के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं को भी लागू किया गया है.

RJD ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बनाया निशाना

RJD नेता और बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव द्वारा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर नाबालिग की पहचान उजागर करके POCSO अधिनियम का उल्लंघन करने का आरोप लगाने के बाद यह तस्वीर राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन गई. आरजेडी सांसद मीसा भारती ने भी तस्वीर खींचे जाने की परिस्थितियों पर सवाल उठाए और कार्रवाई की मांग की. मुख्यमंत्री ने पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की और उन्हें शीघ्र न्याय और मामले में आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने का आश्वासन दिया. बाद में मुलाकात की तस्वीर उनके सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दी गई.

जमुई में यौन उत्पीड़न की घटना से मचा बवाल 

विवाद की शुरुआत 19 सितंबर को हुई, जब जमुई में कोचिंग क्लास से लौट रही कक्षा 10 की एक लड़की और एक लड़के को कथित तौर पर कुछ युवकों ने रोक लिया. लड़की के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न किया गया, जबकि लड़के को उससे अलग कर दिया गया. घटना के वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की और पॉक्सो अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज की गई. खबरों के अनुसार, इस मामले में सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

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