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Home > राज्य > बिहार > महिला के ऊपर लेटकर बंद कर दिया मुंह, पटना हाई कोर्ट ने रेप की कोशिश मानने से किया इनकार, 13 साल पुराने केस में बदली सजा

महिला के ऊपर लेटकर बंद कर दिया मुंह, पटना हाई कोर्ट ने रेप की कोशिश मानने से किया इनकार, 13 साल पुराने केस में बदली सजा

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि उपलब्ध सबूत इस घटना को रेप की कोशिश साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे, जिसके कारण ये रेप की कोशिश नहीं माना जाएगा.

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Last Updated: October 17, 2026 16:42:34 IST

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Patna High Court: एक महिला अपने बच्चों के साथ घर में सो रही थी. सुबह का वक्त था, तभी एक व्यक्ति कथित तौर पर घर में दाखिल हुआ. उसने कमरे में जल रहा लैंप बुझाया, महिला के ऊपर लेट गया और उसका मुंह बंद कर दिया. महिला ने मदद के लिए शोर मचाया तो आसपास के ग्रामीण मौके पर जुट गए और आरोपी को पकड़ लिया. इस घटना के बाद मामला अदालत पहुंचा और आरोपी को जेल की सजा सुनाई गई लेकिन सालों बाद पटना हाई कोर्ट में अपील की सुनवाई के दौरान यह सवाल उठा कि क्या उपलब्ध सबूत इस घटना को रेप की कोशिश साबित करने के लिए पर्याप्त थे?

2010 की घटना

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 8 फरवरी 2010 की है. अभियोजन पक्ष ने बताया कि महिला विधवा थी और अपने बच्चों के साथ घर में सो रही थी. इसी दौरान आरोपी के घर में घुसने और महिला के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करने का आरोप लगा. महिला के चिल्लाने पर ग्रामीण इकट्ठा हुए और आरोपी को पकड़ लिया. मामले में निचली अदालत ने 29 जुलाई 2013 को आरोपी को दोषी ठहराया. इसके बाद 1 अगस्त 2013 को उसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376/511 के तहत चार साल की जेल और धारा 448 के तहत छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई. दोनों सजाएं एक साथ चलनी थीं.

हाई कोर्ट में उठे सवाल

आरोपी ने निचली अदालत के फैसले को पटना हाई कोर्ट में चुनौती दी. बचाव पक्ष ने दलील दी कि महिला के बयान में विरोधाभास हैं और उनकी पुष्टि करने के लिए पर्याप्त स्वतंत्र सबूत मौजूद नहीं हैं. यह भी कहा गया कि जिन ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़ने की बात कही थी, उनसे अदालत में पूछताछ नहीं की गई. हाई कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या घटना के सबूत रेप की कोशिश के अपराध को साबित करते हैं या मामला IPC की धारा 354 के तहत महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमले या आपराधिक बल प्रयोग की श्रेणी में आता है.

अदालत ने क्या कहा?

जस्टिस संदीप कुमार की एकल पीठ ने मामले के सबूतों की समीक्षा की. अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के अमन कुमार मामले में की गई टिप्पणियों का भी हवाला दिया. कोर्ट के मुताबिक, किसी घटना को रेप की कोशिश मानने के लिए यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी केवल तैयारी तक सीमित नहीं था बल्कि उसने ऐसा कदम उठाया था जो परिस्थितियों में बाधा न आने पर बलात्कार में बदल सकता था. अदालत ने कहा कि उपलब्ध सबूतों से यह साबित नहीं हुआ कि आरोपी ने खुद के या महिला के कपड़े उतारे थे. यानी उसने शारीरिक संबंध बनाने की दिशा में कोई कदम उठाया था. इसलिए यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त आधार नहीं था कि वह तैयारी के चरण से आगे बढ़ चुका था और उसने रेप की कोशिश की थी.

ये भी पढ़ें: दृश्यम देखकर रची साजिश, सोने की चेन के लिए दोस्त का कत्ल, ऐसे जाल में फंसे नाबालिग

13 साल बाद सजा में बदलाव

हाई कोर्ट ने मामले में घटना के बाद बीते लंबे समय, आरोपी के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड न होने और 13 साल से अधिक समय तक जमानत पर रहने के दौरान उसके आचरण को भी ध्यान में रखा. इसके बाद अदालत ने उसकी सजा में बदलाव करते हुए उसे उतनी अवधि तक सीमित कर दिया, जितनी वह पहले ही जेल में काट चुका था.

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Patna High Court: एक महिला अपने बच्चों के साथ घर में सो रही थी. सुबह का वक्त था, तभी एक व्यक्ति कथित तौर पर घर में दाखिल हुआ. उसने कमरे में जल रहा लैंप बुझाया, महिला के ऊपर लेट गया और उसका मुंह बंद कर दिया. महिला ने मदद के लिए शोर मचाया तो आसपास के ग्रामीण मौके पर जुट गए और आरोपी को पकड़ लिया. इस घटना के बाद मामला अदालत पहुंचा और आरोपी को जेल की सजा सुनाई गई लेकिन सालों बाद पटना हाई कोर्ट में अपील की सुनवाई के दौरान यह सवाल उठा कि क्या उपलब्ध सबूत इस घटना को रेप की कोशिश साबित करने के लिए पर्याप्त थे?

2010 की घटना

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 8 फरवरी 2010 की है. अभियोजन पक्ष ने बताया कि महिला विधवा थी और अपने बच्चों के साथ घर में सो रही थी. इसी दौरान आरोपी के घर में घुसने और महिला के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करने का आरोप लगा. महिला के चिल्लाने पर ग्रामीण इकट्ठा हुए और आरोपी को पकड़ लिया. मामले में निचली अदालत ने 29 जुलाई 2013 को आरोपी को दोषी ठहराया. इसके बाद 1 अगस्त 2013 को उसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376/511 के तहत चार साल की जेल और धारा 448 के तहत छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई. दोनों सजाएं एक साथ चलनी थीं.

हाई कोर्ट में उठे सवाल

आरोपी ने निचली अदालत के फैसले को पटना हाई कोर्ट में चुनौती दी. बचाव पक्ष ने दलील दी कि महिला के बयान में विरोधाभास हैं और उनकी पुष्टि करने के लिए पर्याप्त स्वतंत्र सबूत मौजूद नहीं हैं. यह भी कहा गया कि जिन ग्रामीणों ने आरोपी को पकड़ने की बात कही थी, उनसे अदालत में पूछताछ नहीं की गई. हाई कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या घटना के सबूत रेप की कोशिश के अपराध को साबित करते हैं या मामला IPC की धारा 354 के तहत महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमले या आपराधिक बल प्रयोग की श्रेणी में आता है.

अदालत ने क्या कहा?

जस्टिस संदीप कुमार की एकल पीठ ने मामले के सबूतों की समीक्षा की. अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के अमन कुमार मामले में की गई टिप्पणियों का भी हवाला दिया. कोर्ट के मुताबिक, किसी घटना को रेप की कोशिश मानने के लिए यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी केवल तैयारी तक सीमित नहीं था बल्कि उसने ऐसा कदम उठाया था जो परिस्थितियों में बाधा न आने पर बलात्कार में बदल सकता था. अदालत ने कहा कि उपलब्ध सबूतों से यह साबित नहीं हुआ कि आरोपी ने खुद के या महिला के कपड़े उतारे थे. यानी उसने शारीरिक संबंध बनाने की दिशा में कोई कदम उठाया था. इसलिए यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त आधार नहीं था कि वह तैयारी के चरण से आगे बढ़ चुका था और उसने रेप की कोशिश की थी.

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13 साल बाद सजा में बदलाव

हाई कोर्ट ने मामले में घटना के बाद बीते लंबे समय, आरोपी के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड न होने और 13 साल से अधिक समय तक जमानत पर रहने के दौरान उसके आचरण को भी ध्यान में रखा. इसके बाद अदालत ने उसकी सजा में बदलाव करते हुए उसे उतनी अवधि तक सीमित कर दिया, जितनी वह पहले ही जेल में काट चुका था.

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