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इंजीनियर राशिद को पटियाला हाउस कोर्ट से बड़ा झटका, अंतरिम जमानत याचिका की खारिज

Engineer Rashid Bail Rejected: पटियाला हाउस कोर्ट ने शुक्रवार को बारामूला सांसद इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत खारिज कर दी है. आरोपी ने अपने बीमार पिता को देखने के लिए जमानत याचिका दाखिल की थी. राशिद के पिता लंबे समय से बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं.

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Last Updated: April 24, 2026 16:53:26 IST

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Engineer Rashid Interim Bail Rejected: दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने शुक्रवार को बारामूला सांसद इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत खारिज कर दी है. आरोपी ने अपने बीमार पिता को देखने के लिए जमानत याचिका दाखिल की थी. राशिद के पिता लंबे समय से बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं.
 
एडिशनल सेशंस जज प्रशांत शर्मा ने 24 अप्रैल को फैसला सुनाने का आदेश दिया था, जिसके बाद उन्होंने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी.
 
 

इंजीनियर राशिद ने पिता की बीमारी को लेकर मांगी थी जमानत

इंजीनियर राशिद ने एक याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया है कि उनके पिता बीमार हैं और फ़िलहाल वेंटिलेटर पर हैं. सुनवाई के दौरान, NIA की ओर से पेश वकील ने कहा कि उन्हें कस्टडी पैरोल पर रिहा किया जा सकता है. इससे पहले, अदालत ने इंजीनियर राशिद को हिरासत में रहते हुए संसद सत्र में हिस्सा लेने की इजाज़त दी थी. 
 
अदालत ने इंजीनियर राशिद को पूरे संसद सत्र में शामिल होने की अनुमति दी थी, जो 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक चला था. नवंबर 2025 में भी, अदालत ने राशिद को संसद सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी. इंजीनियर राशिद को सितंबर 2025 में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में अपना वोट डालने की भी अनुमति दी गई थी.
 

2016 में NIA ने गिरफ़्तार किया

इंजीनियर राशिद ने 2024 के लोकसभा चुनावों में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को लगभग एक लाख वोटों के अंतर से हराकर जीत हासिल की. ​​इंजीनियर राशिद को 2016 में NIA ने गिरफ़्तार किया था. 16 मार्च, 2022 को पटियाला हाउस कोर्ट ने हाफ़िज़ सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह, मसर्रत आलम, इंजीनियर राशिद, ज़हूर अहमद वटाली, बिट्टा कराटे, आफ़ताब अहमद शाह, अल्ताफ़ अहमद शाह, नईम खान, बशीर अहमद भट्ट (उर्फ़ पीर सैफ़ुल्लाह) और अन्य सह-आरोपियों के ख़िलाफ़ आरोप तय करने का आदेश दिया. NIA के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा, हिज़्बुल मुजाहिदीन, JKLF और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों ने पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर में नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले और हिंसक वारदातें कीं.
 
 
अल पार्टीज़ हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की स्थापना 1993 में अलगाववादी गतिविधियां चलाने के लिए की गई थी. NIA के अनुसार, हाफ़िज़ सईद ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेताओं के साथ मिलकर आतंकवादी गतिविधियों को वित्तपोषित करने और उन्हें अंजाम देने के लिए ‘हवाला’ प्रणाली और अन्य माध्यमों से धन के हस्तांतरण की सुविधा प्रदान की. इस धन का उपयोग घाटी में अशांति फैलाने, सुरक्षा बलों पर हमले करने, स्कूलों में आग लगाने और सरकारी संपत्ति को नुक़सान पहुँचाने के लिए किया गया था. यह जानकारी मिलने पर, NIA ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120B, 121 और 121A, तथा UAPA की धारा 13, 16, 17, 18, 20, 38, 39 और 40 के तहत एक मामला दर्ज किया.

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Last Updated: April 24, 2026 16:53:26 IST

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Engineer Rashid Interim Bail Rejected: दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने शुक्रवार को बारामूला सांसद इंजीनियर राशिद की अंतरिम जमानत खारिज कर दी है. आरोपी ने अपने बीमार पिता को देखने के लिए जमानत याचिका दाखिल की थी. राशिद के पिता लंबे समय से बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं.
 
एडिशनल सेशंस जज प्रशांत शर्मा ने 24 अप्रैल को फैसला सुनाने का आदेश दिया था, जिसके बाद उन्होंने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी.
 
 

इंजीनियर राशिद ने पिता की बीमारी को लेकर मांगी थी जमानत

इंजीनियर राशिद ने एक याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया है कि उनके पिता बीमार हैं और फ़िलहाल वेंटिलेटर पर हैं. सुनवाई के दौरान, NIA की ओर से पेश वकील ने कहा कि उन्हें कस्टडी पैरोल पर रिहा किया जा सकता है. इससे पहले, अदालत ने इंजीनियर राशिद को हिरासत में रहते हुए संसद सत्र में हिस्सा लेने की इजाज़त दी थी. 
 
अदालत ने इंजीनियर राशिद को पूरे संसद सत्र में शामिल होने की अनुमति दी थी, जो 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक चला था. नवंबर 2025 में भी, अदालत ने राशिद को संसद सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी. इंजीनियर राशिद को सितंबर 2025 में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में अपना वोट डालने की भी अनुमति दी गई थी.
 

2016 में NIA ने गिरफ़्तार किया

इंजीनियर राशिद ने 2024 के लोकसभा चुनावों में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को लगभग एक लाख वोटों के अंतर से हराकर जीत हासिल की. ​​इंजीनियर राशिद को 2016 में NIA ने गिरफ़्तार किया था. 16 मार्च, 2022 को पटियाला हाउस कोर्ट ने हाफ़िज़ सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह, मसर्रत आलम, इंजीनियर राशिद, ज़हूर अहमद वटाली, बिट्टा कराटे, आफ़ताब अहमद शाह, अल्ताफ़ अहमद शाह, नईम खान, बशीर अहमद भट्ट (उर्फ़ पीर सैफ़ुल्लाह) और अन्य सह-आरोपियों के ख़िलाफ़ आरोप तय करने का आदेश दिया. NIA के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा, हिज़्बुल मुजाहिदीन, JKLF और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों ने पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर में नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले और हिंसक वारदातें कीं.
 
 
अल पार्टीज़ हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की स्थापना 1993 में अलगाववादी गतिविधियां चलाने के लिए की गई थी. NIA के अनुसार, हाफ़िज़ सईद ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेताओं के साथ मिलकर आतंकवादी गतिविधियों को वित्तपोषित करने और उन्हें अंजाम देने के लिए ‘हवाला’ प्रणाली और अन्य माध्यमों से धन के हस्तांतरण की सुविधा प्रदान की. इस धन का उपयोग घाटी में अशांति फैलाने, सुरक्षा बलों पर हमले करने, स्कूलों में आग लगाने और सरकारी संपत्ति को नुक़सान पहुँचाने के लिए किया गया था. यह जानकारी मिलने पर, NIA ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120B, 121 और 121A, तथा UAPA की धारा 13, 16, 17, 18, 20, 38, 39 और 40 के तहत एक मामला दर्ज किया.

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