Rajasthan News: डीडवाना-कुचामन जिले में मारोठ थाना इलाके के भीमपुरा गांव के पास हुए जानलेवा हमले की घटना के 26 दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. 20 अप्रैल से नावां उपखंड अधिकारी कार्यालय के सामने शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना आज 11वें दिन भी जारी रहा. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इतने दिनों तक शांतिपूर्ण तरीके से विरोध के बावजूद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया.
धरने के दौरान गुरुवार को मिंडा पंचायत के सैकड़ों ग्रामीण समर्थन में पहुंचे, वहीं आरएलपी के कई कार्यकर्ताओं ने भी भाग लेकर आंदोलन को समर्थन दिया. प्रदर्शनकारियों ने अपने उद्बोधन में कहा कि 11 दिनों से वे शांति और शालीनता के साथ न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग
इधर, पीड़ित शिशपाल जाट द्वारा न्याय नहीं मिलने पर राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग करने से मामला और संवेदनशील हो गया है. ग्रामीणों का आरोप है कि हमलावर खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ित परिवार व गवाहों को धमका रहे हैं. साथ ही आरोप लगाया जा रहा है कि आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते पुलिस पर दबाव है और कार्रवाई में देरी हो रही है.
विरोध के तहत 28 अप्रैल से सात लोगों सीताराम लुहाच, बजरंग लाल लुहाच, भानु प्रताप जांगू, महेंद्र कुमार कस्वा, पूरणमल नेटवाल, रामकुमार जांगू और कमल किशोर जांगू ने क्रमिक अनशन शुरू कर रखा है. धरने में विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के कई प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिससे आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है.
गिरफ्तारी के लिए तीन अलग-अलग टीमें गठित
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं, जो लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं. इसके अलावा साइबर टीम भी तकनीकी आधार पर आरोपियों की लोकेशन और गतिविधियों का पता लगाने में जुटी है. अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
क्या है पूरा मामला?
4 अप्रैल 2026 की रात करीब 9:15 बजे भीमपुरा निवासी शिशपाल जाट अपने साथी रामकुमार के साथ वाहन से घर लौट रहे थे. रास्ते में कुछ लोगों ने उनकी गाड़ी रुकवाकर दोनों को नीचे उतार लिया और शिशपाल पर धारदार हथियारों से जानलेवा हमला कर दिया. इस हमले में उसके सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं.
हमलावर उसे मृत समझकर मौके से फरार हो गए. घटना के बाद 5 अप्रैल को मारोठ थाने में मामला दर्ज कराया गया, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है. इसी के विरोध में ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने उपखंड अधिकारी कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया, जो अब 11वें दिन में प्रवेश कर चुका है.
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