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UP Birth Certificate Scam: SDM ने उड़ा दीं कानून की धज्जियां, 125 दिन में पैदा करवा दीं 2 सगी बहनें, ये है मामला

UP Birth Certificate Scam: रायबरेली की लालगंज तहसील में एक पिता की दो बेटियों के जन्म प्रमाण पत्र महज 125 दिनों के अंतर पर जारी कर दिए गए। एसडीएम की इस बड़ी लापरवाही ने प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानें क्या है पूरा फर्जीवाड़ा

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Last Updated: April 22, 2026 18:03:11 IST

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UP Birth Certificate Scam: उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अमले में अजूबों की कमी नहीं है, लेकिन रायबरेली की लालगंज तहसील के साहब ने तो ‘इतिहास’ ही रच दिया है. जिस जीव विज्ञान को पूरी दुनिया मानती है, उसे एसडीएम साहब की एक स्याही ने धता बता दिया. साहब ने एक ही पिता की दो बेटियों के जन्म प्रमाण पत्र जारी करने का ऐसा ‘क्रांतिकारी’ आदेश दिया है, जिसे सुनकर डॉक्टर भी अपना सिर पकड़ लें और कुदरत भी सोच में पड़ जाए. महज 125 दिनों (4 महीने 5 दिन) के फासले पर दो सगी बहनों का जन्म दिखाकर साहब ने मुहर लगा दी है.

क्या है पूरा मामला?

लालगंज तहसील के ग्राम छतोना (भोजपुर) निवासी सद्दीक अहमद ने अपनी दो बेटियों के वजूद को सरकारी कागजों पर दर्ज कराने के लिए आवेदन किया. जिसमें बड़ी बेटी (साबरीन खातून) की जन्मतिथि 18 फरवरी 2002 दर्ज कराई तो वहीं छोटी बेटी (नाजरीन खातून) की जन्मतिथि 23 जून 2002 दर्ज कराई. कानून कहता है कि जन्म के वर्षों बाद प्रमाण पत्र के लिए मजिस्ट्रेट की जांच जरूरी है, लेकिन यहां तो ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ वाला हाल दिखा. एसडीएम लालगंज ने न दिन देखा, न महीना, बस आवेदन पर दस्तखत की ‘मशीन’ चला दी. बिना यह सोचे कि क्या चार महीने के अंतराल में दो सगी बहनों का जन्म जैविक रूप से संभव है?

पहले भी हो चुके हैं कई मामले

यह लापरवाही कोई मामूली चूक नहीं, बल्कि एक गहरे जख्म पर नमक छिड़कने जैसा है. इसी जनपद से पूर्व में आतंकियों तक के जन्म प्रमाण पत्र जारी होने से देश की सुरक्षा एजेंसियां हिल गई थीं. सलोन तहसील में 50 हजार से ज्यादा फर्जी प्रमाण पत्रों का अंबार मिला था, जिसकी जांच आज भी एनआईए (NIA) जैसी एजेंसियां कर रही हैं.  चर्चा है कि तहसील परिसर में दलालों का एक ऐसा ‘कॉर्कस’ सक्रिय है, जो फाइल में नोटों की गर्मी भरता है और ऊपर बैठे साहब को हकीकत ठंडी लगने लगती है.

नीचे से ऊपर तक के अधिकारियों पर शक

सूत्रों की मानें तो इस खेल में पंचायत सचिव से लेकर खंड विकास अधिकारी (सरेनी) तक की भूमिका संदिग्ध है. रिपोर्ट नीचे से तैयार होकर आई और साहब ने उसे ‘ब्रह्म वाक्य’ मान लिया. बिना स्थलीय जांच किए ही नीचे की गलत रिपोर्ट को सही बताकर आगे बढ़ा दिया गया.  न तो पूर्व की शिकायतों का जिक्र हुआ और न ही उम्र के इस अजीबो गरीब अंतर पर किसी की नजर गई.

बातों में टालने लगे मामला

जब इस फर्जीवाड़े की गूंज गलियारों में सुनाई देने लगी, तो एसडीएम लालगंज मिथिलेश कुमार त्रिपाठी ने वही रटा रटाया जवाब दिया— “मामला संज्ञान में आया है, बीडीओ को जांच दी गई है.”बड़ा सवाल: जब आदेश जारी हो रहा था, तब साहब की आंखें किस फाइल में दफन थीं? क्या बिना पढ़े आदेश देना ही सुशासन है?

अब होगी सख्त कार्यवाई

ADM प्रशासन सिद्धार्थ ने इसे गंभीर मामला मानते हुए सख्त कार्रवाई की बात कही है. लेकिन जनता पूछ रही है कि क्या कार्रवाई सिर्फ छोटे मुलाजिमों पर होगी या उन ‘हाकिमों’ की कलम भी नपेगी, जिन्होंने कुदरत के कानून का कत्ल किया है? रायबरेली में अब सरेआम चर्चा है कि अगर आपके पास ‘जुगाड़’ है, तो आप इतिहास ही नहीं, अपनी पैदाइश की तारीख और कुदरत के नियम भी बदलवा सकते हैं.

Disclaimer: The article is a part of syndicated feed. Except for the headline, the content is not edited. Liability lies with the syndication partner for factual accuracy.

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UP Birth Certificate Scam: उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक अमले में अजूबों की कमी नहीं है, लेकिन रायबरेली की लालगंज तहसील के साहब ने तो ‘इतिहास’ ही रच दिया है. जिस जीव विज्ञान को पूरी दुनिया मानती है, उसे एसडीएम साहब की एक स्याही ने धता बता दिया. साहब ने एक ही पिता की दो बेटियों के जन्म प्रमाण पत्र जारी करने का ऐसा ‘क्रांतिकारी’ आदेश दिया है, जिसे सुनकर डॉक्टर भी अपना सिर पकड़ लें और कुदरत भी सोच में पड़ जाए. महज 125 दिनों (4 महीने 5 दिन) के फासले पर दो सगी बहनों का जन्म दिखाकर साहब ने मुहर लगा दी है.

क्या है पूरा मामला?

लालगंज तहसील के ग्राम छतोना (भोजपुर) निवासी सद्दीक अहमद ने अपनी दो बेटियों के वजूद को सरकारी कागजों पर दर्ज कराने के लिए आवेदन किया. जिसमें बड़ी बेटी (साबरीन खातून) की जन्मतिथि 18 फरवरी 2002 दर्ज कराई तो वहीं छोटी बेटी (नाजरीन खातून) की जन्मतिथि 23 जून 2002 दर्ज कराई. कानून कहता है कि जन्म के वर्षों बाद प्रमाण पत्र के लिए मजिस्ट्रेट की जांच जरूरी है, लेकिन यहां तो ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ वाला हाल दिखा. एसडीएम लालगंज ने न दिन देखा, न महीना, बस आवेदन पर दस्तखत की ‘मशीन’ चला दी. बिना यह सोचे कि क्या चार महीने के अंतराल में दो सगी बहनों का जन्म जैविक रूप से संभव है?

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यह लापरवाही कोई मामूली चूक नहीं, बल्कि एक गहरे जख्म पर नमक छिड़कने जैसा है. इसी जनपद से पूर्व में आतंकियों तक के जन्म प्रमाण पत्र जारी होने से देश की सुरक्षा एजेंसियां हिल गई थीं. सलोन तहसील में 50 हजार से ज्यादा फर्जी प्रमाण पत्रों का अंबार मिला था, जिसकी जांच आज भी एनआईए (NIA) जैसी एजेंसियां कर रही हैं.  चर्चा है कि तहसील परिसर में दलालों का एक ऐसा ‘कॉर्कस’ सक्रिय है, जो फाइल में नोटों की गर्मी भरता है और ऊपर बैठे साहब को हकीकत ठंडी लगने लगती है.

नीचे से ऊपर तक के अधिकारियों पर शक

सूत्रों की मानें तो इस खेल में पंचायत सचिव से लेकर खंड विकास अधिकारी (सरेनी) तक की भूमिका संदिग्ध है. रिपोर्ट नीचे से तैयार होकर आई और साहब ने उसे ‘ब्रह्म वाक्य’ मान लिया. बिना स्थलीय जांच किए ही नीचे की गलत रिपोर्ट को सही बताकर आगे बढ़ा दिया गया.  न तो पूर्व की शिकायतों का जिक्र हुआ और न ही उम्र के इस अजीबो गरीब अंतर पर किसी की नजर गई.

बातों में टालने लगे मामला

जब इस फर्जीवाड़े की गूंज गलियारों में सुनाई देने लगी, तो एसडीएम लालगंज मिथिलेश कुमार त्रिपाठी ने वही रटा रटाया जवाब दिया— “मामला संज्ञान में आया है, बीडीओ को जांच दी गई है.”बड़ा सवाल: जब आदेश जारी हो रहा था, तब साहब की आंखें किस फाइल में दफन थीं? क्या बिना पढ़े आदेश देना ही सुशासन है?

अब होगी सख्त कार्यवाई

ADM प्रशासन सिद्धार्थ ने इसे गंभीर मामला मानते हुए सख्त कार्रवाई की बात कही है. लेकिन जनता पूछ रही है कि क्या कार्रवाई सिर्फ छोटे मुलाजिमों पर होगी या उन ‘हाकिमों’ की कलम भी नपेगी, जिन्होंने कुदरत के कानून का कत्ल किया है? रायबरेली में अब सरेआम चर्चा है कि अगर आपके पास ‘जुगाड़’ है, तो आप इतिहास ही नहीं, अपनी पैदाइश की तारीख और कुदरत के नियम भी बदलवा सकते हैं.

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