Former IAS Officer Divya Mittal: लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक नया नाम जुड़ गया है. पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है. उनकी पार्टी का नाम ‘जन नीति भारत’ है और उन्होंने घोषणा की है कि पार्टी आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारेगी. दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि उनकी राजनीति का केंद्र आम नागरिक होंगे और सरकारी फैसलों में जनता की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा.
करीब 13 साल तक प्रशासनिक सेवा में रहने के बाद दिव्या मित्तल ने अगस्त 2026 में IAS से इस्तीफा दिया था. सितंबर में उन्होंने राजनीति में आने की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन उस समय किसी स्थापित राजनीतिक दल में शामिल होने की बात नहीं कही थी. अब अपनी पार्टी की घोषणा के साथ उन्होंने साफ कर दिया है कि वह उत्तर प्रदेश में स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के रूप में आगे बढ़ना चाहती हैं.
क्या है ‘जन नीति भारत’ का एजेंडा?
दिव्या मित्तल ने अपनी पार्टी के विचारों को तीन प्रमुख वचनों के रूप में सामने रखा है. उनका कहना है कि शासन व्यवस्था में जनता की आवाज केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि पूरे कार्यकाल में सुनी जानी चाहिए.
पहला वचन: नीति बनाने में जनता की भागीदारी
दिव्या मित्तल के मुताबिक, सरकारी नीतियां बनाते समय आम लोगों की जरूरतों और सुझावों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका विचार है कि नागरिकों को केवल सरकारी फैसलों का लाभार्थी नहीं, बल्कि नीतियां तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा भी बनाया जाए। पार्टी का संदेश है—’जन से नीति, नीति से भारत’
दूसरा वचन: पहचान नहीं, जरूरत के आधार पर फैसले
उनकी ओर से रखे गए दूसरे सिद्धांत में जरूरत के आधार पर निर्णय लेने और फैसलों में समानता बनाए रखने पर जोर है. दिव्या मित्तल का कहना है कि सरकारी नीतियों का उद्देश्य लोगों की वास्तविक समस्याओं का समाधान होना चाहिए. इस विचार को उन्होंने ‘जरूरत से फैसला, फैसले में बराबरी’ के संदेश के साथ पेश किया.
तीसरा वचन: जनता के प्रति जवाबदेही
तीसरे वचन में सरकार और जनप्रतिनिधियों के कामकाज का हिसाब जनता को देने की बात कही गई है। पार्टी के अनुसार, जवाबदेही केवल चुनाव के समय नहीं होनी चाहिए, बल्कि पूरे पांच साल तक बनी रहनी चाहिए। इसके लिए दिव्या मित्तल ने ‘जनता को हिसाब, हिसाब से सुधार’ का संदेश दिया है.
ये पार्टी की ओर से घोषित प्राथमिकताएं हैं इन्हें जमीन पर लागू करने के लिए कौन-सा संगठनात्मक ढांचा, कानून या निगरानी व्यवस्था बनाई जाएगी, इस बारे में विस्तृत जानकारी अभी सामने आना बाकी है.
कौन हैं दिव्या मित्तल?
दिव्या मित्तल 2013 बैच की IAS अधिकारी रही हैं। उन्होंने IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और IIM बेंगलुरु से MBA किया। सिविल सेवा में आने से पहले वह लंदन में वित्तीय क्षेत्र में काम कर चुकी हैं। UPSC परीक्षा पास करने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला और उन्होंने राज्य के अलग-अलग जिलों तथा विभागों में जिम्मेदारियां संभालीं.
अपने प्रशासनिक करियर के दौरान दिव्या मित्तल संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया में जिलाधिकारी के पद पर काम कर चुकी हैं। इसके अलावा वह राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में भी तैनात रहीं। मिर्जापुर में उनके कार्यकाल के दौरान दूरस्थ पहाड़ी गांव लहुरियादह तक पाइप से पेयजल पहुंचाने के प्रयासों को लेकर उन्हें व्यापक पहचान मिली थी.
IAS की नौकरी छोड़ राजनीति में क्यों आईं?
दिव्या मित्तल ने अगस्त में प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था कि सरकारी व्यवस्था में कई बार लोगों की समस्याएं फाइलों और प्रक्रियाओं के बीच अटक जाती हैं। उनके अनुसार, प्रशासन में काम करते हुए उन्होंने ऐसे मामले देखे, जहां योजनाओं और संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया.
सितंबर में राजनीति में प्रवेश की बात करते हुए उन्होंने कहा था कि वह लोगों की समस्याओं को सीधे उठाना चाहती हैं। उस समय उन्होंने उत्तर प्रदेश को अपनी ‘कर्मभूमि’ बताया और जनता से जुड़ने का आह्वान किया था। अब नई पार्टी की घोषणा के साथ उनका अगला कदम स्पष्ट हो गया है.
हालांकि, उनके इस्तीफे और राजनीतिक फैसले के पीछे की सभी वजहों को किसी एक घटना से जोड़ना सही नहीं होगा। पार्टी के गठन के साथ उन्होंने जिस प्रशासनिक जवाबदेही और जनभागीदारी की बात कही है, वही फिलहाल उनके सार्वजनिक राजनीतिक संदेश का मुख्य आधार है.
घर-घर पहुंचने की रणनीति पर जोर
दिव्या मित्तल ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी बड़े विज्ञापन अभियानों के बजाय सीधे लोगों तक पहुंचने पर ध्यान देगी। उन्होंने समर्थकों से अपने गांवों और शहरों में पार्टी का संदेश पहुंचाने तथा अन्य लोगों को इस पहल से जोड़ने की अपील की है। उनका जोर ऐसी राजनीतिक प्रक्रिया पर है, जिसमें नागरिक अपनी समस्याएं सामने रख सकें और सरकारी कामकाज पर नजर बनाए रख सकें.
इस रणनीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पार्टी कितनी जल्दी स्थानीय स्तर पर संगठन खड़ा करती है, उम्मीदवारों का चयन कैसे करती है और अपने घोषित सिद्धांतों को ठोस कार्यक्रमों में कैसे बदलती है.
2027 के यूपी चुनाव में क्या होगी भूमिका?
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जन नीति भारत के गठन ने राजनीतिक विकल्पों की चर्चा में एक नया नाम जोड़ दिया है. दिव्या मित्तल ने चुनाव लड़ने की घोषणा तो कर दी है, लेकिन उनकी पार्टी का विस्तृत संगठनात्मक ढांचा, उम्मीदवारों की सूची और चुनावी क्षेत्रों से जुड़ी पूरी रणनीति अभी सामने आना बाकी है.
उनका प्रशासनिक अनुभव और मिर्जापुर में किए गए कामों से बनी सार्वजनिक पहचान राजनीतिक अभियान में भूमिका निभा सकती है। हालांकि, चुनाव में किसी नई पार्टी का प्रदर्शन केवल उसके संस्थापक की पहचान से तय नहीं होता. स्थानीय संगठन, उम्मीदवारों की स्वीकार्यता, चुनावी संसाधन और मतदाताओं की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होंगे.
फिलहाल दिव्या मित्तल ने अपना राजनीतिक रास्ता चुन लिया है. अब देखना होगा कि ‘जन नीति भारत’ जनता की भागीदारी और जवाबदेही के अपने वादों को किस तरह एक ठोस चुनावी कार्यक्रम में बदलती है और 2027 के विधानसभा चुनाव में किस स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराती है.