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मैं साउथ इंडियन हूं, लेकिन अवधी मेरी फेवरेट…लोकल भाषा में मरीज बताते हैं बीमारी तो लगता है अच्छा, गोंडा की डॉक्टर का वीडियो वायरल

Gonda viral video: उत्तर प्रदेश के गोंडा में तैनात दक्षिण भारतीय डॉक्टर को अवधी भाषा बेहद पसंद है. वायरल वीडियो में उन्होंने बताया कि मरीज जब अवधी में अपनी बीमारी बताते हैं तो उन्हें सुनना अच्छा लगता है. डॉक्टर का कहना है कि अवधी में हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता है और इसे जितना सीखें, उतना कम है.

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Last Updated: September 2, 2026 19:23:50 IST

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Gonda viral video: उत्तर प्रदेश के गोंडा में तैनात एक दक्षिण भारतीय डॉक्टर इन दिनों अपनी एक खास बात को लेकर चर्चा में हैं. दक्षिण भारत से होने के बावजूद उन्हें गोंडा की अवधी भाषा बेहद पसंद है. मरीज जब उनके पास इलाज के लिए आते हैं और अपनी बीमारी को अवधी के खास अंदाज में बताते हैं तो डॉक्टर को यह अनुभव काफी दिलचस्प लगता है. उनका कहना है कि अवधी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि अपने अलग शब्दों और अंदाज की वजह से एक अलग ही अनुभव देती है.

मरीजों की अवधी सुनकर आता है मजा

वायरल वीडियो में डॉक्टर बताती हैं कि वह साउथ इंडियन हैं, लेकिन उन्हें अवधी भाषा बहुत पसंद है. खासकर जब मरीज अपनी बीमारी या तकलीफ को अवधी में समझाते हैं तो उन्हें सुनना काफी अच्छा लगता है. उनके मुताबिक, मरीज जिस तरह से अपनी परेशानी को स्थानीय शब्दों और देसी अंदाज में बताते हैं, वह कई बार बेहद मजेदार भी होता है. डॉक्टर के लिए मरीजों की बात समझना इलाज का जरूरी हिस्सा है और इसी बहाने उन्हें अवधी सीखने का भी मौका मिल रहा है.

कभी लगता है अवधी समझ गईं, फिर सामने आ जाता है नया शब्द

डॉक्टर ने बताया कि कई बार उन्हें लगता है कि अब उन्होंने अवधी को काफी हद तक समझ लिया है. लेकिन तभी कोई नया मरीज आ जाता है और बीमारी बताने के लिए ऐसा शब्द इस्तेमाल करता है, जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं सुना होता. ऐसे में वह दोबारा सोचने लगती हैं कि आखिर मरीज कहना क्या चाहता है. यही अनुभव उनके लिए अवधी सीखने को और दिलचस्प बना देता है. डॉक्टर का कहना है कि अवधी भाषा में हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता है. एक ही तरह की परेशानी को अलग-अलग मरीज अपने स्थानीय अंदाज में अलग शब्दों से बताते हैं. इसलिए उन्हें लगता है कि अवधी को जितना सीखो, उतना कम है. उन्होंने बताया कि मरीजों के साथ बातचीत के दौरान वह लगातार नए शब्द सीख रही हैं. उनके लिए यह अनुभव इसलिए भी खास है क्योंकि इससे उन्हें स्थानीय लोगों को बेहतर तरीके से समझने और उनसे जुड़ने में मदद मिलती है.

स्थानीय भाषा ने बनाया डॉक्टर और मरीजों का रिश्ता खास

दक्षिण भारत से आने के बावजूद डॉक्टर का अवधी के प्रति लगाव यह भी दिखाता है कि स्थानीय भाषा लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का काम करती है. मरीज अपनी सहज भाषा में अपनी समस्या बता पाते हैं और डॉक्टर भी उनके शब्दों को समझने की कोशिश करती हैं. सोशल मीडिया पर डॉक्टर का यह अंदाज लोगों को पसंद आ रहा है. उनकी बातों में अवधी के प्रति उत्सुकता और स्थानीय संस्कृति को अपनाने की कोशिश साफ नजर आती है.

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Gonda viral video: उत्तर प्रदेश के गोंडा में तैनात एक दक्षिण भारतीय डॉक्टर इन दिनों अपनी एक खास बात को लेकर चर्चा में हैं. दक्षिण भारत से होने के बावजूद उन्हें गोंडा की अवधी भाषा बेहद पसंद है. मरीज जब उनके पास इलाज के लिए आते हैं और अपनी बीमारी को अवधी के खास अंदाज में बताते हैं तो डॉक्टर को यह अनुभव काफी दिलचस्प लगता है. उनका कहना है कि अवधी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि अपने अलग शब्दों और अंदाज की वजह से एक अलग ही अनुभव देती है.

मरीजों की अवधी सुनकर आता है मजा

वायरल वीडियो में डॉक्टर बताती हैं कि वह साउथ इंडियन हैं, लेकिन उन्हें अवधी भाषा बहुत पसंद है. खासकर जब मरीज अपनी बीमारी या तकलीफ को अवधी में समझाते हैं तो उन्हें सुनना काफी अच्छा लगता है. उनके मुताबिक, मरीज जिस तरह से अपनी परेशानी को स्थानीय शब्दों और देसी अंदाज में बताते हैं, वह कई बार बेहद मजेदार भी होता है. डॉक्टर के लिए मरीजों की बात समझना इलाज का जरूरी हिस्सा है और इसी बहाने उन्हें अवधी सीखने का भी मौका मिल रहा है.

कभी लगता है अवधी समझ गईं, फिर सामने आ जाता है नया शब्द

डॉक्टर ने बताया कि कई बार उन्हें लगता है कि अब उन्होंने अवधी को काफी हद तक समझ लिया है. लेकिन तभी कोई नया मरीज आ जाता है और बीमारी बताने के लिए ऐसा शब्द इस्तेमाल करता है, जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं सुना होता. ऐसे में वह दोबारा सोचने लगती हैं कि आखिर मरीज कहना क्या चाहता है. यही अनुभव उनके लिए अवधी सीखने को और दिलचस्प बना देता है. डॉक्टर का कहना है कि अवधी भाषा में हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता है. एक ही तरह की परेशानी को अलग-अलग मरीज अपने स्थानीय अंदाज में अलग शब्दों से बताते हैं. इसलिए उन्हें लगता है कि अवधी को जितना सीखो, उतना कम है. उन्होंने बताया कि मरीजों के साथ बातचीत के दौरान वह लगातार नए शब्द सीख रही हैं. उनके लिए यह अनुभव इसलिए भी खास है क्योंकि इससे उन्हें स्थानीय लोगों को बेहतर तरीके से समझने और उनसे जुड़ने में मदद मिलती है.

स्थानीय भाषा ने बनाया डॉक्टर और मरीजों का रिश्ता खास

दक्षिण भारत से आने के बावजूद डॉक्टर का अवधी के प्रति लगाव यह भी दिखाता है कि स्थानीय भाषा लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का काम करती है. मरीज अपनी सहज भाषा में अपनी समस्या बता पाते हैं और डॉक्टर भी उनके शब्दों को समझने की कोशिश करती हैं. सोशल मीडिया पर डॉक्टर का यह अंदाज लोगों को पसंद आ रहा है. उनकी बातों में अवधी के प्रति उत्सुकता और स्थानीय संस्कृति को अपनाने की कोशिश साफ नजर आती है.

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