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CGHS New Rules: अब आश्रित बेटों और भाइयों को भी जिंदगीभर मिलेगा इलाज, शादी और उम्र की सीमा खत्म; जानिए कैसे मिलेगा लाभ??

CGHS लाभार्थियों के लिए बड़ी राहत! अब गंभीर बीमारी से जूझ रहे आश्रित बेटों और भाइयों को भी उम्रभर मिलेगा इलाज, शादी के बाद भी सुविधा बंद नहीं होगी. क्या हैं नए बदलाव और कैसे मिलेगा लाभ?

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Last Updated: September 3, 2026 14:06:32 IST

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केंद्र सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सीजीएचएस (CGHS) और CS(MA) नियम, 1944 के तहत इलाज की सुविधाओं को लेकर एक बड़ा और राहत देने वाला फैसला लिया है. अब गंभीर या असाध्य बीमारी से जूझ रहे आश्रित बेटों और भाइयों के लिए उम्र और वैवाहिक स्थिति (शादी) की सीमा को खत्म कर दिया गया है.

मंत्रालय द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) के अनुसार, ये नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं.

क्या हैं नए बदलाव और किसे मिलेगा लाभ?

आजीवन स्वास्थ्य सुविधाएं: यदि कोई आश्रित बेटा या भाई किसी गंभीर या असाध्य बीमारी से पीड़ित है, तो उसे जीवनभर मेडिकल सुविधाएं मिलेंगी. नए नियमों के तहत, यदि गंभीर बीमारी या विकलांगता से पीड़ित आश्रित बेटा या भाई शादी भी कर लेता है, तो भी उसकी CGHS सुविधाएं बंद नहीं होंगी. हालांकि, शर्त यह है कि वह आर्थिक रूप से पूरी तरह अपने परिवार पर ही निर्भर हो और मेडिकल बोर्ड इसकी मंजूरी दे. यह छूट केवल पीड़ित बेटे या भाई को मिलेगी. उनकी पत्नी या बच्चों को इस योजना के तहत कवर नहीं किया जाएगा.

मौजूदा नियम क्या थे?

  • अविवाहित बेटा: सामान्य मामलों में 25 वर्ष की उम्र तक ही सीजीएचएस का लाभ मिलता है.
  • अविवाहित भाई: सामान्य परिस्थितियों में 18 वर्ष की उम्र तक ही पात्र होता है.
  • दिव्यांग बेटा/भाई: स्थायी रूप से दिव्यांग अविवाहित बेटे या भाई को बिना किसी उम्र सीमा के आजीवन यह सुविधा मिलती है.
  • बेटियां और बहनें: बेटियां और बहनें (चाहे वे अविवाहित हों, विधवा हों, तलाकशुदा हों या पति से अलग रह रही हों) पहले से ही नियमों के तहत इन सुविधाओं के लिए पात्र हैं.

किन बीमारियों को किया गया है शामिल?

यह राहत उन बीमारियों के लिए दी गई है जो शरीर को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं और व्यक्ति के काम करने या आजीविका कमाने की क्षमता को खत्म कर देती हैं. इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • कैंसर (अंतिम या गंभीर चरण)
  • गंभीर तंत्रिका विकार (Neurological Disorders)
  • अंग का पूरी तरह खराब होना (End-stage organ diseases), जिसमें लंबे समय तक इलाज या सहायता की जरूरत होती है
  • गंभीर जन्मजात या आनुवंशिक बीमारियां (Congenital/Genetic Disorders)
  • अन्य लंबी और शरीर को लाचार कर देने वाली गंभीर बीमारियां

पात्रता का फैसला कैसे होगा?

हर मामले की अलग से समीक्षा की जाएगी. इसमें बीमारी की गंभीरता, दैनिक जीवन पर असर और व्यक्ति की कमाई करने की क्षमता को देखा जाएगा.

क्षेत्रीय स्तर (Additional Directors/CGHS Regional HQ) पर बने मेडिकल बोर्ड इन मामलों की जांच और सिफारिश करेंगे. यदि कोई फैसले से असंतुष्ट है, तो सीजीएचएस मुख्यालय में अपील बोर्ड के समक्ष अपील की जा सकती है.

CS(MA) लाभार्थियों के लिए पात्रता का फैसला स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) द्वारा किया जाएगा. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बीमारियों की सूची और मेडिकल मापदंडों को समय-समय पर विशेषज्ञों की सलाह से अपडेट किया जाता रहेगा.

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Last Updated: September 3, 2026 14:06:32 IST

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केंद्र सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सीजीएचएस (CGHS) और CS(MA) नियम, 1944 के तहत इलाज की सुविधाओं को लेकर एक बड़ा और राहत देने वाला फैसला लिया है. अब गंभीर या असाध्य बीमारी से जूझ रहे आश्रित बेटों और भाइयों के लिए उम्र और वैवाहिक स्थिति (शादी) की सीमा को खत्म कर दिया गया है.

मंत्रालय द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) के अनुसार, ये नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं.

क्या हैं नए बदलाव और किसे मिलेगा लाभ?

आजीवन स्वास्थ्य सुविधाएं: यदि कोई आश्रित बेटा या भाई किसी गंभीर या असाध्य बीमारी से पीड़ित है, तो उसे जीवनभर मेडिकल सुविधाएं मिलेंगी. नए नियमों के तहत, यदि गंभीर बीमारी या विकलांगता से पीड़ित आश्रित बेटा या भाई शादी भी कर लेता है, तो भी उसकी CGHS सुविधाएं बंद नहीं होंगी. हालांकि, शर्त यह है कि वह आर्थिक रूप से पूरी तरह अपने परिवार पर ही निर्भर हो और मेडिकल बोर्ड इसकी मंजूरी दे. यह छूट केवल पीड़ित बेटे या भाई को मिलेगी. उनकी पत्नी या बच्चों को इस योजना के तहत कवर नहीं किया जाएगा.

मौजूदा नियम क्या थे?

  • अविवाहित बेटा: सामान्य मामलों में 25 वर्ष की उम्र तक ही सीजीएचएस का लाभ मिलता है.
  • अविवाहित भाई: सामान्य परिस्थितियों में 18 वर्ष की उम्र तक ही पात्र होता है.
  • दिव्यांग बेटा/भाई: स्थायी रूप से दिव्यांग अविवाहित बेटे या भाई को बिना किसी उम्र सीमा के आजीवन यह सुविधा मिलती है.
  • बेटियां और बहनें: बेटियां और बहनें (चाहे वे अविवाहित हों, विधवा हों, तलाकशुदा हों या पति से अलग रह रही हों) पहले से ही नियमों के तहत इन सुविधाओं के लिए पात्र हैं.

किन बीमारियों को किया गया है शामिल?

यह राहत उन बीमारियों के लिए दी गई है जो शरीर को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं और व्यक्ति के काम करने या आजीविका कमाने की क्षमता को खत्म कर देती हैं. इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • कैंसर (अंतिम या गंभीर चरण)
  • गंभीर तंत्रिका विकार (Neurological Disorders)
  • अंग का पूरी तरह खराब होना (End-stage organ diseases), जिसमें लंबे समय तक इलाज या सहायता की जरूरत होती है
  • गंभीर जन्मजात या आनुवंशिक बीमारियां (Congenital/Genetic Disorders)
  • अन्य लंबी और शरीर को लाचार कर देने वाली गंभीर बीमारियां

पात्रता का फैसला कैसे होगा?

हर मामले की अलग से समीक्षा की जाएगी. इसमें बीमारी की गंभीरता, दैनिक जीवन पर असर और व्यक्ति की कमाई करने की क्षमता को देखा जाएगा.

क्षेत्रीय स्तर (Additional Directors/CGHS Regional HQ) पर बने मेडिकल बोर्ड इन मामलों की जांच और सिफारिश करेंगे. यदि कोई फैसले से असंतुष्ट है, तो सीजीएचएस मुख्यालय में अपील बोर्ड के समक्ष अपील की जा सकती है.

CS(MA) लाभार्थियों के लिए पात्रता का फैसला स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) द्वारा किया जाएगा. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बीमारियों की सूची और मेडिकल मापदंडों को समय-समय पर विशेषज्ञों की सलाह से अपडेट किया जाता रहेगा.

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