Gold jewellery: त्योहारी और शादी का सीजन शुरू होते ही ज्वेलरी की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगी है. लेकिन इस बार खरीदारी का तरीका थोड़ा बदल गया है. सोने की कीमतें ज्यादा होने के कारण लोग भारी गहनों के बजाय हल्के और कम वजन वाले आभूषण खरीद रहे हैं. इसका असर सोने की कुल मांग पर पड़ सकता है, लेकिन ज्वेलरी कंपनियों की कमाई बढ़ने की उम्मीद है.
क्रिसिल रेटिंग्स की 5 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत में सोने के आभूषणों की खुदरा बिक्री की मात्रा 4-6 फीसदी घट सकती है. इसके बावजूद संगठित ज्वेलरी कंपनियों का राजस्व 21-23 फीसदी बढ़ने का अनुमान है. इसकी मुख्य वजह सोने की ऊंची कीमतें हैं. क्रिसिल का अनुमान है कि इस वित्त वर्ष में सोने की औसत कीमत पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 25-27 फीसदी ज्यादा रह सकती है.
हल्के गहनों की मांग
पिछले वित्त वर्ष में सोने की कीमतों में 56 फीसदी की तेजी आई थी. इसका असर आभूषणों की मांग पर पड़ा और बिक्री की मात्रा 8 फीसदी घट गई थी. मई 2026 में सरकार ने सोने पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया, जिससे सोना और महंगा हो गया.
हालांकि, बाद में कीमतों में आई गिरावट से ग्राहकों को कुछ राहत मिली. त्योहारी और शादी के सीजन से पहले ज्वेलरी स्टोर्स पर ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी है. लेकिन ग्राहक अब अपने बजट के हिसाब से हल्के गहने और कम कैरेट वाले आभूषण खरीद रहे हैं.
क्रिसिल के मुताबिक, सोने के सिक्कों और बार की मांग में भी इस वित्त वर्ष 4-5 फीसदी की गिरावट आ सकती है. कुल सोने की मांग में इनकी हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी है.
ज्वेलरी कंपनियों को कैसे होगा फायदा?
सोने की कीमतें ज्यादा होने का सीधा फायदा ज्वेलरी कंपनियों के राजस्व पर पड़ सकता है. मान लीजिए, पिछले साल कोई ग्राहक 50 हजार रुपये का गहना खरीदता था. इस साल उतने ही वजन के गहने की कीमत बढ़ने से ग्राहक को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं. यानी बिक्री की मात्रा कम होने के बावजूद कंपनियों की कुल कमाई बढ़ सकती है.
इसके अलावा, ग्राहक भरोसेमंद ब्रांड की ओर भी रुख कर रहे हैं. पुराने सोने के बदले नए गहने खरीदने की सुविधा और गोल्ड सेविंग स्कीम से कंपनियों को ग्राहकों को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है.
बढ़ती लागत से घट सकता है मुनाफा
राजस्व बढ़ने के बावजूद ज्वेलरी कंपनियों के मुनाफे पर दबाव रहने की आशंका है. पिछले साल सोने की कीमतों में तेजी से जिन कंपनियों के पास कम कीमत पर खरीदा गया स्टॉक था, उन्हें फायदा हुआ था. अब कीमतों में तेजी धीमी होने से यह लाभ कम हो सकता है.
इसके अलावा, ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कंपनियों को विज्ञापन और ऑफर पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है. क्रिसिल का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में ज्वेलरी कंपनियों का ऑपरेटिंग मार्जिन घटकर 8.5-8.7 फीसदी रह सकता है, जो पिछले वित्त वर्ष में 9.3 फीसदी था.
महंगे स्टॉक के लिए लेना पड़ सकता है ज्यादा कर्ज
सोने की कीमतें बढ़ने से कंपनियों को दुकान में गहनों का स्टॉक बनाए रखने के लिए ज्यादा पैसे की जरूरत होगी. इससे उनका वर्किंग कैपिटल खर्च बढ़ सकता है और उन्हें ज्यादा कर्ज लेना पड़ सकता है.क्रिसिल के मुताबिक, ज्वेलरी कंपनियां अगले दो वित्त वर्षों में अपने मौजूदा स्टोर नेटवर्क का 7-9 फीसदी विस्तार कर सकती हैं. पहले यह दर 12-15 फीसदी थी. यानी कंपनियां अब विस्तार के मामले में ज्यादा सावधानी बरत सकती हैं.
(डिस्क्लेमर: यह कंटेंट केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से दी गई है. इसे वित्तीय, निवेश, कानूनी या कर संबंधी सलाह न समझें। किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले पाठकों को विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए.)
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