PoK violence: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर (PoK) में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. रावलकोट में गुरुवार, 5 नवंबर को सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान गोलीबारी और ड्रोन हमले के आरोप लगे हैं. स्थानीय सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों में तीन लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने का दावा किया गया है. हालांकि, इन मौतों और ड्रोन हमले की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है. घटना के बाद इलाके में तनाव और दहशत का माहौल बताया जा रहा है.
उमर फारूक चौक के आसपास गोलीबारी
रिपोर्टों के मुताबिक, रावलकोट के उमर फारूक चौक और बस टर्मिनल के आसपास गुरुवार सुबह से तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में लगातार गोलियों की आवाज सुनाई दे रही है. कुछ वीडियो में घरों में आग लगी दिखाई दे रही है, जबकि स्थानीय लोग घटनास्थल से मिले छर्रे और शार्पनेल दिखाते हुए सुरक्षा बलों पर हमले करने के आरोप लगा रहे हैं. स्थानीय प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में आम नागरिकों और बच्चों को भी निशाना बनाया गया. कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में ड्रोन के इस्तेमाल का भी दावा किया गया है. हालांकि, इन वीडियो की पूरी परिस्थितियों और ड्रोन हमले की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद, सड़कों पर उतर रहे लोग
हिंसा के बीच रावलकोट में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं प्रभावित होने की खबरें भी सामने आई हैं. इससे स्थानीय लोगों के बीच डर और अनिश्चितता बढ़ गई है. संचार सेवाएं बाधित होने के कारण घटनास्थल की वास्तविक स्थिति और नुकसान का स्वतंत्र आकलन करना भी मुश्किल हो रहा है. दूसरी तरफ, तनाव के बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे अपने अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे. वहीं, पुलिस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, रावलकोट बस टर्मिनल के पास सड़क से अवरोध हटाने की कार्रवाई के दौरान पुलिस और कुछ हथियारबंद लोगों के बीच गोलीबारी हुई. पुलिस ने दोनों पक्षों के लोगों के घायल होने की बात कही है, लेकिन मौतों की पुष्टि नहीं की.
राजनीतिक अधिकार और स्वायत्तता की मांग
PoK में चल रहा आंदोलन केवल महंगाई या बिजली की कीमतों तक सीमित नहीं है. प्रदर्शनकारी सस्ती बिजली, आटे की उपलब्धता और बुनियादी सुविधाओं के साथ राजनीतिक प्रतिनिधित्व, स्थानीय संसाधनों पर अधिकार और प्रशासनिक स्वायत्तता की मांग भी उठा रहे हैं. इससे पहले जून 2026 में भी पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे. उस दौरान रावलकोट समेत कई इलाकों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जून में हुई एक बड़ी हिंसा में कम से कम 11 लोगों की मौत हुई थी और 70 से अधिक लोग घायल हुए थे. इसके बाद कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं प्रतिबंधित की गई थीं और गिरफ्तारियां भी हुई थीं.