Live TV
Search
Home > धर्म > Dhanteras 2026: धनतेरस पर क्यों खरीदी जाती है नई झाड़ू? मां लक्ष्मी से जुड़ी है यह खास मान्यता

Dhanteras 2026: धनतेरस पर क्यों खरीदी जाती है नई झाड़ू? मां लक्ष्मी से जुड़ी है यह खास मान्यता

Dhanteras Broom Buying Tradition: धनतेरस पर सोने-चांदी और बर्तनों के साथ नई झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है. जानिए झाड़ू को मां लक्ष्मी से क्यों जोड़ा जाता है और इसके पीछे क्या धार्मिक मान्यता है.

Written By:
Published: November 5, 2026 16:14:00 IST
Last Updated: November 5, 2026 16:14:00 IST

Mobile Ads 1x1

Dhanteras Broom Buying Tradition: धनतेरस का त्योहार आते ही बाजारों में सोने-चांदी के आभूषणों और नए बर्तनों की खरीदारी बढ़ जाती है. लेकिन इस दिन एक ऐसी चीज भी खरीदी जाती है, जिसकी कीमत भले ही ज्यादा न हो, मगर कई घरों में उसे शुभ माना जाता है. यह है नई झाड़ू. आपने भी देखा होगा कि धनतेरस के दिन लोग पूजा की दूसरी सामग्री और घरेलू सामान के साथ झाड़ू खरीदकर घर लाते हैं. आखिर झाड़ू का इस पर्व से क्या संबंध है और इसे मां लक्ष्मी से क्यों जोड़ा जाता है?

मां लक्ष्मी के आगमन से जुड़ी है झाड़ू की मान्यता

लोकमान्यताओं के अनुसार, झाड़ू को मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है. इसकी वजह है घर की सफाई में इसकी अहम भूमिका. झाड़ू से घर की धूल-मिट्टी और गंदगी साफ होती है. इसी प्रक्रिया को प्रतीकात्मक रूप से दरिद्रता, अव्यवस्था और नकारात्मकता को दूर करने से जोड़ा गया है.

मान्यता है कि जिस घर में साफ-सफाई और व्यवस्था बनी रहती है, वहां सुख-समृद्धि का वातावरण रहता है. इसी सोच के चलते धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना शुभ माना जाने लगा. हालांकि, यह एक प्रचलित लोकपरंपरा और धार्मिक विश्वास है. इसे ऐसा शास्त्रीय नियम नहीं माना जाना चाहिए, जिसका पालन हर परिवार के लिए अनिवार्य हो.

नई झाड़ू खरीदने का क्या है प्रतीकात्मक अर्थ?

धनतेरस दीपावली की तैयारियों से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन है. इस अवसर पर लोग घरों की सफाई करते हैं, सजावट करते हैं और पूजा की तैयारी शुरू करते हैं. ऐसे में नई झाड़ू खरीदना घर को नए सिरे से व्यवस्थित करने और त्योहार का स्वागत करने का प्रतीक बन गया है.

जिस तरह लोग इस दिन सोना-चांदी या बर्तन खरीदकर समृद्धि की कामना करते हैं, उसी तरह झाड़ू खरीदने के पीछे भी घर में सुख-शांति और खुशहाली बनाए रखने की भावना जुड़ी है. यह परंपरा इस बात की याद भी दिलाती है कि समृद्धि की कामना के साथ घर की स्वच्छता और देखभाल भी जरूरी है.

धनतेरस पर खरीदी गई झाड़ू के साथ क्या करें?

धनतेरस पर नई झाड़ू घर लाने के बाद उसे साफ और व्यवस्थित जगह पर रखना अच्छा माना जाता है. कई परिवार इसे पूजा के समय अन्य नई वस्तुओं के साथ रखते हैं. कुछ घरों में झाड़ू पर हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक बनाने की परंपरा भी है. हालांकि, इन रीति-रिवाजों का तरीका अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में बदल सकता है.

झाड़ू को इस्तेमाल की वस्तु समझकर उसकी साफ-सफाई और रखरखाव का ध्यान रखना चाहिए. इसे ऐसी जगह रखना बेहतर है, जहां वह गंदगी या रास्ते में बाधा का कारण न बने. कुछ परिवारों में झाड़ू को पैर से छूने या उस पर पैर रखने से बचने की परंपरा भी है.

क्या धनतेरस पर झाड़ू खरीदना जरूरी है?

नहीं. धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना हर व्यक्ति या परिवार के लिए अनिवार्य नहीं है. यह एक पारंपरिक मान्यता है, धार्मिक बाध्यता नहीं. अगर घर में पहले से उपयोग लायक झाड़ू मौजूद है, तो केवल परंपरा निभाने के लिए नई झाड़ू खरीदना जरूरी नहीं.

धनतेरस पर झाड़ू खरीदने का मूल भाव घर को स्वच्छ रखना और सुख-समृद्धि की कामना करना है. इसलिए इस परंपरा को आस्था और सांस्कृतिक महत्व के नजरिए से समझना चाहिए, न कि इसे धन प्राप्ति की गारंटी मानना चाहिए.

MORE NEWS

Home > धर्म > Dhanteras 2026: धनतेरस पर क्यों खरीदी जाती है नई झाड़ू? मां लक्ष्मी से जुड़ी है यह खास मान्यता

Written By:
Published: November 5, 2026 16:14:00 IST
Last Updated: November 5, 2026 16:14:00 IST

Mobile Ads 1x1

Dhanteras Broom Buying Tradition: धनतेरस का त्योहार आते ही बाजारों में सोने-चांदी के आभूषणों और नए बर्तनों की खरीदारी बढ़ जाती है. लेकिन इस दिन एक ऐसी चीज भी खरीदी जाती है, जिसकी कीमत भले ही ज्यादा न हो, मगर कई घरों में उसे शुभ माना जाता है. यह है नई झाड़ू. आपने भी देखा होगा कि धनतेरस के दिन लोग पूजा की दूसरी सामग्री और घरेलू सामान के साथ झाड़ू खरीदकर घर लाते हैं. आखिर झाड़ू का इस पर्व से क्या संबंध है और इसे मां लक्ष्मी से क्यों जोड़ा जाता है?

मां लक्ष्मी के आगमन से जुड़ी है झाड़ू की मान्यता

लोकमान्यताओं के अनुसार, झाड़ू को मां लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है. इसकी वजह है घर की सफाई में इसकी अहम भूमिका. झाड़ू से घर की धूल-मिट्टी और गंदगी साफ होती है. इसी प्रक्रिया को प्रतीकात्मक रूप से दरिद्रता, अव्यवस्था और नकारात्मकता को दूर करने से जोड़ा गया है.

मान्यता है कि जिस घर में साफ-सफाई और व्यवस्था बनी रहती है, वहां सुख-समृद्धि का वातावरण रहता है. इसी सोच के चलते धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना शुभ माना जाने लगा. हालांकि, यह एक प्रचलित लोकपरंपरा और धार्मिक विश्वास है. इसे ऐसा शास्त्रीय नियम नहीं माना जाना चाहिए, जिसका पालन हर परिवार के लिए अनिवार्य हो.

नई झाड़ू खरीदने का क्या है प्रतीकात्मक अर्थ?

धनतेरस दीपावली की तैयारियों से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन है. इस अवसर पर लोग घरों की सफाई करते हैं, सजावट करते हैं और पूजा की तैयारी शुरू करते हैं. ऐसे में नई झाड़ू खरीदना घर को नए सिरे से व्यवस्थित करने और त्योहार का स्वागत करने का प्रतीक बन गया है.

जिस तरह लोग इस दिन सोना-चांदी या बर्तन खरीदकर समृद्धि की कामना करते हैं, उसी तरह झाड़ू खरीदने के पीछे भी घर में सुख-शांति और खुशहाली बनाए रखने की भावना जुड़ी है. यह परंपरा इस बात की याद भी दिलाती है कि समृद्धि की कामना के साथ घर की स्वच्छता और देखभाल भी जरूरी है.

धनतेरस पर खरीदी गई झाड़ू के साथ क्या करें?

धनतेरस पर नई झाड़ू घर लाने के बाद उसे साफ और व्यवस्थित जगह पर रखना अच्छा माना जाता है. कई परिवार इसे पूजा के समय अन्य नई वस्तुओं के साथ रखते हैं. कुछ घरों में झाड़ू पर हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक बनाने की परंपरा भी है. हालांकि, इन रीति-रिवाजों का तरीका अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में बदल सकता है.

झाड़ू को इस्तेमाल की वस्तु समझकर उसकी साफ-सफाई और रखरखाव का ध्यान रखना चाहिए. इसे ऐसी जगह रखना बेहतर है, जहां वह गंदगी या रास्ते में बाधा का कारण न बने. कुछ परिवारों में झाड़ू को पैर से छूने या उस पर पैर रखने से बचने की परंपरा भी है.

क्या धनतेरस पर झाड़ू खरीदना जरूरी है?

नहीं. धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदना हर व्यक्ति या परिवार के लिए अनिवार्य नहीं है. यह एक पारंपरिक मान्यता है, धार्मिक बाध्यता नहीं. अगर घर में पहले से उपयोग लायक झाड़ू मौजूद है, तो केवल परंपरा निभाने के लिए नई झाड़ू खरीदना जरूरी नहीं.

धनतेरस पर झाड़ू खरीदने का मूल भाव घर को स्वच्छ रखना और सुख-समृद्धि की कामना करना है. इसलिए इस परंपरा को आस्था और सांस्कृतिक महत्व के नजरिए से समझना चाहिए, न कि इसे धन प्राप्ति की गारंटी मानना चाहिए.

MORE NEWS