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Home > मनोरंजन > ‘शोले’ के वो 3 राज, जो कभी बड़े पर्दे पर नहीं दिखे! आखिर क्यों सेंसर बोर्ड ने चलवा दी थी कैंची?

‘शोले’ के वो 3 राज, जो कभी बड़े पर्दे पर नहीं दिखे! आखिर क्यों सेंसर बोर्ड ने चलवा दी थी कैंची?

Sholay Deleted Scenes: हिंदी सिनेमा में दशकों बाद भी शोले का जिक्र खत्म नहीं हुआ. ये एक ऐसी फिल्म है, जिसे GEN-Z भी काफी पसंद करते हैं. हालांकि कुछ ऐसे सीन भी हैं, जिन्हें शूट तो किया गया था लेकिन दिखाया नहीं जा सकता.

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Published: November 5, 2026 16:03:10 IST
Last Updated: November 5, 2026 16:03:10 IST

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Sholay Deleted Scenes: हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी हैं, जिनकी लोकप्रियता वक्त के साथ कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जाती है. साल 1975 में रिलीज हुई ‘शोले’ भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है. जय-वीरू की दोस्ती, गब्बर सिंह का खौफ, बसंती की चंचलता और ठाकुर का बदला आज भी दर्शकों के जेहन में ताजा है. रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा में एक अलग मुकाम हासिल किया. अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, जया बच्चन, संजीव कुमार और अमजद खान जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म के डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि पर्दे पर दिखाई गई कहानी के अलावा ‘शोले’ में कुछ ऐसे दृश्य भी थे, जिन्हें बाकायदा फिल्माया गया था? इसके बावजूद दर्शक उन्हें कभी सिनेमाघरों में नहीं देख पाए. इन दृश्यों को हटाने के पीछे कहानी की एडिटिंग से लेकर सेंसर बोर्ड की आपत्तियों तक कई वजहें थीं.

ठाकुर के जूतों में किसने लगाई थीं कीलें?

फिल्म में ठाकुर बलदेव सिंह के जूते काफी खास नजर आते हैं. इन जूतों की मदद से वह गब्बर से बदला लेने की तैयारी करता है. हालांकि, जूतों में कीलें लगाने के पीछे की कहानी दर्शकों को नहीं दिखाई गई. बताया जाता है कि ठाकुर के वफादार नौकर ने उसके जूतों में ये कीलें लगाई थीं. इस घटनाक्रम को फिल्माया गया था लेकिन अंतिम एडिटिंग के दौरान इसे हटा दिया गया. यही वजह है कि दर्शकों के सामने जूतों की कहानी कभी पूरी तरह नहीं आ सकी.

गब्बर के हाथों मारे जाते रहीम चाचा के बेटे

फिल्म में रहीम चाचा का किरदार निभाने वाले एके हंगल की कहानी का एक दुखद पहलू भी था. गब्बर सिंह के आतंक को दिखाने के लिए उनके बेटे की हत्या का दृश्य शूट किया गया था. हालांकि, हिंसा की गंभीरता को देखते हुए सेंसर बोर्ड ने इस सीन पर आपत्ति जताई और इसे हटाने का फैसला लिया. इस कटौती से फिल्म में मैक मोहन और सचिन के किरदारों से जुड़े हिस्सों पर भी असर पड़ा.

गब्बर की मौत का बदला हुआ क्लाइमैक्स

‘शोले’ के सबसे चर्चित हिस्सों में से एक इसका आखिरी मुकाबला है. दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के क्लाइमैक्स को लेकर भी सेंसर बोर्ड की आपत्ति सामने आई थी. मूल दृश्य में ठाकुर गब्बर को उछलकर छाती पर लात मारता है और गब्बर की पीठ में कील घुसने से उसकी मौत हो जाती है. इस हिंसक अंत को बदलने के निर्देश दिए गए. इसके बाद फिल्म में गब्बर को पुलिस के हवाले किए जाने वाला सीन रखा गया.

ये भी पढ़ें: Ramayana Review In Hindi: 4000 करोड़ की रामायण ने मचाया तहलका! रणबीर के राम और यश के रावण अवतार ने लूटी महफिल, जानें कैसी है फिल्म?

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Published: November 5, 2026 16:03:10 IST
Last Updated: November 5, 2026 16:03:10 IST

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Sholay Deleted Scenes: हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी हैं, जिनकी लोकप्रियता वक्त के साथ कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जाती है. साल 1975 में रिलीज हुई ‘शोले’ भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है. जय-वीरू की दोस्ती, गब्बर सिंह का खौफ, बसंती की चंचलता और ठाकुर का बदला आज भी दर्शकों के जेहन में ताजा है. रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा में एक अलग मुकाम हासिल किया. अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, जया बच्चन, संजीव कुमार और अमजद खान जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म के डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि पर्दे पर दिखाई गई कहानी के अलावा ‘शोले’ में कुछ ऐसे दृश्य भी थे, जिन्हें बाकायदा फिल्माया गया था? इसके बावजूद दर्शक उन्हें कभी सिनेमाघरों में नहीं देख पाए. इन दृश्यों को हटाने के पीछे कहानी की एडिटिंग से लेकर सेंसर बोर्ड की आपत्तियों तक कई वजहें थीं.

ठाकुर के जूतों में किसने लगाई थीं कीलें?

फिल्म में ठाकुर बलदेव सिंह के जूते काफी खास नजर आते हैं. इन जूतों की मदद से वह गब्बर से बदला लेने की तैयारी करता है. हालांकि, जूतों में कीलें लगाने के पीछे की कहानी दर्शकों को नहीं दिखाई गई. बताया जाता है कि ठाकुर के वफादार नौकर ने उसके जूतों में ये कीलें लगाई थीं. इस घटनाक्रम को फिल्माया गया था लेकिन अंतिम एडिटिंग के दौरान इसे हटा दिया गया. यही वजह है कि दर्शकों के सामने जूतों की कहानी कभी पूरी तरह नहीं आ सकी.

गब्बर के हाथों मारे जाते रहीम चाचा के बेटे

फिल्म में रहीम चाचा का किरदार निभाने वाले एके हंगल की कहानी का एक दुखद पहलू भी था. गब्बर सिंह के आतंक को दिखाने के लिए उनके बेटे की हत्या का दृश्य शूट किया गया था. हालांकि, हिंसा की गंभीरता को देखते हुए सेंसर बोर्ड ने इस सीन पर आपत्ति जताई और इसे हटाने का फैसला लिया. इस कटौती से फिल्म में मैक मोहन और सचिन के किरदारों से जुड़े हिस्सों पर भी असर पड़ा.

गब्बर की मौत का बदला हुआ क्लाइमैक्स

‘शोले’ के सबसे चर्चित हिस्सों में से एक इसका आखिरी मुकाबला है. दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के क्लाइमैक्स को लेकर भी सेंसर बोर्ड की आपत्ति सामने आई थी. मूल दृश्य में ठाकुर गब्बर को उछलकर छाती पर लात मारता है और गब्बर की पीठ में कील घुसने से उसकी मौत हो जाती है. इस हिंसक अंत को बदलने के निर्देश दिए गए. इसके बाद फिल्म में गब्बर को पुलिस के हवाले किए जाने वाला सीन रखा गया.

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