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No UPI Day on October 2: UPI होगा बंद? 2 अक्टूबर को देश में क्या होने जा रहा खास? व्यापारियों ने कर दिया बड़ा ऐलान

No UPI Day on October 2: यूपीआई चार्ज के विरोध में व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का ऐलान किया है. इस दिन व्यापारी ऑनलाइन पेमेंट स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे ग्राहकों को परेशानी हो सकती है.

Written By:
Edited By: Uttam Ojha
Last Updated: 2026-09-24 15:55:26

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No UPI Day on October 2: यूपीआई चार्ज को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में बवाल देखने को मिल रहा है. लोग सरकार के इस फैसले से बिल्कुल भी खुश नजर नहीं आ रहे हैं. फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल (FAIVM)और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स समेत कई व्यापारी संगठन ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ एक बड़ा कदम उठा दिया है. संगठनों ने ऐलान किया है कि गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को व्यापारी वर्ग NO UPI DAY मनाने वाले हैं. जिसके कारण वह इस दिन किसी से भी ऑनलाइन पेमेंट नहीं लेंगे. संगठनों के इस फैसले के बाद आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

आखिर क्यों नाराज हैं कारोबारी?

दरअसल, कारोबारी UPI ट्रांजैक्शन पर लगाए जाने वाले 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाए जाने को लेकर विरोध जता रहे हैं. उनके मुताबिक, पेट्रोल-डीजल, अनाज पर मार्जिन पहले ही कम मिलता है. जिसके बाद अगर अब अतिरिक्त टैक्स लगाया जाएगा, तो उन्हें केवल नुकसान ही झेलना पड़ेगा. इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने तो चेतावनी देते हुए कहा कि अलग सरकार ने 15 अक्टूबर तक फैसला नहीं लिया, तो वह सभी UPI मशीनों को पानी में बहा देंगे. सरकार के इस फैसले के कारण कारोबारी वर्ग काफी ज्यादा नाराज है. 23 सितंबर को भी मध्य प्रदेश के कई शहरों में 25 व्यापारिक संगठनों ने ‘नो UPI डे’ मनाया. जिसके कारण पूरे राज्य का कुल 25 प्रतिशत कारोबार प्रभावित हुआ.  

MDR क्या है?

MDR एक तरह की प्रोसेसिंग फीस है. जब कोई ग्राहक QR कोड स्कैन करके या कार्ड से किसी दुकान पर पेमेंट करता है, तो पैसे ग्राहक के बैंक खाते से दुकानदार के खाते तक पहुंचाने के लिए कई बैंक और पेमेंट कंपनियों का डिजिटल सिस्टम काम करता है. इस सिस्टम को चलाने और सुरक्षित रखने में जो खर्च आता है, उसे MDR के तौर पर लिया जाता है.

ये भी पढ़ें: MMA ने 16वीं बार जीता AIMA का ‘बेस्ट मैनेजमेंट एसोसिएशन इन इंडिया’ अवॉर्ड

नई फीस का क्या मतलब है?

सरकार के नए फैसले के मुताबिक, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के P2M UPI पेमेंट पर 0.40% फीस लगेगी. हालांकि, इस फीस की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है. यानी अगर कोई व्यापारी 1 लाख या 10 लाख रुपये का ट्रांजैक्शन करता है, तो उससे 300 रुपये से ज्यादा फीस नहीं ली जाएगी. आसान शब्दों में कहें तो फीस की अधिकतम सीमा 300 रुपये पर तय कर दी गई है.

ये भी पढ़ें: Delhi Gold Price 24 September: दिल्ली में फिर बदले सोने के दाम, 24 कैरेट ₹1.54 लाख के पार; जानें 22 कैरेट का रेट

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Last Updated: 2026-09-24 15:55:26

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No UPI Day on October 2: यूपीआई चार्ज को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में बवाल देखने को मिल रहा है. लोग सरकार के इस फैसले से बिल्कुल भी खुश नजर नहीं आ रहे हैं. फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल (FAIVM)और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स समेत कई व्यापारी संगठन ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ एक बड़ा कदम उठा दिया है. संगठनों ने ऐलान किया है कि गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को व्यापारी वर्ग NO UPI DAY मनाने वाले हैं. जिसके कारण वह इस दिन किसी से भी ऑनलाइन पेमेंट नहीं लेंगे. संगठनों के इस फैसले के बाद आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

आखिर क्यों नाराज हैं कारोबारी?

दरअसल, कारोबारी UPI ट्रांजैक्शन पर लगाए जाने वाले 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाए जाने को लेकर विरोध जता रहे हैं. उनके मुताबिक, पेट्रोल-डीजल, अनाज पर मार्जिन पहले ही कम मिलता है. जिसके बाद अगर अब अतिरिक्त टैक्स लगाया जाएगा, तो उन्हें केवल नुकसान ही झेलना पड़ेगा. इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने तो चेतावनी देते हुए कहा कि अलग सरकार ने 15 अक्टूबर तक फैसला नहीं लिया, तो वह सभी UPI मशीनों को पानी में बहा देंगे. सरकार के इस फैसले के कारण कारोबारी वर्ग काफी ज्यादा नाराज है. 23 सितंबर को भी मध्य प्रदेश के कई शहरों में 25 व्यापारिक संगठनों ने ‘नो UPI डे’ मनाया. जिसके कारण पूरे राज्य का कुल 25 प्रतिशत कारोबार प्रभावित हुआ.  

MDR क्या है?

MDR एक तरह की प्रोसेसिंग फीस है. जब कोई ग्राहक QR कोड स्कैन करके या कार्ड से किसी दुकान पर पेमेंट करता है, तो पैसे ग्राहक के बैंक खाते से दुकानदार के खाते तक पहुंचाने के लिए कई बैंक और पेमेंट कंपनियों का डिजिटल सिस्टम काम करता है. इस सिस्टम को चलाने और सुरक्षित रखने में जो खर्च आता है, उसे MDR के तौर पर लिया जाता है.

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नई फीस का क्या मतलब है?

सरकार के नए फैसले के मुताबिक, 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से ज्यादा के P2M UPI पेमेंट पर 0.40% फीस लगेगी. हालांकि, इस फीस की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है. यानी अगर कोई व्यापारी 1 लाख या 10 लाख रुपये का ट्रांजैक्शन करता है, तो उससे 300 रुपये से ज्यादा फीस नहीं ली जाएगी. आसान शब्दों में कहें तो फीस की अधिकतम सीमा 300 रुपये पर तय कर दी गई है.

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