Hariyali Teej for pregnant women: हरियाली तीज का पर्व इस साल 15 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा. सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना से यह व्रत रखती हैं. हालांकि, गर्भावस्था के दौरान शरीर की जरूरतें सामान्य से अलग होती हैं. ऐसे में व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. खासकर निर्जला व्रत गर्भवती महिलाओं के लिए उचित नहीं माना जाता. अगर कोई महिला स्वास्थ्य कारणों से व्रत नहीं रख पाती है, तो वह श्रद्धापूर्वक भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकती है.
गर्भावस्था में व्रत रखने से पहले डॉक्टर से लें सलाह
हरियाली तीज का व्रत महिलाएं पूरे श्रद्धा भाव से करती हैं, लेकिन गर्भावस्था में किसी भी तरह का उपवास करने से पहले अपनी सेहत को ध्यान में रखना चाहिए. गर्भवती महिलाएं अगर व्रत रखने की इच्छा रखती हैं, तो संकल्प लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें. गर्भावस्था के दौरान शरीर को पर्याप्त पानी और पोषण की जरूरत होती है, इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक भूखा या प्यासा रहना ठीक नहीं है.
गर्भवती महिलाएं भूलकर भी न रखें निर्जला व्रत
अगर डॉक्टर व्रत रखने की अनुमति देते हैं, तब भी गर्भवती महिला को अपनी स्थिति के अनुसार सावधानी बरतनी चाहिए. खासतौर पर निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए. समय-समय पर पर्याप्त मात्रा में पानी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार फलाहार या हल्का पौष्टिक भोजन लिया जा सकता है. कमजोरी, चक्कर, उल्टी, बेचैनी या किसी अन्य परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
व्रत नहीं रख पा रहीं तो पूजा करने में कोई परेशानी नहीं
गर्भावस्था के कारण अगर कोई महिला हरियाली तीज का व्रत नहीं रखती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह पर्व की पूजा नहीं कर सकती. महिलाएं सामान्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकती हैं. श्रद्धा के साथ पूजा करना और मन से प्रार्थना करना भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसलिए सेहत की वजह से व्रत न रख पाने को लेकर मन में किसी तरह का तनाव या अपराधबोध नहीं रखना चाहिए.
बीच में तबीयत बिगड़े तो व्रत जारी रखना जरूरी नहीं
अगर गर्भवती महिला व्रत शुरू करने के बाद असहज महसूस करती है या स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है, तो व्रत जारी रखने की जिद नहीं करनी चाहिए. जरूरत पड़ने पर भोजन और पानी लिया जा सकता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति में भगवान शिव और माता पार्वती से क्षमा प्रार्थना कर मन को शांत किया जा सकता है. स्वास्थ्य से समझौता करके व्रत पूरा करना जरूरी नहीं है.
व्रत बीच में छोड़ना पड़े तो कर सकती हैं ये धार्मिक उपाय
मान्यता के अनुसार, अगर किसी कारण से हरियाली तीज का व्रत बीच में छोड़ना पड़े तो पूजा करके भगवान शिव और माता पार्वती से क्षमा प्रार्थना की जा सकती है. इसके अलावा पान के पत्ते में दक्षिणा आदि रखकर किसी ब्राह्मण को दान करने की परंपरा भी कुछ स्थानों पर बताई जाती है. हालांकि, इन धार्मिक उपायों से ज्यादा जरूरी गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु का स्वास्थ्य है.
गर्भावस्था में झूला झूलने से भी बचें
हरियाली तीज पर झूला झूलना एक प्रमुख परंपरा है. महिलाएं और युवतियां इस दिन सज-धजकर झूला झूलती हैं और तीज के गीत गाती हैं. लेकिन गर्भावस्था में झूला झूलने से बचना बेहतर है. खासकर गर्भावस्था की स्थिति और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार किसी भी ऐसी गतिविधि से बचना चाहिए जिसमें गिरने या चोट लगने का खतरा हो.
पूजा के साथ आराम का भी रखें पूरा ध्यान
हरियाली तीज की तैयारियों में गर्भवती महिलाओं को ज्यादा देर तक खड़े रहने, लगातार काम करने या भारी साफ-सफाई करने से बचना चाहिए. शरीर में थकान महसूस होने पर तुरंत आराम करें. पूजा के लिए लंबे समय तक खड़े रहने के बजाय सुविधानुसार बैठकर पूजा की जा सकती है. परिवार के सदस्यों को भी गर्भवती महिला की मदद करनी चाहिए ताकि उस पर अतिरिक्त काम का दबाव न पड़े.
व्रत से ज्यादा जरूरी है मां और बच्चे की सेहत
हरियाली तीज आस्था और श्रद्धा का पर्व है, लेकिन गर्भावस्था में व्रत रखने का फैसला व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर होना चाहिए. किसी भी तरह की कमजोरी या परेशानी महसूस होने पर व्रत तोड़ना बेहतर है. गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त आराम, पानी और पौष्टिक आहार पर ध्यान देना चाहिए. धार्मिक आस्था के साथ अपनी और गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है.