Live TV
Search
Home > धर्म > 53 साल से भोपाल में सुरक्षित है नीम करोली बाबा का अस्थि कलश! फिल्म के बाद फिर चर्चा में आई ये धरोहर

53 साल से भोपाल में सुरक्षित है नीम करोली बाबा का अस्थि कलश! फिल्म के बाद फिर चर्चा में आई ये धरोहर

Hanuman excerpt from the film: नीम करोली बाबा की फिल्म 'हनुमान अंश' के बाद उनके जीवन से जुड़े किस्से फिर चर्चा में हैं. परिवार के मुताबिक, बाबा की अस्थियों का एक हिस्सा पिछले करीब 53 वर्षों से भोपाल में सुरक्षित है. परिवार अब मंदिर और आश्रम बनाने की योजना पर काम कर रहा है, जहां भविष्य में इस अस्थि कलश को स्थापित किया जा सकता है.

Written By:
Edited By: Uttam Ojha
Last Updated: 2026-09-01 17:43:29

Mobile Ads 1x1

Hanuman excerpt from the film: नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ के बाद एक बार फिर देशभर में उनके जीवन, चमत्कारों और उनसे जुड़े किस्सों की चर्चा हो रही है. इसी बीच बाबा से जुड़ी एक ऐसी जानकारी सामने आई है, जिसके बारे में उनके कई भक्त शायद नहीं जानते होंगे. दावा है कि नीम करोली बाबा की अस्थियों का एक हिस्सा पिछले करीब 53 वर्षों से भोपाल में उनके परिवार के पास सुरक्षित है. परिवार के मुताबिक, इस अस्थि कलश को आज भी श्रद्धा के साथ संभालकर रखा गया है और भविष्य में इसे प्रस्तावित मंदिर में स्थापित करने की योजना है.

11 सितंबर 1973 को ली थी समाधि

नीम करोली बाबा ने 11 सितंबर 1973 को अनंत चतुर्दशी के दिन वृंदावन में देह त्यागी थी. उनके निधन के बाद उनकी अस्थियों को देश की 11 पवित्र नदियों में विसर्जित किए जाने की बात कही जाती है. हालांकि, उनकी अस्थियों का एक हिस्सा उनके बड़े बेटे अपने साथ भोपाल ले आए थे. इसके बाद से यह अस्थि कलश परिवार के पास ही सुरक्षित बताया जाता है. करीब पांच दशक से अधिक समय बीतने के बावजूद परिवार ने इसे संभालकर रखा हुआ है.

भोपाल से बाबा का था खास रिश्ता

नीम करोली बाबा के परिवार के अनुसार, भोपाल उनके लिए सिर्फ एक शहर नहीं था, बल्कि इस जगह से उनका खास जुड़ाव था. बाबा के पोते डॉ. धनंजय शर्मा ने एक बातचीत में बताया था कि बाबा को भोपाल बेहद पसंद था. उनके मुताबिक, वर्ष 1970 में नीम करोली बाबा करीब 10 दिनों तक अरेरा कॉलोनी स्थित उनके परिवार के घर पर रुके थे. इस दौरान उन्होंने भोपाल की कई जगहों का दौरा किया था. बताया जाता है कि बाबा ने नेवरी मंदिर में रात भी बिताई थी. यही वजह है कि बाबा की स्मृतियों से जुड़ी कई चीजें आज भी भोपाल में परिवार के लिए विशेष महत्व रखती हैं.

परिवार के पास आज भी मौजूद है खास धरोहर

डॉ. धनंजय शर्मा के अनुसार, उनके पिता और चाचा अब इस दुनिया में नहीं हैं. उनके पिता का करीब चार साल पहले 97 वर्ष की उम्र में निधन हुआ था. परिवार के सदस्य अलग-अलग स्थानों पर रहते हैं, लेकिन नीम करोली बाबा से जुड़ी इस धार्मिक धरोहर को आज भी संभालकर रखा गया है. परिवार के मुताबिक, यह अस्थि कलश उनके लिए सिर्फ एक पुरानी वस्तु नहीं है, बल्कि बाबा की स्मृति और आस्था से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण धरोहर है.

बाबा ने पोते को दी थी हनुमान जी की प्रतिमा

नीम करोली बाबा के परिवार में उनकी दी हुई एक विशेष हनुमान प्रतिमा भी आज तक पूजी जाती है. डॉ. धनंजय शर्मा के अनुसार, यह प्रतिमा स्वयं बाबा ने उन्हें भेंट की थी. आज भी परिवार इस प्रतिमा की नियमित पूजा करता है. बाबा के भक्त उन्हें हनुमान जी का अवतार मानते हैं, इसलिए परिवार के लिए उनसे जुड़ी हर वस्तु का धार्मिक और भावनात्मक महत्व है.

अब मंदिर में स्थापित किया जाएगा अस्थि कलश

परिवार अब भोपाल में नीम करोली बाबा के नाम पर एक भव्य मंदिर और आश्रम बनाने की योजना पर काम कर रहा है. परिवार के अनुसार, मंदिर का निर्माण होने के बाद करीब 53 वर्षों से सुरक्षित इस अस्थि कलश को वहां विधि-विधान के साथ स्थापित किया जाएगा. ऐसे में आने वाले समय में यह स्थान नीम करोली बाबा की स्मृतियों और उनकी आध्यात्मिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है.

MORE NEWS

Home > धर्म > 53 साल से भोपाल में सुरक्षित है नीम करोली बाबा का अस्थि कलश! फिल्म के बाद फिर चर्चा में आई ये धरोहर

Written By:
Edited By: Uttam Ojha
Last Updated: 2026-09-01 17:43:29

Mobile Ads 1x1

Hanuman excerpt from the film: नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ के बाद एक बार फिर देशभर में उनके जीवन, चमत्कारों और उनसे जुड़े किस्सों की चर्चा हो रही है. इसी बीच बाबा से जुड़ी एक ऐसी जानकारी सामने आई है, जिसके बारे में उनके कई भक्त शायद नहीं जानते होंगे. दावा है कि नीम करोली बाबा की अस्थियों का एक हिस्सा पिछले करीब 53 वर्षों से भोपाल में उनके परिवार के पास सुरक्षित है. परिवार के मुताबिक, इस अस्थि कलश को आज भी श्रद्धा के साथ संभालकर रखा गया है और भविष्य में इसे प्रस्तावित मंदिर में स्थापित करने की योजना है.

11 सितंबर 1973 को ली थी समाधि

नीम करोली बाबा ने 11 सितंबर 1973 को अनंत चतुर्दशी के दिन वृंदावन में देह त्यागी थी. उनके निधन के बाद उनकी अस्थियों को देश की 11 पवित्र नदियों में विसर्जित किए जाने की बात कही जाती है. हालांकि, उनकी अस्थियों का एक हिस्सा उनके बड़े बेटे अपने साथ भोपाल ले आए थे. इसके बाद से यह अस्थि कलश परिवार के पास ही सुरक्षित बताया जाता है. करीब पांच दशक से अधिक समय बीतने के बावजूद परिवार ने इसे संभालकर रखा हुआ है.

भोपाल से बाबा का था खास रिश्ता

नीम करोली बाबा के परिवार के अनुसार, भोपाल उनके लिए सिर्फ एक शहर नहीं था, बल्कि इस जगह से उनका खास जुड़ाव था. बाबा के पोते डॉ. धनंजय शर्मा ने एक बातचीत में बताया था कि बाबा को भोपाल बेहद पसंद था. उनके मुताबिक, वर्ष 1970 में नीम करोली बाबा करीब 10 दिनों तक अरेरा कॉलोनी स्थित उनके परिवार के घर पर रुके थे. इस दौरान उन्होंने भोपाल की कई जगहों का दौरा किया था. बताया जाता है कि बाबा ने नेवरी मंदिर में रात भी बिताई थी. यही वजह है कि बाबा की स्मृतियों से जुड़ी कई चीजें आज भी भोपाल में परिवार के लिए विशेष महत्व रखती हैं.

परिवार के पास आज भी मौजूद है खास धरोहर

डॉ. धनंजय शर्मा के अनुसार, उनके पिता और चाचा अब इस दुनिया में नहीं हैं. उनके पिता का करीब चार साल पहले 97 वर्ष की उम्र में निधन हुआ था. परिवार के सदस्य अलग-अलग स्थानों पर रहते हैं, लेकिन नीम करोली बाबा से जुड़ी इस धार्मिक धरोहर को आज भी संभालकर रखा गया है. परिवार के मुताबिक, यह अस्थि कलश उनके लिए सिर्फ एक पुरानी वस्तु नहीं है, बल्कि बाबा की स्मृति और आस्था से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण धरोहर है.

बाबा ने पोते को दी थी हनुमान जी की प्रतिमा

नीम करोली बाबा के परिवार में उनकी दी हुई एक विशेष हनुमान प्रतिमा भी आज तक पूजी जाती है. डॉ. धनंजय शर्मा के अनुसार, यह प्रतिमा स्वयं बाबा ने उन्हें भेंट की थी. आज भी परिवार इस प्रतिमा की नियमित पूजा करता है. बाबा के भक्त उन्हें हनुमान जी का अवतार मानते हैं, इसलिए परिवार के लिए उनसे जुड़ी हर वस्तु का धार्मिक और भावनात्मक महत्व है.

अब मंदिर में स्थापित किया जाएगा अस्थि कलश

परिवार अब भोपाल में नीम करोली बाबा के नाम पर एक भव्य मंदिर और आश्रम बनाने की योजना पर काम कर रहा है. परिवार के अनुसार, मंदिर का निर्माण होने के बाद करीब 53 वर्षों से सुरक्षित इस अस्थि कलश को वहां विधि-विधान के साथ स्थापित किया जाएगा. ऐसे में आने वाले समय में यह स्थान नीम करोली बाबा की स्मृतियों और उनकी आध्यात्मिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है.

MORE NEWS