Pitru Paksha Online Shraddh: पितृ पक्ष में पितरों की आत्मा की शांति और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है. इन दिनों कई लोग गया, प्रयागराज, वाराणसी, उज्जैन और पुष्कर जैसे धार्मिक स्थलों पर जाकर पिंडदान और श्राद्ध करते हैं. लेकिन विदेश में रहने वाले या किसी कारण से धार्मिक स्थल तक नहीं पहुंच पाने वाले लोगों के बीच ऑनलाइन श्राद्ध और पिंडदान का चलन भी बढ़ रहा है.
क्या ऑनलाइन श्राद्ध करना सही है?
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पिंडदान और श्राद्ध कराने को लेकर अलग-अलग धार्मिक मत हैं. दी गई जानकारी के अनुसार, श्राद्ध कर्म में भाव और श्रद्धा को महत्वपूर्ण माना जाता है. हालांकि, ऑनलाइन माध्यम से कराया गया श्राद्ध पारंपरिक रूप से स्वयं किए गए श्राद्ध के समान माना जाए या नहीं, इस पर मत अलग हो सकते हैं. जिन लोगों के परिवार में श्राद्ध करने वाला कोई सदस्य नहीं है, उनके लिए ब्राह्मण संकल्प लेकर श्राद्ध कर्म कर सकता है. लेकिन यदि परिवार में श्राद्ध करने योग्य व्यक्ति मौजूद है, तो उसे स्वयं अपने घर से श्राद्ध और तर्पण करना चाहिए. पितरों की तृप्ति के लिए जल तर्पण को विशेष महत्व दिया गया है. इसलिए यदि किसी कारण से बड़ा कर्मकांड संभव न हो, तो भी श्रद्धा के साथ स्वयं जल अर्पित करना महत्वपूर्ण माना जाता है.
पितृ पक्ष में ऐसे करें तर्पण
पितृ पक्ष में रोज स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित करना चाहिए. इसके साथ पितरों की शांति और सुख के लिए प्रार्थना करनी चाहिए. धार्मिक मान्यताओं में तर्पण के दौरान जल अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि श्रद्धा से किया गया तर्पण पितरों को संतुष्टि देता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है.
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पितृ पक्ष 2026 की तिथियां
इस बार पितृ पक्ष 26 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक रहेगा. अष्टमी तिथि के क्षय और पंचमी-षष्ठी के एक ही दिन पड़ने के कारण यह पक्ष 15 दिनों का रहेगा. 1 अक्टूबर को पंचमी के साथ षष्ठी का श्राद्ध भी किया जाएगा. षष्ठी तिथि 1 अक्टूबर को दोपहर 12:35 बजे के बाद शुरू होगी और 2 अक्टूबर की सुबह 10:15 बजे तक रहेगी. शास्त्रीय नियम के अनुसार श्राद्ध के लिए मध्यान काल में तिथि का होना आवश्यक माना जाता है. इसी वजह से षष्ठी का श्राद्ध भी 1 अक्टूबर को दोपहर 12:35 बजे के बाद किया जाएगा.
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