Evergreen Song: एक दौर था, जब मोबाइल फोन नहीं थे, म्यूजिक ऐप्स नहीं थे और गाने सुनने के लिए लोग रेडियो या कैसेट प्लेयर का इंतजार किया करते थे. उन्हीं दिनों हिंदी सिनेमा में एक ऐसा गीत आया, जिसने पहली बार सुनते ही लाखों लोगों के दिलों में जगह बना ली. यह गीत था ‘छूकर मेरे मन को’, जिसे 1981 में आई फिल्म ‘याराना’ के लिए तैयार किया गया था. वक्त बदला, तकनीक बदली, संगीत का अंदाज भी बदल गया लेकिन आज भी इस गीत की मिठास बरकरार है.
जब यह गाना रिलीज हुआ, तब पर्दे पर अमिताभ बच्चन अपनी लोकप्रियता के शिखर पर थे. उनकी सादगी भरी स्क्रीन प्रेजेंस, किशोर कुमार की जादुई आवाज, राजेश रोशन का मधुर संगीत और अंजान के भावपूर्ण बोलों ने इस गीत को हमेशा के लिए यादगार बना दिया. इस सदाबहार धुन के पीछे एक और दिलचस्प कहानी छिपी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं.
रवींद्रनाथ के किस गाने पर बना
दरअसल, इस गीत की शुरुआती धुन का रिश्ता नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध रवींद्र संगीत रचना ‘तुमार होलो शुरू, आमार होलो सारा’ से माना जाता है. संगीत जानकारों के अनुसार, संगीतकार राजेश रोशन ने गीत के शुरुआती हिस्से में उस रचना की धुन से प्रेरणा ली थी. हालांकि इसके बाद पूरा गीत अपनी अलग पहचान के साथ आगे बढ़ता है और हिंदी फिल्म संगीत की खूबसूरत मिसाल बन जाता है. यही वजह है कि इसे न तो पूरी तरह रवींद्र संगीत कहा जा सकता है और न ही सिर्फ एक सामान्य फिल्मी गीत. यह दोनों संगीत परंपराओं का खूबसूरत मेल है.
पर्दे पर बिखेरा जादू
किशोर कुमार ने अपनी आवाज से इस गीत में ऐसा जादू भरा कि हर शब्द सीधे दिल तक पहुंचता है. वहीं अंजान के लिखे सरल लेकिन गहरे बोल प्यार और अपनापन का ऐसा एहसास कराते हैं, जिसे हर पीढ़ी महसूस कर सकती है. अमिताभ बच्चन पर फिल्माए गए इस गीत ने पर्दे पर भी वही जादू बिखेरा, जिसने दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखा.
आज भी फेवरेट प्लेलिस्ट में बरकरार
चार दशक से भी ज्यादा समय गुजर चुका है लेकिन ‘छूकर मेरे मन को’ की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई. आज भी यह गीत रेडियो, म्यूजिक प्लेलिस्ट, स्टेज शो और रियलिटी शोज का पसंदीदा हिस्सा बना हुआ है. नई पीढ़ी भी इसे उतने ही प्रेम से सुनती है, जितना कभी इसके रिलीज के समय लोगों ने सुना था.