Tamannaah Bhatia Power Soaps Case: मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार (16 अप्रैल) को अभिनेत्री तमन्ना भाटिया द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने एक एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी थी.
दरअसल अनुबंध की समाप्ति के बावजूद ‘अनाधिकृत रूप से’ उनकी छवियों का उपयोग करने के लिए तमन्ना ने पावर सोप्स से 1 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग करने की याचिका दायर की थी, जिसे एकल न्यायाधीश द्वारा खारिज कर दिया गया था. तमन्ना भाटिया ने इस आदेश को चुनौती दी लेकिन न्यायमूर्ति पी. वेलमुरुगन और न्यायमूर्ति के. गोविंदराजन थिलाकवाड़ी की पीठ ने 2017 में एकल न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश को बरकरार रखा.
मुकदमे की पृष्ठभूमि
अपने मूल मुकदमे में, तमन्ना ने कहा था कि उन्होंने 7 अक्टूबर, 2008 को पॉवर सोप्स के साथ एक समझौता किया था, जिसमें कंपनी द्वारा निर्मित साबुनों के रैपरों पर उनकी तस्वीरों के उपयोग के लिए सहमति दी गई थी. यह समझौता तमन्ना और कंपनी के बीच एक वर्ष की अवधि के लिए किया गया था और 6 अक्टूबर, 2009 तक वैध था. तमन्ना के अनुसार समझौते की अवधि समाप्त होने के बाद, इसका नवीनीकरण नहीं किया गया. उन्होंने तर्क दिया था कि समझौते की अवधि समाप्त होने के बाद भी कंपनी ने उनकी अनुमति के बिना उनके पोस्टर का इस्तेमाल अपने उत्पादों पर जारी रखा. तमन्ना भाटिया ने आरोप लगाया कि इस तरह के निरंतर उपयोग से उन्हें 1 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
कंपनी की दलील
कंपनी ने तमन्ना की इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि तमन्ना ने कोई भी ऐसा सबूत पेश नहीं किया है जो उसे दोषी ठहराता हो. कंपनी ने तर्क दिया कि तमन्ना काल्पनिक नुकसान के लिए किसी भी राशि का दावा करने की हकदार नहीं है.
एकल न्यायाधीश ने तमन्ना द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच करने के बाद पाया कि वे असली दस्तावेज नहीं थे. न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि तमन्ना यह साबित नहीं कर पाई कि कंपनी द्वारा बनाए गए रैपरों के अस्तित्व के लिए वह जिम्मेदार थी. न्यायालय ने तमन्ना के इस दावे को भी अस्वीकार कर दिया कि कंपनी ने समझौते की अवधि समाप्त होने के बाद भी अपने विज्ञापनों में उसकी तस्वीरों का दुरुपयोग किया था.