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Evergreen Song: तीन पुराने गानों को जोड़कर बना था ‘एक चतुर नार’, किशोर कुमार और मन्ना डे की जुगलबंदी आज भी है सुपरहिट

Evergreen Song: साल 1968 में रिलीज हुई फिल्म 'पड़ोसन' का गाना एक चतुर नार को आज भी काफी पसंद किया जाता है. हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि इस गाने की जड़ें काफी पुरानी हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में...

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Last Updated: October 16, 2026 19:14:59 IST

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Evergreen Song: साल 1968 में रिलीज हुई फिल्म ‘पड़ोसन’ हिंदी सिनेमा की उन फिल्मों में शामिल है, जिन्हें आज भी खूब पसंद किया जाता है. ज्योति स्वरूप के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सुनील दत्त, सायरा बानो, महमूद और किशोर कुमार ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं. फिल्म की कहानी, कॉमेडी और कलाकारों की शानदार अदाकारी ने दर्शकों का दिल जीत लिया. इस फिल्म की एक खासियत ऐसी भी है, जिसके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे. इसका मशहूर गाना ‘एक चतुर नार’ सिर्फ एक धुन से तैयार नहीं हुआ था बल्कि इसमें पुराने गानों के हिस्सों को मिलाकर एक नया और मजेदार संगीत तैयार किया गया था.

आज भी पसंद किया जाता है गाना

‘एक चतुर नार करके श्रृंगार’ में किशोर कुमार और मन्ना डे की आवाजों का ऐसा मेल सुनाई देता है, जो गाने को बेहद खास बनाता है. फिल्म में महमूद का किरदार मन्ना डे की आवाज में गाता है. वहीं किशोर कुमार सुनील दत्त के किरदार के लिए अपनी आवाज देते हैं. दोनों के बीच संगीत का मुकाबला धीरे-धीरे मजेदार नोकझोंक में बदल जाता है. यही वजह है कि यह गाना आज भी संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय है. इस गाने की खास बात सिर्फ इसकी शानदार गायकी नहीं बल्कि इसे तैयार करने का अनोखा तरीका भी है. इसके संगीत में पुराने हिंदी फिल्मी गीतों की झलक मिलती है. अलग-अलग धुनों और गायकी के अंदाज को इस तरह जोड़ा गया कि सुनने वालों को यह एक ही गाना लगता है.

पुराने गानों से मिली थी पहचान

इस गाने की जड़ें हिंदी सिनेमा के पुराने दौर से जुड़ी हैं. किशोर कुमार ने अपने बड़े भाई अशोक कुमार के पुराने गीत से प्रेरणा ली और फिर उसमें दूसरे गानों की धुनों को शामिल करके इसे नया रूप दिया. यही प्रयोग आगे चलकर ‘पड़ोसन’ के सबसे यादगार संगीत दृश्यों में से एक बन गया. बताया जाता है कि इस गाने को तैयार करने में तीन पुराने गीतों के हिस्सों का इस्तेमाल किया गया था.

इन फिल्मों से जुड़ी है ‘पड़ोसन’

1941 में आई फिल्म झूला में अशोक कुमार ने ‘एक चतुर नार करके श्रृंगार’ का शुरुआती रूप गाया था. इसी गीत के आलाप से नए संस्करण को प्रेरणा मिली.

1939 में आई फिल्म संत तुलसीदास फिल्म के गीत बन चले राम रघुराई की धुन से प्रेरित हिस्सा ‘अरे देखी तेरी चतुराई’ के रूप में जोड़ा गया.

1948 में आई फिल्म जिद्दी में लता मंगेशकर के गीत चंदा रे जा रे जा रे को भी इस नए संस्करण की प्रेरणाओं में गिना जाता है.

ये भी पढ़ें: फिल्मी नहीं, असली है एंथनी गोंजाल्विस! अमिताभ बच्चन के किरदार के पीछे छिपा है राज, RD बर्मन-प्यारेलाल से नाता

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Last Updated: October 16, 2026 19:14:59 IST

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Evergreen Song: साल 1968 में रिलीज हुई फिल्म ‘पड़ोसन’ हिंदी सिनेमा की उन फिल्मों में शामिल है, जिन्हें आज भी खूब पसंद किया जाता है. ज्योति स्वरूप के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सुनील दत्त, सायरा बानो, महमूद और किशोर कुमार ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं. फिल्म की कहानी, कॉमेडी और कलाकारों की शानदार अदाकारी ने दर्शकों का दिल जीत लिया. इस फिल्म की एक खासियत ऐसी भी है, जिसके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे. इसका मशहूर गाना ‘एक चतुर नार’ सिर्फ एक धुन से तैयार नहीं हुआ था बल्कि इसमें पुराने गानों के हिस्सों को मिलाकर एक नया और मजेदार संगीत तैयार किया गया था.

आज भी पसंद किया जाता है गाना

‘एक चतुर नार करके श्रृंगार’ में किशोर कुमार और मन्ना डे की आवाजों का ऐसा मेल सुनाई देता है, जो गाने को बेहद खास बनाता है. फिल्म में महमूद का किरदार मन्ना डे की आवाज में गाता है. वहीं किशोर कुमार सुनील दत्त के किरदार के लिए अपनी आवाज देते हैं. दोनों के बीच संगीत का मुकाबला धीरे-धीरे मजेदार नोकझोंक में बदल जाता है. यही वजह है कि यह गाना आज भी संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय है. इस गाने की खास बात सिर्फ इसकी शानदार गायकी नहीं बल्कि इसे तैयार करने का अनोखा तरीका भी है. इसके संगीत में पुराने हिंदी फिल्मी गीतों की झलक मिलती है. अलग-अलग धुनों और गायकी के अंदाज को इस तरह जोड़ा गया कि सुनने वालों को यह एक ही गाना लगता है.

पुराने गानों से मिली थी पहचान

इस गाने की जड़ें हिंदी सिनेमा के पुराने दौर से जुड़ी हैं. किशोर कुमार ने अपने बड़े भाई अशोक कुमार के पुराने गीत से प्रेरणा ली और फिर उसमें दूसरे गानों की धुनों को शामिल करके इसे नया रूप दिया. यही प्रयोग आगे चलकर ‘पड़ोसन’ के सबसे यादगार संगीत दृश्यों में से एक बन गया. बताया जाता है कि इस गाने को तैयार करने में तीन पुराने गीतों के हिस्सों का इस्तेमाल किया गया था.

इन फिल्मों से जुड़ी है ‘पड़ोसन’

1941 में आई फिल्म झूला में अशोक कुमार ने ‘एक चतुर नार करके श्रृंगार’ का शुरुआती रूप गाया था. इसी गीत के आलाप से नए संस्करण को प्रेरणा मिली.

1939 में आई फिल्म संत तुलसीदास फिल्म के गीत बन चले राम रघुराई की धुन से प्रेरित हिस्सा ‘अरे देखी तेरी चतुराई’ के रूप में जोड़ा गया.

1948 में आई फिल्म जिद्दी में लता मंगेशकर के गीत चंदा रे जा रे जा रे को भी इस नए संस्करण की प्रेरणाओं में गिना जाता है.

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