सूरत (गुजरात) [भारत], 21 अक्टूबर: मेहंदी की कलम से रामायण के प्रसंगों को स्थायी रूप देकर सूरत की मेहंदी आर्टिस्ट निमिषा पारेख ने एक अनूठी कलाकृति तैयार की है। दुनिया का पहला मेहंदी से लिखा गया रामायण बताई जा रही इस कृति ‘मेहंदी कृत रामायण’ में रामायण के 51 महत्वपूर्ण प्रसंगों को मेहंदी के माध्यम से वारली चित्रशैली में प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक प्रसंग के साथ उससे संबंधित चौपाई भी मेहंदी से लिखी गई है। नई पीढ़ी और अन्य भाषाओं को जानने वाले लोग भी रामायण के प्रसंगों को आसानी से समझ सकें, इसके लिए चौपाइयों का हिंदी और अंग्रेजी अनुवाद भी दिया गया है। इस अनूठी कलाकृति को तैयार करने में निमिषा पारेख को डेढ़ से दो साल का समय लगा। अब इस सृजन को संत मोरारी बापू का आशीर्वाद भी मिला है।
- 51 प्रसंगों के साथ तैयार किया रामायण में वारली चित्रशैली, चौपाई और हिंदी-अंग्रेजी अनुवाद का अनूठा संगम
- डेढ़ से दो साल की मेहनत लाई रंग, इससे पहले 51 बहनों के हाथों पर रामायण के प्रसंग प्रस्तुत करने पर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में मिल चुका है स्थान
निमिषा पारेख ने एक तारीख को मोरारी बापू से मुलाकात कर उन्हें ‘मेहंदी कृत रामायण’ भेंट की थी। पुस्तक देखकर मोरारी बापू ने उन्हें आशीर्वाद दिया और पुस्तक में तारीख के साथ अपने आशीर्वचन भी लिखे। राम और हनुमान के परम भक्त तथा रामकथा के प्रखर वक्ता मोरारी बापू से मिली इस प्रतिक्रिया को निमिषा पारेख ने अद्भुत अनुभव बताया है। उन्होंने कहा कि मोरारी बापू ने अपने प्रवचन की शुरुआत में भी मेहंदी से रामायण के 51 प्रसंगों को प्रस्तुत करने के उनके प्रयास का उल्लेख किया था। उनके आशीर्वाद से इस सृजन को विशेष प्रोत्साहन मिला है।
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण से मिली प्रेरणा
अयोध्या में राम मंदिर के नवनिर्माण के दौरान देश-विदेश में राम नाम की गूंज और रामभक्ति की भावना से प्रेरित होकर निमिषा पारिख को मेहंदी आर्टिस्ट के रूप में रामायण में अपना योगदान देने का विचार आया था। शुरुआत में उन्होंने 51 बहनों के हाथों पर मेहंदी से रामायण के 51 प्रसंग प्रस्तुत किए थे। इस अनूठे कार्य को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान मिला था। इसके बाद गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने उन्हें गांधीनगर बुलाकर सम्मान पत्र देकर प्रोत्साहित किया था। हालांकि, हाथों पर लगी मेहंदी कुछ समय बाद मिट जाती है। रामायण के प्रसंगों को स्थायी रूप से लोगों तक पहुंचाने के विचार से निमिषा पारेख ने कैनवास पर वारली चित्रशैली में 51 प्रसंग बनाए और उनके साथ संबंधित चौपाइयां मेहंदी से लिखीं। इस तरह तैयार हुई कलाकृति को पुस्तक का स्वरूप दिया गया।
दो भारतीय कलाओं का अनूठा संगम
‘मेहंदी कृत रामायण’ में मेहंदी जैसी पारंपरिक भारतीय कला और गुजरात – महाराष्ट्र की लोककला के रूप में प्रसिद्ध वारली चित्रशैली का समन्वय किया गया है। प्रत्येक प्रसंग को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, जिससे छोटे बच्चे भी इसे आसानी से समझ सकें और युवा पीढ़ी में रामायण के प्रति रुचि बढ़े। चौपाइयों के हिंदी और अंग्रेजी अनुवाद के माध्यम से भाषा की बाधा दूर करने का भी प्रयास किया गया है।
35 साल से मेहंदी कला में कर रही हैं नए प्रयोग
निमिषा पारेख पिछले 35 साल से मेहंदी कला से जुड़ी हैं। मेहंदी को केवल शृंगार तक सीमित रखने के बजाय वह इसके माध्यम से भावनाओं, जीवन की यादों और प्रसंगों को जीवंत बनाए रखने के प्रयोग करती रही हैं। पिछले 30 से 35 साल से वह लोगों के जीवन के खास पलों और भावनाओं को मेहंदी की डिजाइन में प्रस्तुत कर रही हैं।
गर्भसंस्कार के हिस्से के रूप में गर्भवती महिलाओं के लिए बेली मेहंदी बनाने के साथ ही उन्होंने कैंसर के मरीजों के लिए भी काम किया है। कैंसर के इलाज के दौरान बाल गंवाने वाले मरीजों के सिर पर मेहंदी से डिजाइन बनाकर उन्हें सकारात्मक अनुभूति देने का प्रयास किया जाता है। उनके लिए मेहंदी केवल सुंदरता या रुतबे का प्रतीक नहीं, बल्कि भावनाओं, संस्कृति और सकारात्मकता को व्यक्त करने का माध्यम है। ‘मेहंदी कृत रामायण’ इसी विचार को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप में प्रस्तुत करने वाली एक विशिष्ट कलाकृति है।
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