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Home > देश > समुद्र के रास्ते तय की 4500 KM की दूरी, सपनों के राजकुमार की तलाश में पहुंची दक्षिण कोरिया, क्या है अयोध्या के राजकुमारी की कहानी?

समुद्र के रास्ते तय की 4500 KM की दूरी, सपनों के राजकुमार की तलाश में पहुंची दक्षिण कोरिया, क्या है अयोध्या के राजकुमारी की कहानी?

Ayodhya Princess Story: आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति ली जे म्युंग की मुलाकात हुई. इस दौरान पीएम मोदी ने अयोध्या की राजकुमारी सूरी रत्ना का जिक्र किया. आइए जानते हैं कि 2000 साल पुरानी ये कहानी क्या है?

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: April 20, 2026 15:36:47 IST

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Ayodhya Princess Story: सोमवार (20 अप्रैल, 2026) को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग (Lee Jae Myung) के साथ बेहद अहम बैठक हुई. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राजधानई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में सोमवार को दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई. इन दोनों नेताओं का जोर ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी जंग पर रहा.

दोनों नेताओं ने इस बात को लेकर लंबे समय तक मंथन किया कि जंग के इस दौर में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को किस तरह से मजबूत किया जाए. बातचीत के बाद दोनों नेताओं ने एक पौधा लगाकर प्रकृति के प्रति संवेदनशील होने का संदेश दिया.

2000 साल पुरानी कहानी कौन सी है?

इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने 2000 साल पुराने एक किस्से का जिक्र किया. जिसकी वजह से इस कहानी की चर्चा फिर से शुरू हो गई है. दरअसल, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत और कोरिया के बीच हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक संबंध हैं. 2000 साल पहले अयोध्या की राजकुमारी सूरीरत्ना और कोरिया के राजा किम-सुरो की कहानी हमारी साझा विरासत है. आइए जानते हैं कि 2000 साल पुरानी ये कहानी कौन सी है?



जब अयोध्या की राजकुमारी पहुंची दक्षिण कोरिया

दरअसल, यह कहानी 2,000 साल पुरानी है, जब अयोध्या की राजकुमारी सूरी रत्ना ने 16 साल की उम्र में समुद्र के रास्ते लगभग 4,500 किलोमीटर का सफर तय किया और अपने सपनों के राजकुमार की तलाश में दक्षिण कोरिया पहुंच गई. दक्षिण कोरिया पहुंचने के बाद अयोध्या की राजकुमारी ने कोरिया के राजा किम सूरो से शादी कर ली. इसके बाद अयोध्या की राजकुमारी सूरी रत्ना को रानी ह्यो ह्वांग-ओके के नाम से जाना जाने लगा.

अयोध्या को अपना ननिहाल मानते हैं दक्षिण कोरिया के लोग

इतिहासकारों के अनुसार, यही वजह है कि आज भी दक्षिण कोरिया के 60 लाख से भी ज्यादा लोग भगनाम राम की नगरी अयोध्या को अपना ननिहाल मानते हैं. इसके अलावा, साल 2019 में भारत और दक्षिण कोरिया ने मिलकर राजकुमारी सूरी रत्ना की याद में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया गया था. साथ ही राजकुमारी की याद में अयोध्या में सरयू नदी के किनारे एक पार्क भी बनवाया गया है. इस पार्क को रानी ह्यो ह्वांग-ओके के नाम से जाना जाता है.

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Last Updated: April 20, 2026 15:36:47 IST

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Ayodhya Princess Story: सोमवार (20 अप्रैल, 2026) को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग (Lee Jae Myung) के साथ बेहद अहम बैठक हुई. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राजधानई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में सोमवार को दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई. इन दोनों नेताओं का जोर ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी जंग पर रहा.

दोनों नेताओं ने इस बात को लेकर लंबे समय तक मंथन किया कि जंग के इस दौर में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को किस तरह से मजबूत किया जाए. बातचीत के बाद दोनों नेताओं ने एक पौधा लगाकर प्रकृति के प्रति संवेदनशील होने का संदेश दिया.

2000 साल पुरानी कहानी कौन सी है?

इस मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने 2000 साल पुराने एक किस्से का जिक्र किया. जिसकी वजह से इस कहानी की चर्चा फिर से शुरू हो गई है. दरअसल, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत और कोरिया के बीच हजारों वर्ष पुराने सांस्कृतिक संबंध हैं. 2000 साल पहले अयोध्या की राजकुमारी सूरीरत्ना और कोरिया के राजा किम-सुरो की कहानी हमारी साझा विरासत है. आइए जानते हैं कि 2000 साल पुरानी ये कहानी कौन सी है?



जब अयोध्या की राजकुमारी पहुंची दक्षिण कोरिया

दरअसल, यह कहानी 2,000 साल पुरानी है, जब अयोध्या की राजकुमारी सूरी रत्ना ने 16 साल की उम्र में समुद्र के रास्ते लगभग 4,500 किलोमीटर का सफर तय किया और अपने सपनों के राजकुमार की तलाश में दक्षिण कोरिया पहुंच गई. दक्षिण कोरिया पहुंचने के बाद अयोध्या की राजकुमारी ने कोरिया के राजा किम सूरो से शादी कर ली. इसके बाद अयोध्या की राजकुमारी सूरी रत्ना को रानी ह्यो ह्वांग-ओके के नाम से जाना जाने लगा.

अयोध्या को अपना ननिहाल मानते हैं दक्षिण कोरिया के लोग

इतिहासकारों के अनुसार, यही वजह है कि आज भी दक्षिण कोरिया के 60 लाख से भी ज्यादा लोग भगनाम राम की नगरी अयोध्या को अपना ननिहाल मानते हैं. इसके अलावा, साल 2019 में भारत और दक्षिण कोरिया ने मिलकर राजकुमारी सूरी रत्ना की याद में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया गया था. साथ ही राजकुमारी की याद में अयोध्या में सरयू नदी के किनारे एक पार्क भी बनवाया गया है. इस पार्क को रानी ह्यो ह्वांग-ओके के नाम से जाना जाता है.

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