केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधानमंत्री ने छात्रों के प्रदर्शन के बीच अपनी इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सौंप दिया. इस में पत्र में कहा गया है कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि देश-विरोधी तत्व जंतर-मंतर और पूरे देश में बनी स्थिति का फ़ायदा न उठा सकें. देश एकजुट रहे. भारत के छात्र कानूनी मुश्किलों में न फंसें और अपनी पढ़ाई व करियर पर ध्यान दें, इसलिए मैंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफ़ा भेज दिया है. X पर पोस्ट किए गए एक पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े घटनाक्रमों की नैतिक ज़िम्मेदारी ले रहे हैं.
प्रधान ने लिखा- ‘पहले दिन से ही मैंने ज़िम्मेदारी स्वीकार की और कभी भी इस स्थिति से पीछे नहीं हटा. उन्होंने कहा कि 3 मई, 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं का पता चलने के बाद नरेन्द्र मोदी सरकार ने तुरंत जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंप दी. परीक्षा रद्द कर दी और एक नई परीक्षा की घोषणा करके उसे आयोजित भी किया. पूर्व मंत्री ने कहा कि 21 जून को दोबारा परीक्षा “सरकार के सभी विभागों के मिलकर काम करने के तरीके” (whole-of-government approach) से सफलतापूर्वक आयोजित की गई, जिसमें केंद्र, राज्य सरकारें और ज़िला प्रशासन शामिल थे.
गुमराह करने की कोशिश
उन्होंने आरोप लगाया कि ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने विवाद के दौरान छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की और कहा कि इन कोशिशों से उन्हें बहुत दुख हुआ. उन्होंने किसी व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं लिया, हालांकि पिछले कुछ दिनों में उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं से उन्हें दुख हुआ है, लेकिन ज़ोर देकर कहा कि यह मुद्दा व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं है. इसके बजाय उन्होंने कहा कि उनका फैसला छात्रों की सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने की ज़रूरत से प्रेरित था.
उन्होंने लिखा कि जंतर-मंतर और पूरे देश में पैदा हुई स्थिति को देखते हुए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि देश-विरोधी ताकतें इसका फ़ायदा न उठा सकें, देश की एकता बनी रहे, किसी भी छात्र का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे और हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई और करियर बनाने में लगाएं, मैंने माननीय प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है. उन्होंने कहा कि युवाओं को “गलत जानकारी और भ्रम के जाल में नहीं फंसने देना चाहिए.