Haridwar News: हरिद्वार की हरकी पैड़ी पर बुधवार सुबह पहुंचे श्रद्धालुओं को उस समय निराशा हाथ लगी, जब उन्हें गंगा में स्नान करने के लिए पर्याप्त पानी ही नहीं मिला. दशहरे की रात से गंगनहर का पानी बंद होने के कारण घाट पर गंगा की धारा लगभग सूख गई. जो लोग आस्था की डुबकी लगाने और गंगा जल से आचमन करने पहुंचे थे, उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा. हालांकि, गंगा में पानी कम होने से कुछ लोगों के लिए कमाई का मौका भी बन गया. कई लोग घाट की रेत में छलनी और जाल की मदद से सिक्के और कीमती सामान तलाशते दिखाई दिए.
हरकी पैड़ी पर पानी की कमी
हरिद्वार में गंगनहर का पानी हर साल सफाई और मरम्मत के काम के लिए कुछ समय तक रोका जाता है. इसी वजह से इस बार भी 20 अक्टूबर की रात से नहर का प्रवाह बंद कर दिया गया. इसका असर हरकी पैड़ी पर दिखाई दिया, जहां गंगा की धारा काफी कम हो गई. बुधवार सुबह स्नान और दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को उम्मीद के मुताबिक पानी नहीं मिला. गंगा में पर्याप्त जल नहीं होने के कारण लोगों को आचमन करने में भी परेशानी हुई. हरकी पैड़ी पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थिति निराशाजनक रही.
VIDEO | Haridwar: Devotees disappointed as water level drops at Har Ki Pauri Ganga canal, which has been closed for 20 days for repairs. (Full video available on PTI Videos – https://t.co/d8jp61yd2p) https://t.co/ZregU34tcV
— Press Trust of India (@PTI_News) October 21, 2026
दीपावली तक चलेगा मरम्मत का काम
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग हर साल दशहरे से दीपावली के बीच गंगनहर की सफाई और मरम्मत कराता है. इस दौरान घाटों की मरम्मत, सीवेज व्यवस्था में सुधार और दूसरे जरूरी काम किए जाते हैं. इस बार अर्धकुंभ से जुड़े कुछ कार्य भी प्रस्तावित हैं. विभाग के अधिशासी अभियंता विकास त्यागी के अनुसार, गंगनहर की वार्षिक बंदी के कारण पानी का प्रवाह रोका गया है. उन्होंने बताया कि हरकी पैड़ी पर शाम को गंगा आरती के समय आंशिक रूप से जल छोड़ा जाएगा, ताकि आरती के दौरान पानी की उपलब्धता बनी रहे. तय कार्यक्रम के अनुसार, 7 नवंबर की रात को गंगनहर में पानी दोबारा छोड़ा जाएगा.
गंगा की रेत में सिक्के तलाशते दिखे लोग
गंगा का जलस्तर कम होने से घाट पर कुछ लोग छलनी और जाल लेकर रेत में सिक्के और जेवर खोजते नजर आए. ये लोग गंगा में चढ़ाए गए सिक्कों और अन्य सामान को ढूंढकर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं. जहां श्रद्धालु पानी की कमी से परेशान दिखे, वहीं इन परिवारों के लिए गंगा की रेत कमाई का जरिया बन गई.
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