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JNU में 17 दिन बाद खत्म हुई छात्रों की भूख हड़ताल, 5 छात्रों का निष्कासन रद्द करने का निर्देश

JNU Students Hunger Strike: JNU में पिछले 17 दिनों से चल रही छात्रों की भूख हड़ताल मंगलवार को खत्म हो गई. छात्र संघ और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बैठक के बाद ये फैसला लिया गया.

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Last Updated: October 20, 2026 16:09:02 IST

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JNU Students Hunger Strike: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पिछले 17 दिनों से जारी छात्रों की भूख हड़ताल मंगलवार को खत्म हो गई. छात्र संघ और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच हुई बैठकों के बाद यह फैसला लिया गया. बातचीत के दौरान छात्रों की कई मांगों पर चर्चा हुई. विश्वविद्यालय की ओर से पांच छात्रों का निष्कासन रद्द करने का निर्देश भी दिया गया है. हालांकि, आंदोलन से जुड़ी अन्य मांगों पर आगे की प्रक्रिया के लिए समितियां बनाने की बात कही गई है.

ये फैसला रद्द करने का निर्देश

स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के डीन विवेक कुमार के हस्ताक्षर वाले पत्र में पांच छात्रों का निष्कासन रद्द करने की बात कही गई है. इनमें अदिति मिश्रा, के. गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली और नीतीश कुमार के नाम शामिल हैं. छात्र संघ की प्रमुख मांगों में निष्कासित पदाधिकारियों की बहाली भी शामिल थी.

इन मांगों पर भी बनी सहमति

छात्र प्रतिनिधियों और विश्वविद्यालय समिति के बीच हुई बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई. छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने, विवादित नियमों की समीक्षा करने और उन्हें हटाने के लिए समिति बनाने की बात कही गई. इसके अलावा, JNU प्रवेश परीक्षा (JNUEE) और हॉस्टल आरक्षण से जुड़े मामलों पर भी समितियां गठित करने का प्रस्ताव रखा गया. बैठक में निष्कासन के विरोध, यूजीसी नियमों के खिलाफ प्रदर्शन और हॉस्टल की सुविधाओं से जुड़े आंदोलनों के दौरान शुरू की गई प्रॉक्टोरियल जांच वापस लेने पर भी चर्चा हुई. हॉस्टल की व्यवस्था, लाइब्रेरी के समय और CSLG में कैंटीन खोलने जैसे मुद्दे भी उठाए गए.

छात्रों और प्रशासन के बीच आरोप-प्रत्यारोप

JNUSU का कहना है कि वह करीब 9,000 छात्रों के जनादेश वाला निर्वाचित छात्र संगठन है और उसके प्रतिनिधियों की बहाली जरूरी है. छात्र संघ ने विश्वविद्यालय में भर्तियों में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया है. वहीं, कुलपति शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने कहा कि प्रशासन 16 अक्टूबर को प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने पहुंचा था लेकिन वहां कोई मौजूद नहीं था. छात्रों ने इस दावे पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि प्रशासन आंदोलन को कमजोर दिखाने की कोशिश कर रहा था. छात्र संघ ने भूख हड़ताल के दौरान निष्कासित पदाधिकारियों को मेडिकल जांच की सुविधा नहीं मिलने का आरोप लगाया.

ये भी पढ़ें: Tiger Shroff Firing Case: कैलिफोर्निया से कौन चला रहा था पूरा खूनी खेल? 34 हजार की दी सुपारी, फरार होने का प्लान भी था तैयार

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JNU Students Hunger Strike: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पिछले 17 दिनों से जारी छात्रों की भूख हड़ताल मंगलवार को खत्म हो गई. छात्र संघ और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच हुई बैठकों के बाद यह फैसला लिया गया. बातचीत के दौरान छात्रों की कई मांगों पर चर्चा हुई. विश्वविद्यालय की ओर से पांच छात्रों का निष्कासन रद्द करने का निर्देश भी दिया गया है. हालांकि, आंदोलन से जुड़ी अन्य मांगों पर आगे की प्रक्रिया के लिए समितियां बनाने की बात कही गई है.

ये फैसला रद्द करने का निर्देश

स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के डीन विवेक कुमार के हस्ताक्षर वाले पत्र में पांच छात्रों का निष्कासन रद्द करने की बात कही गई है. इनमें अदिति मिश्रा, के. गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली और नीतीश कुमार के नाम शामिल हैं. छात्र संघ की प्रमुख मांगों में निष्कासित पदाधिकारियों की बहाली भी शामिल थी.

इन मांगों पर भी बनी सहमति

छात्र प्रतिनिधियों और विश्वविद्यालय समिति के बीच हुई बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई. छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने, विवादित नियमों की समीक्षा करने और उन्हें हटाने के लिए समिति बनाने की बात कही गई. इसके अलावा, JNU प्रवेश परीक्षा (JNUEE) और हॉस्टल आरक्षण से जुड़े मामलों पर भी समितियां गठित करने का प्रस्ताव रखा गया. बैठक में निष्कासन के विरोध, यूजीसी नियमों के खिलाफ प्रदर्शन और हॉस्टल की सुविधाओं से जुड़े आंदोलनों के दौरान शुरू की गई प्रॉक्टोरियल जांच वापस लेने पर भी चर्चा हुई. हॉस्टल की व्यवस्था, लाइब्रेरी के समय और CSLG में कैंटीन खोलने जैसे मुद्दे भी उठाए गए.

छात्रों और प्रशासन के बीच आरोप-प्रत्यारोप

JNUSU का कहना है कि वह करीब 9,000 छात्रों के जनादेश वाला निर्वाचित छात्र संगठन है और उसके प्रतिनिधियों की बहाली जरूरी है. छात्र संघ ने विश्वविद्यालय में भर्तियों में कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठाया है. वहीं, कुलपति शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने कहा कि प्रशासन 16 अक्टूबर को प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने पहुंचा था लेकिन वहां कोई मौजूद नहीं था. छात्रों ने इस दावे पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि प्रशासन आंदोलन को कमजोर दिखाने की कोशिश कर रहा था. छात्र संघ ने भूख हड़ताल के दौरान निष्कासित पदाधिकारियों को मेडिकल जांच की सुविधा नहीं मिलने का आरोप लगाया.

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